पश्चिम बंगाल में SIR प्रक्रिया में अनियमितताओं को लेकर भारत निर्वाचन आयोग ने 7 अधिकारियों को सस्पेंड किया। आयोग ने निष्पक्ष मतदाता सूची पर जोर दिया। ममता बनर्जी के विरोध के बीच कार्रवाई से प्रशासन में हलचल बढ़ी।
West Bengal: पश्चिम बंगाल में इसी साल विधानसभा चुनाव होने हैं। चुनाव को लेकर राज्य में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया चल रही है। इस प्रक्रिया को लेकर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी लगातार विरोध कर रही हैं। इस बीच, भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने राज्य सरकार के 7 अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया है। यह कार्रवाई SIR से जुड़े गंभीर गड़बड़ियों, ड्यूटी में लापरवाही और कानूनी शक्तियों के गलत इस्तेमाल के कारण की गई है।
चुनाव आयोग ने निर्देश दिया है कि बंगाल के चीफ सेक्रेटरी इन अधिकारियों के खिलाफ डिसिप्लिनरी कार्रवाई शुरू करें। आयोग का कहना है कि SIR प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की अनियमितता सहन नहीं की जाएगी और इसे पूरी तरह से निष्पक्ष तरीके से पूरा किया जाना चाहिए।
सस्पेंड किए गए अधिकारियों के नाम
ECI ने जिन अधिकारियों को सस्पेंड किया है, उनकी लिस्ट भी सामने आ गई है। इसमें प्रमुख नाम इस प्रकार हैं:

- डॉक्टर सेफौर रहमान – AERO, एग्रीकल्चर डिपार्टमेंट के असिस्टेंट डायरेक्टर, 56-समसेरगंज असेंबली सीट, जिला मुर्शिदाबाद।
- नीतीश दास – रेवेन्यू ऑफिसर, फरक्का, 55-फरक्का असेंबली सीट के लिए AERO पद पर तैनात।
- एसके. मुर्शिद आलम – ADA, सुती ब्लॉक और AERO, 57-सुती विधानसभा क्षेत्र।
- दलिया रे चौधरी – महिला डेवलपमेंट ऑफिस, मयनागुड़ी डेवलपमेंट ब्लॉक और AERO, 16-मयनागुड़ी असेंबली सीट।
- सत्यजीत दास – संयुक्त BDO, AERO 139-कैनिंग पुरबो विधानसभा क्षेत्र।
- जॉयदीप कुंडू – FEO, AERO 139-कैनिंग पुरबो विधानसभा क्षेत्र।
- देबाशीष बिस्वास – संयुक्त BDO, AERO 229-डेबरा विधानसभा क्षेत्र।
इन अधिकारियों के सस्पेंड होने के बाद बंगाल सरकार में हड़कंप मच गया है। अधिकारियों की भूमिका SIR प्रक्रिया में बेहद अहम मानी जाती है, और उनकी गलती से मतदाता सूची के निष्पक्ष निर्माण पर असर पड़ सकता है।
SIR प्रक्रिया पर विपक्ष का विरोध
SIR या Special Intensive Revision, मतदाता सूची में गहराई से जांच और संशोधन करने की प्रक्रिया है। यह सुनिश्चित करती है कि चुनाव के समय केवल योग्य और वास्तविक मतदाता ही वोट डाल सकें।
ममता बनर्जी ने इस प्रक्रिया का विरोध करते हुए इसे राजनीतिक रूप से लक्षित और अनुचित बताया है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में याचिका भी दायर की, जिसमें SIR प्रक्रिया पर रोक लगाने या उसे प्रभावित करने की मांग की गई।
हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने साफ संदेश दिया कि SIR प्रक्रिया में किसी भी तरह की रोक या बाधा बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अदालत ने यह भी कहा कि सभी अधिकारियों को अपनी जिम्मेदारी निष्पक्ष तरीके से पूरी करनी होगी और कानून का उल्लंघन करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी।









