श्रीखंड: महाराष्ट्र और गुजरात की पारंपरिक मिठाई

श्रीखंड बनाएं घर पर! गाढ़े दही से तैयार केसर-इलायची फ्लेवर वाली पारंपरिक मिठाई। पूरी, पिस्ता और फ्रिज में ठंडा सर्व करें।

श्रीखंड पश्चिमी भारत (गुजरात और महाराष्ट्र) का एक पारंपरिक और लोकप्रिय मीठा व्यंजन है। यह छने हुए गाढ़े दही (जिसे 'चक्का' कहा जाता है) से तैयार किया जाता है। अपनी मखमली बनावट और केसर-इलायची की सौंधी महक के लिए प्रसिद्ध, यह व्यंजन विशेष रूप से त्योहारों जैसे गुड़ी पड़वा और शादियों में मुख्य मिठाई के रूप में परोसा जाता है।

सामग्री

  • ताज़ा दही: 1 किलो (फुल क्रीम)
  • पिसी हुई चीनी: 1.5 कप (स्वादअनुसार)
  • केसर: 10-12 धागे (1 चम्मच गर्म दूध में भीगे हुए)
  • इलायची पाउडर: 1 छोटा चम्मच
  • मेवे: बारीक कटे बादाम और पिस्ता
  • मलमल का कपड़ा: दही छानने के लिए

बनाने का तरीका 

  • चक्का तैयार करना: दही को मलमल के कपड़े में बांधें और उसे 5-6 घंटे (या रात भर) के लिए किसी ऊंचे स्थान पर लटका दें ताकि उसका सारा पानी निकल जाए। जो गाढ़ा दही बचेगा, उसे 'चक्का' कहते हैं।
  • चीनी मिलाना: इस चक्का को एक बड़े बर्तन में निकालें। इसमें पिसी हुई चीनी मिलाएं।
  • फेंटना: मिश्रण को तब तक फेंटें (whisk) जब तक कि चीनी पूरी तरह घुल न जाए और दही एकदम चिकना व चमकदार न हो जाए।
  • फ्लेवर डालना: अब इसमें केसर वाला दूध और इलायची पाउडर डालकर अच्छी तरह मिलाएं।
  • ठंडा करना: इसमें आधे मेवे मिलाएं और इसे कम से कम 2 घंटे के लिए फ्रिज में ठंडा होने दें।

परोसने के तरीके 

  • पूरी के साथ: महाराष्ट्र और गुजरात में इसे गरमा-गरम पूरी के साथ खाना सबसे ज्यादा पसंद किया जाता है।
  • शाही लुक: परोसते समय ऊपर से ढेर सारे कटे हुए पिस्ता और केसर के धागे सजाएं।
  • मठ्ठा: यदि आप इसमें थोड़ा दूध मिलाकर पतला करते हैं, तो यह 'मठ्ठा' बन जाता है।

खाने के फायदे 

श्रीखंड का मुख्य आधार दही है, इसलिए यह प्रोबायोटिक्स (Probiotics) का बेहतरीन स्रोत है जो आंतों के स्वास्थ्य और पाचन में सुधार करता है। यह शरीर को कैल्शियम और प्रोटीन प्रदान करता है, जो हड्डियों और मांसपेशियों की मजबूती के लिए आवश्यक है। इसमें मौजूद केसर और इलायची तनाव कम करने और मूड को खुशनुमा बनाने में सहायक होते हैं। यह शरीर को शीतलता और तत्काल ऊर्जा देता है। हालांकि, इसमें चीनी और कैलोरी अधिक होती है, इसलिए इसका सीमित मात्रा में सेवन ही स्वास्थ्यप्रद रहता है।

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