सुप्रीम कोर्ट ने ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर (ASD) के इलाज में स्टेम सेल ट्रीटमेंट (SCT) का नियमित इस्तेमाल अनैतिक और गैरकानूनी करार दिया है। कोर्ट ने इसे केवल निगरानी वाले क्लिनिकल रिसर्च ट्रायल में ही अनुमति देने की बात कही। माता-पिता और मरीजों को अनप्रूव्ड थेरेपी से दूर रहने की चेतावनी दी गई है।
Supreme Court Ruling on ASD Treatment: सुप्रीम कोर्ट ने ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर (ASD) के मरीजों के इलाज में स्टेम सेल ट्रीटमेंट (SCT) का नियमित उपयोग अवैध बताया है। कोर्ट ने कहा कि SCT केवल निगरानी वाले क्लिनिकल ट्रायल में ही इस्तेमाल हो सकता है और माता-पिता या मरीज बिना मंजूरी वाले इलाज का विकल्प न अपनाएं। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय को निर्देश दिया गया है कि AIIMS और नेशनल मेडिकल काउंसिल के सहयोग से सुरक्षित विकल्प सुनिश्चित किए जाएं, ताकि मरीज वैज्ञानिक रूप से समर्थित और नैतिक इलाज प्राप्त कर सकें।
क्लिनिकल ट्रायल और सरकारी दिशा-निर्देश
कोर्ट ने स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय को निर्देश दिया कि वह AIIMS और नेशनल मेडिकल काउंसिल के अधिकारियों के साथ मिलकर ASD के मरीजों के लिए क्लिनिकल ट्रायल तक सुरक्षित विकल्प सुनिश्चित करें। यह व्यवस्था मरीजों को चार सप्ताह के भीतर ट्रांसफर किए जाने वाले संस्थानों तक लाने के लिए है। कोर्ट ने जोर दिया कि मरीजों की सहमति पर्याप्त जानकारी पर आधारित होनी चाहिए और किसी भी गलतफहमी में इलाज जारी रखना मेडिकल नैतिकता का उल्लंघन है।

मरीजों और माता-पिता के लिए चेतावनी
सुप्रीम कोर्ट ने माता-पिता और अभिभावकों से आग्रह किया कि वे अनप्रूव्ड SCT थेरेपी का उपयोग न करें। अगर मरीज पहले से थेरेपी ले रहे हैं, तो वह इसे केवल क्लिनिकल रिसर्च के तहत जारी रख सकते हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बिना मान्यता वाले इलाज को कमर्शियल प्रयास के रूप में जारी रखना गैरकानूनी है और ऐसे मामलों में कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला ASD के इलाज में वैज्ञानिक प्रमाण और नैतिक चिकित्सा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। आने वाले हफ्तों में सरकार के दिशा-निर्देश और क्लिनिकल ट्रायल नीतियां इस फैसले के प्रभाव को स्पष्ट करेंगी।








