शिमला। हिमाचल प्रदेश में मानसून का असर लगातार बना हुआ है। राजधानी शिमला समेत कई इलाकों में तेज बारिश का दौर जारी है। भारी बारिश की आशंका को देखते हुए मौसम विभाग ने राज्य के 10 जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। लोगों को नदी-नालों और अन्य जलस्रोतों के आसपास नहीं जाने की सलाह दी गई है। पहाड़ी इलाकों में भारी बारिश के कारण भूस्खलन, अचानक बाढ़ और सड़कें बाधित होने का खतरा भी बढ़ गया है। मौसम विभाग ने लोगों और यात्रियों से मौसम की स्थिति को देखते हुए अतिरिक्त सावधानी बरतने की अपील की है। 17 और 18 अगस्त के लिए हिमाचल में भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई थी।
शिमला में बारिश के कारण मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल गया है। सुबह से ही कई इलाकों में बादल छाए रहे और रुक-रुककर बारिश होती रही। पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार पानी गिरने के कारण सड़क किनारे मिट्टी और पत्थर गिरने का खतरा बना हुआ है। ऐसे में स्थानीय प्रशासन ने संवेदनशील स्थानों पर नजर रखने के साथ लोगों को अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी है।
मौसम विभाग के अलर्ट के मुताबिक बिलासपुर, हमीरपुर, कांगड़ा, किन्नौर, कुल्लू, मंडी, शिमला, सिरमौर, सोलन और ऊना समेत 10 जिलों में भारी बारिश की संभावना को देखते हुए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। इन जिलों के कई हिस्सों में तेज बारिश के साथ अचानक जलभराव और भूस्खलन जैसी स्थिति बन सकती है। इससे सड़क यातायात प्रभावित होने की आशंका भी बनी हुई है।
हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्य में लगातार बारिश का सबसे ज्यादा असर सड़क नेटवर्क पर पड़ता है। पहाड़ों से मलबा और पत्थर सड़क पर आने के कारण कई बार यातायात कुछ समय के लिए रोकना पड़ता है। बारिश के दौरान पहाड़ी रास्तों पर सफर करने वालों के लिए खतरा और बढ़ जाता है, क्योंकि कई जगहों पर सड़क के ऊपर की पहाड़ी से अचानक पत्थर गिर सकते हैं।
प्रशासन ने लोगों को विशेष रूप से नदी, नालों और बरसाती खड्डों से दूर रहने की सलाह दी है। बारिश के दौरान इन जलस्रोतों में अचानक पानी का बहाव बढ़ सकता है। कई बार कुछ मिनटों में ही पानी का स्तर तेजी से ऊपर पहुंच जाता है। ऐसे में नदी या नाले के किनारे खड़े होकर फोटो या वीडियो बनाना भी जोखिम भरा हो सकता है।
पर्यटकों के लिए भी एडवाइजरी महत्वपूर्ण है। हिमाचल में मानसून के दौरान बड़ी संख्या में पर्यटक पहाड़ी क्षेत्रों का रुख करते हैं। बारिश के मौसम में खूबसूरत मौसम और झरनों को देखने के लिए लोग अक्सर नदी-नालों या पहाड़ी धाराओं के पास पहुंच जाते हैं, लेकिन तेज बारिश के दौरान यही जगहें खतरनाक हो सकती हैं। प्रशासन ने लोगों से सुरक्षित स्थानों पर रहने और स्थानीय निर्देशों का पालन करने को कहा है।
शिमला और आसपास के पहाड़ी इलाकों में बारिश के दौरान भूस्खलन का खतरा भी बना रहता है। लगातार पानी पड़ने से पहाड़ की मिट्टी कमजोर हो जाती है और ढलानों से मलबा सड़क पर आ सकता है। ऐसे में यात्रा के दौरान वाहन चालकों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।
राज्य में मानसून की स्थिति को लेकर मौसम विभाग लगातार अपडेट जारी कर रहा है। हालिया पूर्वानुमानों में 18 अगस्त तक राज्य के कई हिस्सों में बारिश की गतिविधि जारी रहने की बात कही गई थी। इसके बाद बारिश की तीव्रता में धीरे-धीरे कमी आने की संभावना जताई गई है।
23 अगस्त से मानसून कमजोर पड़ने की संभावना के बीच फिलहाल अगले कुछ दिन हिमाचल के लिए चुनौतीपूर्ण माने जा रहे हैं। मानसून के कमजोर पड़ने से बारिश की तीव्रता कम हो सकती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि अचानक बारिश या स्थानीय स्तर पर बादल फटने जैसी घटनाओं का खतरा पूरी तरह खत्म हो जाएगा। पहाड़ी क्षेत्रों में मौसम तेजी से बदलता है, इसलिए स्थानीय चेतावनियों को गंभीरता से लेना जरूरी है।
