एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने देर रात सरकार की ओर से लिखित प्रस्ताव और आश्वासन मिलने के बाद अपना अनशन खत्म कर दिया। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह ने मेदांता अस्पताल पहुंचकर सोनम वांगचुक से मुलाकात की और उन्हें अनशन समाप्त करने के लिए मनाया।
Sonam Wangchuk Hunger Strike: सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने लंबी भूख हड़ताल के बाद अपना अनशन समाप्त कर दिया है। सरकार की ओर से लिखित आश्वासन मिलने के बाद उन्होंने केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा के हाथों जूस पीकर अनशन तोड़ा। इसके बाद वांगचुक ने एक वीडियो संदेश जारी कर सरकार के साथ हुई बातचीत और उन्हें मिले आश्वासनों के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
वांगचुक के मुताबिक, केंद्र सरकार के प्रतिनिधियों के साथ पिछले दो दिनों से उनकी बातचीत महत्वपूर्ण और गहन रही थी। उन्होंने कहा कि वह केवल मौखिक भरोसे के आधार पर अनशन समाप्त नहीं करना चाहते थे और सरकार से लिखित आश्वासन की मांग कर रहे थे। बातचीत के दौरान दोनों पक्षों के बीच कई मुद्दों पर चर्चा हुई। अंततः सरकार की ओर से लिखित प्रस्ताव मिलने के बाद उन्होंने अपना आंदोलन समाप्त करने का फैसला किया।
जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह ने की मुलाकात
अनशन समाप्त कराने के लिए केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने अस्पताल में सोनम वांगचुक से मुलाकात की। वांगचुक ने बताया कि इस दौरान लद्दाख की एपेक्स बॉडी के वरिष्ठ प्रतिनिधि भी मौजूद रहे। उन्होंने कहा कि इससे पहले विभिन्न राजनीतिक दलों के करीब 65 सांसदों ने भी उनसे मुलाकात की थी। इन सांसदों ने उनसे अनशन समाप्त करने का आग्रह किया और भरोसा दिलाया कि परीक्षा व्यवस्था और कथित NEET पेपर लीक सहित संबंधित मुद्दों को संसद में उठाया जाएगा।
वांगचुक के अनुसार, सरकार की ओर से बातचीत के लिए आए मंत्रियों ने भी उनकी मांगों पर सकारात्मक रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि दो दिनों तक चली बातचीत के बाद आखिरकार सरकार की ओर से उन्हें लिखित आश्वासन मिला, जिसके बाद उन्होंने अनशन समाप्त करने का निर्णय लिया।
सरकार से मिले आश्वासन में क्या शामिल है?
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सोनम वांगचुक ने अपने बयान में सरकार की ओर से दिए गए लिखित आश्वासन के तीन प्रमुख बिंदुओं का उल्लेख किया। पहला, वांगचुक के मुताबिक, जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों और युवाओं के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई या FIR दर्ज नहीं की जाएगी। उन्होंने यह भी दावा किया कि 20 जुलाई को प्रस्तावित 'संसद चलो' मार्च में शामिल होने वाले लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई नहीं की जाएगी।
दूसरा, वांगचुक ने कहा कि पेपर लीक विवाद से जुड़े घटनाक्रम में जान गंवाने वाले 20 से अधिक छात्रों के परिवारों को उचित मुआवजा देने का आश्वासन दिया गया है। उनके अनुसार, प्रभावित परिवारों को सरकार की ओर से आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। तीसरा, उन्होंने बताया कि परीक्षा व्यवस्था और शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर संसद में विस्तृत चर्चा और बहस होगी। इस चर्चा में सरकार की जवाबदेही पर भी विचार किया जाएगा। वांगचुक ने कहा कि इसका उद्देश्य भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकना और मौजूदा विवाद से जुड़े मामलों में जिम्मेदारी तय करना है।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर नहीं मिला स्पष्ट आश्वासन
सोनम वांगचुक ने यह भी स्पष्ट किया कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर उन्हें सरकार की ओर से कोई निश्चित आश्वासन नहीं मिला है। उनके मुताबिक, बातचीत के दौरान यह स्पष्ट नहीं किया गया कि इस्तीफा होगा या नहीं और यदि होगा तो कब। हालांकि, वांगचुक ने कहा कि उनके लिए शिक्षा मंत्री का इस्तीफा सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा नहीं था।
उन्होंने कहा कि उनका मुख्य उद्देश्य छात्रों के भविष्य की रक्षा करना और यह सुनिश्चित करना था कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले युवाओं को ऐसी कानूनी कार्रवाई का सामना न करना पड़े, जिसका उनके करियर पर लंबे समय तक असर हो। उन्होंने यह भी कहा कि यदि शिक्षा मंत्री इस्तीफा नहीं देते हैं, तो इसका सीधा नुकसान छात्रों या आंदोलनकारियों को नहीं होगा। उनके अनुसार, इससे सरकार की जवाबदेही और राजनीतिक नुकसान का सवाल अधिक महत्वपूर्ण हो सकता है।
आंदोलन समाप्त, लेकिन जवाबदेही की मांग जारी
वांगचुक ने कहा कि उनके सामने अनशन जारी रखने या सरकार के लिखित आश्वासन के बाद आंदोलन को समाप्त करने का विकल्प था। उन्होंने बताया कि कई समर्थक उनसे अपनी सेहत का ध्यान रखने और आगे के संघर्ष के लिए जीवित रहने की अपील कर रहे थे। उन्होंने कहा कि उनके लिए सबसे महत्वपूर्ण यह था कि छात्रों का भविष्य प्रभावित न हो और शांतिपूर्ण विरोध करने वाले युवाओं के खिलाफ कठोर कार्रवाई न हो। साथ ही, उन्होंने उम्मीद जताई कि संसद में होने वाली चर्चा से शिक्षा और परीक्षा प्रणाली में जवाबदेही तथा सुधार को लेकर ठोस कदम सामने आएंगे।









