वैश्विक बाजारों में उथल-पुथल और अनिश्चितता के बीच भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के बीच अपनी मजबूत वित्तीय साख का प्रदर्शन किया है। देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक ने अपनी लंदन शाखा के जरिए 50 करोड़ डॉलर मूल्य के ‘रेगुलेशन एस’ बॉन्ड की सफलतापूर्वक प्राइसिंग पूरी की है।
SBI Dollar Bond 2026: वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता के बीच भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने अंतरराष्ट्रीय डेट मार्केट में बड़ी सफलता हासिल की है। देश के सबसे बड़े बैंक ने अपनी लंदन शाखा के माध्यम से 500 मिलियन डॉलर यानी करीब 50 करोड़ डॉलर के Regulation S बॉन्ड की सफलतापूर्वक कीमत तय की है। इस पांच साल की बॉन्ड डील को निवेशकों से जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली और ऑर्डर बुक एक समय 2.46 अरब डॉलर तक पहुंच गई।
SBI की यह डील ऐसे समय हुई है जब वैश्विक अर्थव्यवस्था को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है और कंपनियां तथा बैंक विदेशी बाजारों से पूंजी जुटाने की लागत को लेकर सतर्क हैं। मजबूत मांग ने SBI को शुरुआती संकेतित स्प्रेड की तुलना में काफी कम लागत पर बॉन्ड जारी करने में मदद की।
5.25% कूपन पर तय हुआ बॉन्ड
SBI ने इस Regulation S बॉन्ड का कूपन रेट 5.25% तय किया है। बॉन्ड की कीमत पांच साल के अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड के मुकाबले 88 बेसिस पॉइंट के स्प्रेड पर तय हुई। शुरुआत में बैंक ने करीब 120 बेसिस पॉइंट का प्राइस गाइडेंस दिया था, लेकिन निवेशकों की मजबूत मांग के बाद इसे घटाकर 88 बेसिस पॉइंट कर दिया गया।
इस तरह अंतिम मूल्य निर्धारण में करीब 32 बेसिस पॉइंट की प्राइस कंप्रेशन हुई। इसका सीधा फायदा SBI को कम उधारी लागत के रूप में मिला। बैंक की ताजा घोषणा के मुताबिक, यह RBI की स्वैप विंडो घोषणा के बाद भारतीय सार्वजनिक बॉन्ड जारीकर्ताओं के बीच हासिल किए गए सबसे कड़े स्प्रेड में से एक है।
2.46 अरब डॉलर तक पहुंची ऑर्डर बुक
इस बॉन्ड की सबसे खास बात विदेशी निवेशकों की भारी दिलचस्पी रही। बुक-बिल्डिंग प्रक्रिया के दौरान ऑर्डर बुक का आकार बढ़कर 2.46 अरब डॉलर तक पहुंच गया। कुल 145 निवेशकों ने इस इश्यू में भाग लिया। यानी निवेशकों की मांग SBI द्वारा जुटाई गई राशि से करीब पांच गुना अधिक रही। अलग-अलग भौगोलिक क्षेत्रों के संस्थागत निवेशकों की भागीदारी ने यह संकेत दिया कि वैश्विक फिक्स्ड-इनकम बाजार में SBI की क्रेडिट प्रोफाइल को मजबूत माना जा रहा है।

बॉन्ड को मिली मजबूत क्रेडिट रेटिंग
SBI के मुताबिक, इन नोट्स को प्रमुख अंतरराष्ट्रीय और घरेलू रेटिंग एजेंसियों ने निवेश ग्रेड रेटिंग दी है। बॉन्ड को S&P से BBB, Fitch Ratings से BBB- और CareEdge Global से BBB+/Stable रेटिंग मिली है। क्रेडिट रेटिंग निवेशकों को किसी बॉन्ड जारीकर्ता की कर्ज चुकाने की क्षमता के बारे में आकलन देती है, हालांकि यह निवेश की गारंटी नहीं होती। Fitch ने इश्यू से पहले प्रस्तावित नोट्स को BBB- की अपेक्षित रेटिंग दी थी और इन्हें वरिष्ठ, असुरक्षित तथा गैर-अधीनस्थ दायित्वों के रूप में वर्णित किया था।
किन एक्सचेंज पर होंगे लिस्ट?
मूल्य निर्धारण प्रक्रिया पूरी होने के बाद SBI के इन डेट इंस्ट्रूमेंट्स को SGX-ST, India INX और NSE-IX पर लिस्ट किया जाएगा। इस तरह बॉन्ड को अंतरराष्ट्रीय और भारत के GIFT City स्थित अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजार दोनों में निवेशकों तक पहुंच मिल सकती है। विदेशी मुद्रा में फंड जुटाने के लिहाज से भारतीय बैंकों के लिए इस समय लागत एक महत्वपूर्ण मुद्दा है। Reuters के अनुसार, RBI की जून 2026 में शुरू की गई स्वैप सुविधा ने भारतीय बैंकों के लिए विदेशी बाजार से उधारी को अपेक्षाकृत आकर्षक बनाया है। इसी वजह से कई भारतीय बैंक डॉलर बॉन्ड बाजार का रुख कर रहे हैं।
SBI ने भी इससे पहले जून में एक अरब डॉलर की सार्वजनिक डॉलर बॉन्ड बिक्री की योजना बनाई थी, लेकिन उस समय बाजार में ऊंची उधारी लागत के कारण इश्यू टाल दिया गया था। बाद में बैंक ने निजी प्लेसमेंट के जरिए 600 मिलियन डॉलर जुटाए थे।
SBI चेयरमैन ने निवेशकों के भरोसे को बताया बड़ी उपलब्धि
SBI के चेयरमैन चल्ला श्रीनिवासुलु शेट्टी ने कहा कि वैश्विक अनिश्चितता के बीच इस बॉन्ड की सफल कीमत तय होना बैंक के ऑफशोर निवेशक आधार और भारत की विकास क्षमता में वैश्विक निवेशकों के भरोसे को दर्शाता है। उनके मुताबिक, कड़े स्प्रेड पर हासिल हुई यह कीमत भारत से जुड़े अन्य जारीकर्ताओं के लिए भी उधारी लागत को नियंत्रित रखने में मदद कर सकती है।
इस अंतरराष्ट्रीय बॉन्ड इश्यू के लिए BNP Paribas, Citigroup, Crédit Agricole CIB, Emirates NBD Bank PJSC, HSBC, MUFG और Standard Chartered Bank ने Joint Bookrunners के रूप में काम किया।










