आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि आज वित्तीय प्रणाली का मजबूत होना इस बात की गारंटी नहीं है कि वह भविष्य के जोखिमों से पूरी तरह सुरक्षित रहेगी।
RBI Governor Sanjay Malhotra: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने देश की वित्तीय व्यवस्था को भविष्य में सामने आने वाले जोखिमों के प्रति लगातार सतर्क रहने की जरूरत बताई है। उन्होंने कहा कि किसी वित्तीय प्रणाली का आज मजबूत स्थिति में होना इस बात की गारंटी नहीं देता कि वह भविष्य के हर संकट से सुरक्षित रहेगी। उनके मुताबिक, वित्तीय स्थिरता का उद्देश्य केवल संकट को रोकना नहीं, बल्कि ऐसी व्यवस्था तैयार करना होना चाहिए जो अचानक आने वाले झटकों के बावजूद अपनी महत्वपूर्ण सेवाएं जारी रख सके।
मल्होत्रा ने कौटिल्य आर्थिक सम्मेलन में वित्तीय स्थिरता से जुड़े मुद्दों पर बात करते हुए प्रणालीगत जोखिमों की बदलती प्रकृति पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आंतरिक और बाहरी वित्तीय झटकों को पूरी तरह समाप्त करना संभव नहीं है। ऐसे में नीतिगत प्राथमिकता वित्तीय व्यवस्था की लचीलापन क्षमता यानी resilience बढ़ाने की होनी चाहिए।
आज मजबूत सिस्टम का मतलब भविष्य में भी सुरक्षा नहीं
RBI गवर्नर ने बैंकों और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFCs) की मजबूत बैलेंस शीट का उल्लेख करते हुए कहा कि मौजूदा मजबूती महत्वपूर्ण है, लेकिन इसे भविष्य की सुरक्षा की स्थायी गारंटी नहीं माना जा सकता। उनके अनुसार, वित्तीय व्यवस्था को लगातार बदलते जोखिमों के अनुरूप तैयार रखना जरूरी है। इसके लिए नियामकों और वित्तीय संस्थानों को संभावित कमजोरियों की पहचान समय रहते करनी होगी।
वित्तीय स्थिरता का मतलब केवल यह देखना नहीं है कि बैंक आज कितने मजबूत हैं, बल्कि यह भी समझना है कि किसी बड़े झटके की स्थिति में पूरा सिस्टम किस तरह प्रतिक्रिया देगा।
अगला वित्तीय संकट कहां से आ सकता है?

मल्होत्रा ने वित्तीय जोखिमों के बदलते स्वरूप की ओर भी ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा कि भविष्य में कोई बड़ा व्यवधान जरूरी नहीं कि सीधे बैंकिंग या वित्तीय क्षेत्र से ही शुरू हो। वैश्विक घटनाएं, साइबर हमले और तकनीकी विफलताएं भी वित्तीय व्यवस्था पर दबाव डाल सकती हैं। आधुनिक वित्तीय प्रणाली कई तरह के डिजिटल नेटवर्क और तकनीकी बुनियादी ढांचे पर निर्भर है। ऐसे में किसी एक हिस्से में पैदा हुई समस्या दूसरे हिस्सों तक पहुंच सकती है।
यही वजह है कि वित्तीय स्थिरता का आकलन करते समय केवल अलग-अलग संस्थानों की स्थिति देखना पर्याप्त नहीं है। पूरे नेटवर्क के बीच मौजूद कनेक्शन और जोखिमों के फैलने के रास्तों को समझना भी जरूरी है।
केवल बैंक मजबूत होना पर्याप्त नहीं
RBI गवर्नर ने वित्तीय प्रणाली की मजबूती को व्यापक स्तर पर देखने की जरूरत बताई। उनके मुताबिक, मजबूत बैंकिंग सेक्टर वित्तीय स्थिरता के लिए जरूरी है, लेकिन यह अकेला पर्याप्त नहीं है। वित्तीय मजबूती में NBFCs, वित्तीय बाजार, भुगतान प्रणालियां, तकनीकी ढांचा उपलब्ध कराने वाली कंपनियां, महत्वपूर्ण थर्ड-पार्टी सर्विस प्रोवाइडर्स और सीमा-पार वित्तीय नेटवर्क भी शामिल हैं।
इनमें से किसी एक महत्वपूर्ण हिस्से में व्यवधान आने पर उसका असर दूसरे क्षेत्रों तक पहुंच सकता है। इसलिए नियामकीय निगरानी को पूरे वित्तीय इकोसिस्टम को ध्यान में रखकर विकसित करने की जरूरत है।
बेहतर डेटा और निगरानी पर जोर
मल्होत्रा ने वित्तीय जोखिमों की पहचान और आकलन के लिए ज्यादा बेहतर तथा विस्तृत डेटा की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उनका संदेश है कि जोखिम सामने आने के बाद प्रतिक्रिया देने के बजाय संभावित कमजोरियों की पहले से पहचान करना ज्यादा महत्वपूर्ण है। इसके लिए निगरानी व्यवस्था में सुधार, डेटा की गुणवत्ता बढ़ाने और वित्तीय संस्थानों के बीच आपसी निर्भरता को बेहतर तरीके से समझने की जरूरत होगी। इससे नियामकों को किसी संकट के संभावित असर का पहले से आकलन करने में मदद मिल सकती है।
वित्तीय स्थिरता का मतलब संकट को खत्म करना नहीं
RBI गवर्नर के संदेश का एक महत्वपूर्ण पहलू यह रहा कि वित्तीय झटकों को पूरी तरह रोकना हमेशा संभव नहीं होता। इसलिए वित्तीय स्थिरता का लक्ष्य ऐसी व्यवस्था बनाना होना चाहिए, जो संकट आने पर भी आवश्यक सेवाओं को जारी रख सके और नुकसान को सीमित रखे। इस दृष्टिकोण में बैंक, NBFC, बाजार, भुगतान व्यवस्था और तकनीकी नेटवर्क सभी की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। वैश्विक वित्तीय प्रणाली के बढ़ते आपसी जुड़ाव के बीच किसी एक देश या संस्था में पैदा हुई समस्या का प्रभाव दूसरे क्षेत्रों तक पहुंच सकता है।












