भारतीय शेयर बाजार के लिए निवेशकों के लिहाज से चिंता बढ़ाने वाली खबर सामने आई है। फंड मैनेजरों के बीच किए गए एक सर्वे में भारत को एशिया का सबसे कम पसंदीदा शेयर बाजार बताया गया है।
Indian Stock Market: भारतीय शेयर बाजार के लिए विदेशी निवेशकों के रुख से जुड़ी एक चिंताजनक खबर सामने आई है। बैंक ऑफ अमेरिका (BofA) के फंड मैनेजर सर्वे के मुताबिक भारत अब एशिया में निवेशकों का सबसे कम पसंदीदा इक्विटी मार्केट बन गया है। इससे पहले इस सूची में इंडोनेशिया सबसे नीचे था। भारतीय बाजार में इस साल कमजोर प्रदर्शन, अपेक्षाकृत महंगे वैल्यूएशन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी कंपनियों में सीमित भागीदारी को लेकर निवेशकों की चिंता बढ़ी है।
BofA के इस सर्वे में 7 से 13 अगस्त के बीच कुल 98 फंड मैनेजर्स ने हिस्सा लिया। सर्वे के आंकड़ों के अनुसार भारत का नेट ओवरवेट स्कोर -32 प्रतिशत रहा। इसका मतलब है कि बाजार में निवेश को लेकर अंडरवेट रहने वाले फंड मैनेजर्स की संख्या ओवरवेट रहने वालों की तुलना में अधिक रही।
भारत से ज्यादा पसंद किए गए ताइवान और जापान
सर्वे में एशिया के कई प्रमुख शेयर बाजारों को लेकर निवेशकों का रुख सामने आया है। ताइवान और जापान इस सूची में सबसे पसंदीदा बाजार बने हुए हैं। ताइवान का नेट ओवरवेट स्कोर +55 प्रतिशत और जापान का +50 प्रतिशत रहा। दक्षिण कोरिया भी निवेशकों की पसंद में शामिल रहा, जिसका नेट ओवरवेट स्कोर +23 प्रतिशत रहा। मलेशिया और न्यूजीलैंड का स्कोर शून्य रहा, जबकि ऑस्ट्रेलिया, सिंगापुर और थाईलैंड का स्कोर -5 प्रतिशत रहा।
दूसरी ओर चीन का स्कोर -18 प्रतिशत, फिलीपींस का -23 प्रतिशत और इंडोनेशिया का -27 प्रतिशत रहा। सबसे कमजोर स्थिति भारत की रही, जिसका स्कोर -32 प्रतिशत दर्ज किया गया।
AI में भारत की सीमित भागीदारी बड़ी चिंता
सर्वे के अनुसार भारतीय शेयरों को लेकर निवेशकों की प्रमुख चिंताओं में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इकोसिस्टम में भारत की स्पष्ट भागीदारी का अभाव शामिल है। वैश्विक स्तर पर AI से जुड़ी कंपनियों और तकनीकों में तेजी से निवेश बढ़ने के बीच फंड मैनेजर्स उन बाजारों को प्राथमिकता दे रहे हैं, जहां AI से जुड़ी कंपनियों और कारोबारों की मजबूत मौजूदगी है।
भारत के लिए कमजोर आर्थिक विकास की आशंका भी निवेशकों के सतर्क रुख की एक वजह बताई गई है। इसके अलावा सुधारों की धीमी गति और भारतीय शेयरों का अपेक्षाकृत ऊंचे वैल्यूएशन पर कारोबार करना भी चिंता का कारण है।

32% फंड मैनेजर्स भारत में कम निवेश कर रहे
सर्वे में करीब 32 प्रतिशत फंड मैनेजर्स ने कहा कि वे भारत में अपने निवेश को कम कर रहे हैं। यह आंकड़ा बताता है कि विदेशी निवेशकों के एक वर्ग में भारतीय इक्विटी को लेकर सतर्कता बढ़ी है। हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि सभी विदेशी निवेशक भारतीय बाजार से बाहर निकल रहे हैं। भारत अब भी एशिया के प्रमुख इक्विटी बाजारों में शामिल है और घरेलू अर्थव्यवस्था की दीर्घकालिक विकास क्षमता के कारण कई वैश्विक निवेशकों की नजर में महत्वपूर्ण बना हुआ है।
भारतीय शेयर बाजार में लगातार गिरावट
सर्वे का समय भारतीय बाजार में जारी कमजोरी से भी जुड़ा हुआ है। घरेलू शेयर बाजार में हाल के सत्रों में लगातार गिरावट देखने को मिली है। सेंसेक्स में लगातार चौथे कारोबारी सत्र में गिरावट दर्ज की गई, जबकि निफ्टी में लगातार सातवें सत्र कमजोरी रही। हालांकि, बाजार के कुछ बुनियादी संकेतकों में सुधार के संकेत भी मौजूद हैं।
कंपनियों की कमाई का आउटलुक बेहतर होने के बावजूद शेयरों में दबाव बना हुआ है। इससे संकेत मिलता है कि निवेशक फिलहाल केवल आय वृद्धि पर ध्यान नहीं दे रहे, बल्कि वैल्यूएशन और भविष्य की ग्रोथ को लेकर भी सावधानी बरत रहे हैं।
निफ्टी में रिकवरी के बावजूद चिंता कायम
निफ्टी 50 हालिया मार्च के निचले स्तर से करीब 8 प्रतिशत ऊपर आ चुका है। इसके बावजूद साल के प्रदर्शन के आधार पर भारतीय बाजार एशिया के प्रमुख बाजारों में कमजोर प्रदर्शन करने वालों में शामिल है। यही वजह है कि विदेशी निवेशकों का मौजूदा रुख भारतीय बाजार के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यदि वैश्विक फंड भारत की तुलना में दूसरे एशियाई बाजारों को अधिक आकर्षक मानते हैं, तो विदेशी पूंजी के प्रवाह पर दबाव पड़ सकता है।











