सीकर में सेप्टिक टैंक की खुदाई के दौरान मिट्टी ढहने से 28 वर्षीय मजदूर सिकंदर अली दब गया। पुलिस और सिविल डिफेंस समेत करीब 40 लोगों ने 12 घंटे तक रेस्क्यू किया। मजदूर का शव 22 फीट गहराई से बाहर निकाला गया।
सीकर: राजस्थान के सीकर में सेप्टिक टैंक की खुदाई के दौरान मिट्टी ढहने से एक मजदूर की मौत हो गई। हादसा उद्योग नगर थाना क्षेत्र में पिपराली रोड पर स्थित आदर्श गर्ल्स हॉस्टल के पास हुआ। करीब 22 फीट गहरी खुदाई में मजदूर के दबने के बाद पुलिस, सिविल डिफेंस और स्थानीय लोगों ने मिलकर लंबे समय तक रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया। करीब 12 घंटे की मशक्कत के बाद मजदूर का शव बाहर निकाला जा सका।
अचानक धंस गई मिट्टी, मलबे में दबा मजदूर
मृतक की पहचान सीकर के इस्लामिया चौक क्षेत्र निवासी 28 वर्षीय सिकंदर अली के रूप में हुई है। वह सेप्टिक टैंक की खुदाई के काम के लिए आदर्श गर्ल्स हॉस्टल के पास पहुंचा था। काम के दौरान अचानक आसपास की मिट्टी भरभराकर नीचे गिर गई और सिकंदर मलबे के नीचे दब गया। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और सिविल डिफेंस की टीम मौके पर पहुंची। गड्ढे की गहराई और आसपास की जमीन के लगातार धंसने की आशंका के कारण बचाव अभियान बेहद सावधानी के साथ शुरू किया गया।
22 फीट गहराई में चला रेस्क्यू ऑपरेशन
मजदूर जिस स्थान पर दबा था, वहां खुदाई करीब 22 फीट गहरी थी। इतनी गहराई में सीधे उतरना जोखिम भरा था, क्योंकि आसपास की मिट्टी के दोबारा खिसकने का खतरा बना हुआ था। इस वजह से बचाव दल ने पहले सुरक्षित तरीके से नीचे पहुंचने की व्यवस्था तैयार की। सिविल डिफेंस के जवानों को सीमेंट के गोल रिंग की मदद से गड्ढे के अंदर उतारा गया। टीम ने मलबे को धीरे-धीरे हटाते हुए दबे हुए मजदूर तक पहुंचने का प्रयास किया। रेस्क्यू के दौरान हर कदम पर मिट्टी के दोबारा धंसने की आशंका बनी रही।
करीब 40 लोगों की टीम ने संभाला मोर्चा
रेस्क्यू अभियान में पुलिस, सिविल डिफेंस के जवानों और स्थानीय लोगों समेत करीब 40 लोग शामिल रहे। टीम ने मजदूर तक पहुंचने के लिए मिट्टी के बीच से अलग रास्ता बनाने की कोशिश की, ताकि मुख्य गड्ढे की दीवारों पर अतिरिक्त दबाव न पड़े।
बचाव दल का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि खुदाई के दौरान आसपास की मिट्टी और न धंसे। इसी वजह से सामान्य मशीनों के बजाय कई हिस्सों में मैनुअल तरीके से मिट्टी हटाई गई।
आसपास के हॉस्टल कराए गए खाली
हादसे की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने घटनास्थल के आसपास मौजूद हॉस्टलों को एहतियात के तौर पर खाली करा दिया। प्रशासन को आशंका थी कि खुदाई वाले स्थान के आसपास की जमीन या संरचनाओं पर इसका असर पड़ सकता है।
हॉस्टल खाली कराने का फैसला किसी दूसरे हादसे की संभावना को कम करने के लिए लिया गया। प्रशासन और बचाव दल ने आसपास मौजूद लोगों को भी घटनास्थल से दूर रहने की सलाह दी, ताकि रेस्क्यू ऑपरेशन में किसी तरह की बाधा न आए।
आसपास की इमारतों को लेकर भी बरती गई सावधानी
घटनास्थल के आसपास कई इमारतें मौजूद हैं। ऐसे में प्रशासन के सामने केवल मजदूर को बाहर निकालने की चुनौती नहीं थी, बल्कि आसपास की संरचनाओं को सुरक्षित रखना भी जरूरी था।
