RSS के प्रमुख डॉ. मोहन भागवत ने उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन से की मुलाकात, जानें इसके मायने

RSS के प्रमुख डॉ. मोहन भागवत ने उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन से की मुलाकात, जानें इसके मायने

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख डॉ. मोहन भागवत ने बुधवार को उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन से मुलाकात की। यह बैठक दिल्ली में वाइस प्रेसिडेंट इन्क्लेव में हुई। उपराष्ट्रपति कार्यालय ने मुलाकात की जानकारी साझा करते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर दोनों नेताओं की एक साथ तस्वीर भी पोस्ट की।

नई दिल्ली: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख डॉ. मोहन भागवत ने बुधवार को देश के उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन से मुलाकात की। यह मुलाकात दिल्ली के वाइस प्रेसिडेंट इन्क्लेव में हुई। उपराष्ट्रपति कार्यालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर दोनों नेताओं की एक साथ तस्वीर साझा कर इस मुलाकात की जानकारी दी।

मुलाकात के राजनीतिक और सामाजिक मायने

विशेषज्ञों का मानना है कि मोहन भागवत और उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन की यह मुलाकात RSS के अंदर उनके करीबी संबंधों और संगठन के व्यापक प्रभाव को दर्शाती है। उपराष्ट्रपति का संघ के साथ जुड़ाव पुराना है। वे तमिलनाडु से हैं और लंबे समय से RSS के विचारधारा और कार्यक्रमों से जुड़े रहे हैं।जानकारों के अनुसार यह बैठक भारतीय राजनीति और शासन में संघ के लगातार बढ़ते प्रभाव को स्पष्ट करती है। इसके अलावा यह दोनों नेताओं के बीच आपसी संवाद और सहयोग की संभावना को भी मजबूत करती है।

इससे पहले उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन नई दिल्ली में श्री गुरु तेग बहादुर जी की 350वीं शहादत वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित एक अंतर-धार्मिक सम्मेलन को संबोधित कर चुके हैं। इस सम्मेलन में उपराष्ट्रपति ने श्री गुरु तेग बहादुर जी को सर्वोच्च बलिदान और नैतिक साहस का प्रतीक बताया, जिन्होंने न्याय के लिए आवाज उठाई और सताए गए लोगों की रक्षा की।

उपराष्ट्रपति ने अपने संबोधन में भारत की विविधता में एकता और ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ के विजन पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत जटिल वैश्विक चुनौतियों का समाधान प्रस्तुत करके दुनिया में नेतृत्व की भूमिका निभा रहा है।

वैश्विक दृष्टिकोण और भारत की भूमिका

सीपी राधाकृष्णन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दृष्टिकोण को उद्धृत करते हुए कहा कि ‘वसुधैव कुटुंबकम’ के उपनिषदिक आदर्श को वैश्विक मंच पर उजागर किया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि भारत की G20 थीम ‘एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य’ देश की सभ्यतागत बुद्धिमत्ता और वैश्विक जिम्मेदारी को दर्शाती है।

विशेषज्ञ मानते हैं कि उपराष्ट्रपति और RSS प्रमुख के बीच यह मुलाकात न केवल आंतरिक राजनीतिक और सामाजिक संबंधों को मजबूत करती है, बल्कि वैश्विक मंच पर भारत के नेतृत्व और उसके सांस्कृतिक मूल्यों को भी परिभाषित करती है।

Leave a comment