सुपौल। जिले में सहकार भारती की एक महत्वपूर्ण और विस्तृत बैठक आयोजित की गई, जिसमें संगठन के जिला पदाधिकारी, प्रखंड प्रतिनिधि, सहकारी समिति के सदस्य, स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता शामिल हुए। बैठक का मुख्य उद्देश्य सहकारिता आंदोलन को जमीनी स्तर पर मजबूत करना, स्वरोजगार को बढ़ावा देना और युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने की ठोस रणनीति तैयार करना रहा।
बैठक की शुरुआत संगठन के उद्देश्यों और सहकारिता की मूल भावना पर प्रकाश डालते हुए की गई। वक्ताओं ने कहा कि सहकारिता का मूल सिद्धांत “सभी के लिए, सभी के द्वारा” है, जो सामूहिक विकास और सामाजिक समरसता को बढ़ावा देता है। आज के प्रतिस्पर्धी दौर में जब रोजगार के अवसर सीमित हो रहे हैं, तब सहकारिता मॉडल ग्रामीण और अर्धशहरी क्षेत्रों में आर्थिक सशक्तिकरण का मजबूत माध्यम बन सकता है।
बैठक में विशेष रूप से स्वरोजगार के विभिन्न क्षेत्रों पर चर्चा की गई। कृषि आधारित उद्योग, डेयरी, मत्स्य पालन, मधुमक्खी पालन, मशरूम उत्पादन, हस्तशिल्प, बागवानी और लघु कुटीर उद्योगों को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया। विशेषज्ञों ने बताया कि यदि स्थानीय संसाधनों का सही उपयोग किया जाए तो कम लागत में भी बेहतर आय अर्जित की जा सकती है। इसके लिए सहकारी समितियों को तकनीकी प्रशिक्षण, बैंकिंग सहयोग और बाजार से सीधा संपर्क उपलब्ध कराना जरूरी है।
वक्ताओं ने यह भी कहा कि युवाओं को सरकारी योजनाओं और वित्तीय सहायता कार्यक्रमों की पूरी जानकारी नहीं मिल पाती, जिसके कारण वे लाभ से वंचित रह जाते हैं। सहकार भारती पंचायत स्तर पर जागरूकता अभियान चलाकर युवाओं को योजनाओं की जानकारी देगा और आवेदन प्रक्रिया में सहयोग करेगा। बैठक में यह प्रस्ताव भी रखा गया कि प्रत्येक प्रखंड में स्वरोजगार मार्गदर्शन शिविर आयोजित किए जाएं।
महिला सशक्तिकरण को भी बैठक का प्रमुख विषय बनाया गया। स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि किस तरह सामूहिक प्रयास से उन्होंने छोटे व्यवसाय शुरू किए और परिवार की आर्थिक स्थिति में सुधार लाया। संगठन के नेताओं ने कहा कि महिलाओं की भागीदारी के बिना सहकारिता आंदोलन अधूरा है। इसलिए महिलाओं को प्रशिक्षण, ऋण सुविधा और विपणन सहयोग देने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि संगठन की संरचना को और मजबूत किया जाएगा। प्रत्येक पंचायत में सक्रिय सदस्य नियुक्त किए जाएंगे, जो स्थानीय स्तर पर सहकारी गतिविधियों की निगरानी करेंगे। साथ ही डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से उत्पादों की ऑनलाइन बिक्री की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई, ताकि स्थानीय उत्पादों को व्यापक बाजार मिल सके।
वक्ताओं ने कहा कि सहकारिता केवल आर्थिक उन्नति का माध्यम नहीं, बल्कि सामाजिक एकजुटता का प्रतीक भी है। सामूहिक प्रयास से गांवों में पलायन की समस्या को कम किया जा सकता है और स्थानीय स्तर पर ही रोजगार के अवसर सृजित किए जा सकते हैं।
बैठक के अंत में सभी उपस्थित सदस्यों ने यह संकल्प लिया कि वे सहकारिता आंदोलन को नई ऊंचाई तक ले जाएंगे और अधिक से अधिक युवाओं, किसानों और महिलाओं को इससे जोड़ेंगे। संगठन ने आने वाले महीनों में जिला स्तरीय सम्मेलन और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने की भी घोषणा की।
सुपौल में आयोजित इस विस्तृत बैठक को जिले में आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में एक सकारात्मक और दूरगामी पहल के रूप में देखा जा रहा है। यदि प्रस्तावित योजनाओं को प्रभावी रूप से लागू किया गया, तो आने वाले समय में जिले में स्वरोजगार के नए अवसर विकसित हो सकते हैं और सहकारिता के माध्यम से समग्र विकास की नई तस्वीर उभर सकती है।