स्थानीय विधायक राजेंद्र पारीक ने बताया कि आसपास की इमारतों को देखते हुए खुदाई का काम बेहद सावधानी से किया जा रहा था। सुरक्षा के लिए मौके पर मिट्टी से भरे कट्टे भी मंगवाए गए थे। इन्हें आसपास की इमारतों के सहारे लगाकर खुदाई को सुरक्षित बनाने की कोशिश की गई।
एसडीएम समेत कई अधिकारी मौके पर मौजूद
रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान उपखंड अधिकारी सुशील कुमार सैनी समेत प्रशासन के कई वरिष्ठ अधिकारी घटनास्थल पर मौजूद रहे। अधिकारियों ने बचाव अभियान की निगरानी की और टीम को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
पुलिस अधिकारियों ने भी मौके पर सुरक्षा व्यवस्था संभाली। घटनास्थल पर लोगों की भीड़ को नियंत्रित करने और बचाव दल के लिए पर्याप्त जगह उपलब्ध कराने की कोशिश की गई।
मिट्टी धंसने की वजह से बढ़ी मुश्किल
सेप्टिक टैंक और सीवरेज से जुड़े गहरे गड्ढों की खुदाई के दौरान मिट्टी का अचानक खिसकना बड़ा जोखिम माना जाता है। इस हादसे में भी मिट्टी धंसने के कारण मजदूर कुछ ही समय में मलबे के नीचे दब गया।
बचाव अभियान के दौरान सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि मजदूर को निकालने की कोशिश में ऊपर की मिट्टी फिर से न खिसक जाए। अगर ऐसा होता तो बचाव दल के सदस्यों की जान को भी खतरा हो सकता था। इसलिए टीम ने चरणबद्ध तरीके से खुदाई की।
12 घंटे बाद निकाला गया शव
लगातार कई घंटे तक चले बचाव अभियान के बाद करीब 12 घंटे में टीम मजदूर तक पहुंच सकी। हालांकि तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। शव को करीब 22 फीट गहराई से बाहर निकाला गया।
शव मिलने के बाद पुलिस ने आवश्यक कानूनी प्रक्रिया शुरू की। हादसे के कारणों और खुदाई के दौरान सुरक्षा मानकों का पालन हुआ था या नहीं, इसे लेकर भी जांच की जा सकती है।
निर्माण स्थलों पर सुरक्षा को लेकर सवाल
सीकर में हुआ यह हादसा गहरी खुदाई के दौरान सुरक्षा इंतजामों की अहमियत को सामने लाता है। सेप्टिक टैंक, सीवरेज लाइन या नींव के लिए की जाने वाली गहरी खुदाई में मिट्टी की मजबूती और आसपास की इमारतों की स्थिति का आकलन जरूरी होता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसी जगहों पर काम शुरू करने से पहले गड्ढे की दीवारों को सुरक्षित करने, मिट्टी के दबाव का आकलन करने और श्रमिकों के लिए सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराने जैसे उपाय महत्वपूर्ण होते हैं।
हादसे के बाद प्रशासन की सतर्कता बढ़ी
घटना के बाद प्रशासन ने आसपास के क्षेत्र में अतिरिक्त सावधानी बरती। हॉस्टलों को खाली कराने और सुरक्षित तरीके से रेस्क्यू अभियान चलाने का फैसला इसी सतर्कता का हिस्सा था।
यह हादसा एक बार फिर बताता है कि शहरी क्षेत्रों में गहरी खुदाई के दौरान सुरक्षा मानकों की अनदेखी कितनी गंभीर स्थिति पैदा कर सकती है। खासतौर पर उन स्थानों पर जहां आसपास आवासीय या व्यावसायिक इमारतें मौजूद हों, वहां निर्माण कार्य के दौरान अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था जरूरी हो जाती है।
सिकंदर अली की मौत के बाद अब हादसे से जुड़े सुरक्षा पहलुओं की जांच महत्वपूर्ण होगी, ताकि यह पता लगाया जा सके कि खुदाई के दौरान निर्धारित सुरक्षा उपाय अपनाए गए थे या नहीं। साथ ही, ऐसे हादसों को रोकने के लिए निर्माण और खुदाई से जुड़े कार्यों में सुरक्षा नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करना जरूरी है।