इस मानसून सीजन में हिमाचल को भारी नुकसान भी उठाना पड़ा है। हालिया सरकारी आंकड़ों के मुताबिक जून के अंत से अगस्त के मध्य तक राज्य में मानसून से जुड़ी घटनाओं में 183 लोगों की मौत हुई है और आर्थिक नुकसान 972 करोड़ रुपये से अधिक बताया गया है।
लगातार बारिश का असर बिजली और पेयजल व्यवस्था पर भी पड़ा है। राज्य के कई हिस्सों में बारिश और भूस्खलन के कारण बिजली के ट्रांसफॉर्मर और पानी की योजनाएं प्रभावित होने की रिपोर्ट सामने आई है। ऐसे में प्रशासन के सामने बारिश के साथ-साथ जरूरी सेवाओं को सुचारु बनाए रखने की चुनौती भी है।
शिमला में बारिश के दौरान ट्रैफिक व्यवस्था पर भी असर पड़ सकता है। सड़कों पर पानी और मलबा आने के कारण वाहनों की रफ्तार कम हो जाती है। पर्यटन सीजन में पहले से ही कई मार्गों पर वाहनों का दबाव रहता है। ऐसे में खराब मौसम के दौरान जाम की स्थिति बनने की संभावना बढ़ जाती है।
स्थानीय लोगों को सलाह दी गई है कि यदि बहुत जरूरी न हो तो भारी बारिश के दौरान यात्रा से बचें। यदि घर से निकलना जरूरी हो तो मौसम विभाग और जिला प्रशासन की ओर से जारी चेतावनियों को देखकर ही यात्रा की योजना बनाएं। पहाड़ी क्षेत्रों में किसी भी बंद या संवेदनशील सड़क पर जाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए।
बारिश के दौरान घरों के आसपास भी सावधानी बरतना जरूरी है। जिन घरों के आसपास ढलान या कमजोर मिट्टी है, वहां रहने वाले लोगों को विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए। यदि जमीन में दरार, दीवारों में असामान्य दरार या पहाड़ी से लगातार पत्थर गिरने के संकेत दिखाई दें तो तुरंत सुरक्षित स्थान पर जाना चाहिए।
किसानों के लिए भी लगातार बारिश चिंता का कारण बनी हुई है। अत्यधिक बारिश से खेतों में पानी भरने और फसलों को नुकसान होने की आशंका रहती है। पहाड़ी क्षेत्रों में खेतों की मिट्टी बहने से भी किसानों को नुकसान हो सकता है।
प्रशासन की ओर से आपदा प्रबंधन टीमों को अलर्ट रखने की जरूरत है। भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में मशीनरी उपलब्ध रखने से सड़कें बंद होने की स्थिति में उन्हें जल्द खोला जा सकता है। साथ ही नदी-नालों के जलस्तर पर लगातार निगरानी रखने से संभावित खतरे की स्थिति में लोगों को समय रहते सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा सकता है।
मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि पहाड़ी राज्यों में भारी बारिश के दौरान स्थानीय स्तर पर मौसम का व्यवहार अलग-अलग हो सकता है। एक इलाके में तेज बारिश हो सकती है, जबकि कुछ किलोमीटर दूर मौसम सामान्य रह सकता है। इसलिए केवल राज्य स्तर की चेतावनी के बजाय स्थानीय प्रशासन के अपडेट पर भी ध्यान देना जरूरी है।
शिमला समेत पर्यटन क्षेत्रों में होटल और पर्यटन कारोबार भी मौसम पर निर्भर रहता है। भारी बारिश और सड़क बाधित होने की खबरों के कारण पर्यटक अपनी यात्रा टाल सकते हैं। हालांकि, बारिश कम होने के बाद पर्यटन गतिविधियां फिर सामान्य होने की उम्मीद रहती है।
फिलहाल हिमाचल प्रदेश में अगले कुछ दिन मौसम के लिहाज से महत्वपूर्ण हैं। 10 जिलों में ऑरेंज अलर्ट के कारण प्रशासन और लोगों को विशेष सावधानी बरतनी होगी। नदी-नालों से दूरी बनाए रखना, भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में न जाना और बिना जरूरत पहाड़ी यात्रा से बचना सबसे जरूरी सावधानियां हैं।
मौसम में बदलाव के साथ यदि 23 अगस्त के आसपास मानसून कमजोर पड़ता है तो राज्य को भारी बारिश से कुछ राहत मिल सकती है। लेकिन तब तक संवेदनशील इलाकों में खतरा बना रह सकता है। इसलिए बारिश कम होने तक प्रशासन की एडवाइजरी का पालन करना जरूरी होगा।
शिमला समेत हिमाचल प्रदेश में तेज बारिश के बीच फिलहाल मौसम का खतरा टला नहीं है। 10 जिलों में ऑरेंज अलर्ट के चलते लोगों को नदी-नालों से दूर रहने और संवेदनशील पहाड़ी इलाकों में जाने से बचने की सलाह दी गई है। लगातार बारिश के कारण भूस्खलन और अचानक बाढ़ का खतरा बना हुआ है। राज्य में 23 अगस्त के आसपास मानसून कमजोर पड़ने की उम्मीद है, लेकिन तब तक स्थानीय स्तर पर मौसम संबंधी चेतावनियों और प्रशासन के निर्देशों का पालन करना बेहद जरूरी रहेगा।










