₹546 करोड़ जब्ती मामले में अवधूत साठे ट्रेडिंग अकादमी की याचिका पर SAT 9 जनवरी 2026 को सुनवाई करेगा। सेबी के अंतरिम आदेश को चुनौती दी गई है। फिलहाल अकादमी को सीमित राशि निकालने की अनुमति मिली है।
SEBI ASTA Ban: अवधूत साठे ट्रेडिंग अकादमी (ASTA) और बाजार नियामक सेबी (SEBI) के बीच चल रहे विवाद में अब एक अहम मोड़ आ गया है। 546 करोड़ रुपये की जब्ती और शेयर बाजार से बाहर किए जाने के सेबी के आदेश को चुनौती देने वाली अकादमी की याचिका पर सिक्योरिटीज अपीलेट ट्रिब्यूनल (SAT) 9 जनवरी 2026 को सुनवाई करेगा। इस मामले पर निवेशकों, ट्रेडिंग समुदाय और मार्केट एक्सपर्ट्स की नजरें टिकी हुई हैं, क्योंकि यह केस निवेश सलाह, ट्रेनिंग बिजनेस और रेगुलेटरी नियमों से जुड़ा है।
SEBI का अंतरिम आदेश क्यों आया
सेबी ने 4 दिसंबर 2025 को एक अंतरिम आदेश जारी करते हुए अवधूत साठे ट्रेडिंग अकादमी पर गंभीर आरोप लगाए। नियामक के मुताबिक, अकादमी “शिक्षा” और “ट्रेनिंग” के नाम पर बिना रजिस्ट्रेशन निवेश सलाह (Investment Advisory) और रिसर्च एनालिस्ट जैसी सेवाएं दे रही थी। सेबी का कहना है कि यह काम सेबी के नियमों के खिलाफ है और इससे निवेशकों को गुमराह किया गया। इसी आधार पर सेबी ने अकादमी से 546 करोड़ रुपये जब्त करने और उसे शेयर बाजार से बाहर रखने का आदेश दिया।
SAT में याचिका और अगली सुनवाई
सेबी के इस आदेश के खिलाफ अकादमी ने SAT का रुख किया। ट्रिब्यूनल ने मामले की सुनवाई के लिए 9 जनवरी 2026 की तारीख तय की है। SAT ने यह भी स्पष्ट किया कि अदालत की छुट्टियों के चलते फिलहाल मौजूदा स्थिति बनी रहेगी। यानी सेबी का आदेश तब तक लागू रहेगा, जब तक अगली सुनवाई में कोई नया निर्देश नहीं आता।
सुनवाई से पहले SAT की आंशिक राहत
हालांकि, SAT ने अकादमी को आंशिक राहत दी है। ट्रिब्यूनल ने अकादमी को अपने बैंक खातों से इस महीने 2.25 करोड़ रुपये निकालने की अनुमति दी है। यह अनुमति रोजमर्रा के खर्च पूरे करने के लिए दी गई है। जस्टिस पी एस दिनेश कुमार ने अपने आदेश में कहा कि अदालत की छुट्टियों को देखते हुए यह राहत दी जा रही है। इसके साथ ही SAT ने सेबी को इस मामले में अपना जवाब दाखिल करने के लिए छह हफ्ते का समय भी दिया है।
अकादमी की मांग क्या थी
अवधूत साठे ट्रेडिंग अकादमी ने SAT से सेबी के आदेश पर पूरी तरह रोक लगाने की मांग की थी। इसके अलावा, अकादमी ने हर महीने 5.25 करोड़ रुपये निकालने की अनुमति भी मांगी थी, ताकि वह अपने कर्मचारियों, ऑफिस खर्च और अन्य संचालन से जुड़े खर्चों को पूरा कर सके। अकादमी का कहना था कि खातों पर रोक से उसका पूरा कामकाज ठप हो गया है।
SEBI ने मांग का विरोध क्यों किया
सेबी ने अकादमी की इस मांग का कड़ा विरोध किया। नियामक का कहना था कि जिन खर्चों का हवाला अकादमी दे रही है, उनमें से कई तत्काल जरूरी नहीं हैं। सेबी के अनुसार, विज्ञापन, सेमिनार और प्रमोशनल एक्टिविटीज जैसे खर्चों को रोजमर्रा की आवश्यक जरूरत नहीं माना जा सकता। इसलिए हर महीने बड़ी रकम निकालने की अनुमति देना उचित नहीं होगा।
अकादमी के वकील की दलील
अकादमी की ओर से वरिष्ठ वकील जनक द्वारकादास ने SAT में दलील दी कि सेबी का आदेश अचानक दिया गया, जिससे अकादमी को अपनी बात रखने का मौका ही नहीं मिला। उन्होंने कहा कि इस आदेश के चलते अकादमी का पूरा बिजनेस रुक गया है और यह संस्था की “आर्थिक मौत” के बराबर है। वकील ने यह भी कहा कि बिना सुनवाई के ऐसा सख्त कदम उठाना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है।
सेबी ने अकादमी के इन आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि यह कार्रवाई अचानक नहीं की गई। नियामक के मुताबिक, मार्च 2024 में ही अकादमी को प्रशासनिक चेतावनी दी गई थी। इसके बावजूद कथित गलत गतिविधियां जारी रहीं। सेबी ने बताया कि अगस्त 2025 में तलाशी और जब्ती कार्रवाई के दौरान कई अहम सबूत मिले, जिनके आधार पर यह अंतरिम आदेश जारी किया गया।
SEBI के गंभीर आरोप
सेबी के एकतरफा अंतरिम आदेश में कहा गया है कि अकादमी और उससे जुड़े लोग सोशल मीडिया पर भ्रामक वीडियो, बढ़ा-चढ़ाकर दिखाए गए अनुभव और असाधारण मुनाफे के वादे करते रहे। नियामक का कहना है कि इन दावों के कारण कई निवेशकों को भारी नुकसान उठाना पड़ा। सेबी ने इसे निवेशकों के हितों के खिलाफ बताया और सख्त कार्रवाई को जरूरी बताया।










