सपा सांसदों की जुबानी जंग बनी मुसीबत, अखिलेश यादव ने दिया कड़ा संदेश

सपा सांसदों की जुबानी जंग बनी मुसीबत, अखिलेश यादव ने दिया कड़ा संदेश

मुरादाबाद में सपा के मौजूदा और पूर्व सांसद के बीच वाक युद्ध से पार्टी में हलचल बढ़ गई है। लगातार बयानबाजी के बाद मामला हाईकमान तक पहुंचा, जहां अखिलेश यादव ने इसे अनुशासनहीनता मानते हुए सख्त चेतावनी दी।

UP Politics: उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर समाजवादी पार्टी के भीतर चल रहा आंतरिक विवाद सुर्खियों में है। मुरादाबाद से मौजूदा सपा सांसद और पूर्व सपा सांसद के बीच लंबे समय से चल रहा वाक युद्ध अब पार्टी हाईकमान तक पहुंच गया है। लगातार हो रही बयानबाजी को पार्टी नेतृत्व ने गंभीरता से लिया है और इसे अनुशासनहीनता की श्रेणी में रखा है। पार्टी मुखिया अखिलेश यादव ने साफ संदेश दिया है कि आपसी मतभेदों को मीडिया और सोशल मीडिया के जरिए सार्वजनिक करना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

यह मामला केवल दो नेताओं के बीच टकराव तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इससे पार्टी की छवि और आगामी चुनावी रणनीति पर भी असर पड़ने लगा है। इसी वजह से सपा नेतृत्व ने कड़ा रुख अपनाते हुए संगठन को एकजुट रहने की हिदायत दी है।

टिकट कटने के बाद शुरू हुआ विवाद

इस पूरे विवाद की जड़ बीते लोकसभा चुनाव से जुड़ी है। मुरादाबाद से लंबे समय तक सपा सांसद रहे एसटी हसन का टिकट आखिरी समय पर काट दिया गया था। पार्टी ने उनकी जगह बिजनौर की रुचि वीरा को मुरादाबाद सीट से चुनाव मैदान में उतारा। इसके बाद से ही दोनों नेताओं के बीच मनमुटाव शुरू हो गया।

चुनाव खत्म होने के बाद भी यह विवाद थमा नहीं। कभी एसटी हसन तो कभी सांसद रुचि वीरा एक-दूसरे पर मीडिया और सोशल मीडिया के जरिए आरोप लगाते रहे। बयानबाजी का यह सिलसिला धीरे-धीरे पार्टी के लिए असहज स्थिति बनता चला गया।

निजी घटनाएं भी बनीं विवाद की वजह

हाल ही में यह टकराव और गहरा हो गया जब पूर्व सांसद एसटी हसन की बेटी की शादी को लेकर विवाद सामने आया। सांसद रुचि वीरा ने शादी का निमंत्रण न मिलने और शादी में आए कुछ खास मेहमानों को लेकर मीडिया में बयान दिया। इस बयान में कुंदरकी से भाजपा विधायक रामवीर सिंह का जिक्र भी किया गया।

इस पूरे घटनाक्रम ने पार्टी के भीतर असंतोष को और उजागर कर दिया। मामला जब अखिलेश यादव तक पहुंचा तो उन्होंने इस पर नाराजगी जताई और इसे पार्टी गाइडलाइन का खुला उल्लंघन बताया।

अखिलेश यादव ने जताई सख्त नाराजगी

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस पूरे प्रकरण पर स्पष्ट रुख अपनाया है। उन्होंने कहा कि पार्टी के भीतर किसी भी तरह का मनमुटाव हो तो उसे संगठनात्मक स्तर पर सुलझाया जाना चाहिए। मीडिया और सोशल मीडिया के जरिए एक-दूसरे पर आरोप लगाना पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचाता है।

अखिलेश यादव ने सभी नेताओं और कार्यकर्ताओं को निर्देश दिया है कि वे आपसी विवाद छोड़कर आगामी चुनावी तैयारियों और SIR से जुड़े कार्यों पर ध्यान दें। उन्होंने साफ कहा कि अनुशासनहीनता किसी भी हाल में स्वीकार नहीं की जाएगी।

संगठन को एकजुट रखने की अपील

पार्टी नेतृत्व की नाराजगी के बाद मुरादाबाद जिले में भी संगठन स्तर पर सख्ती देखने को मिल रही है। जिला अध्यक्ष जयवीर यादव ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पार्टी की यह गाइडलाइन कोई नई नहीं है, बल्कि पहले से लागू है।

उन्होंने कहा कि अगर पार्टी के अंदर किसी को किसी से शिकायत है या कोई मनमुटाव है, तो उसका समाधान संगठन के भीतर ही किया जाना चाहिए। इसके लिए जिला अध्यक्ष, प्रदेश अध्यक्ष या सीधे राष्ट्रीय अध्यक्ष से संपर्क किया जा सकता है। लेकिन मीडिया या सोशल मीडिया का सहारा लेना पार्टी की बदनामी और अनुशासनहीनता माना जाएगा।

बयानबाजी पर रोक नहीं तो होगी कार्रवाई

जिला अध्यक्ष जयवीर यादव ने यह भी चेतावनी दी कि अगर इसके बावजूद बयानबाजी जारी रही तो संबंधित नेताओं और कार्यकर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि पार्टी हित सर्वोपरि है और व्यक्तिगत मतभेदों के कारण संगठन को कमजोर नहीं होने दिया जाएगा।

उन्होंने साफ किया कि चाहे वह कार्यकर्ता हो, पदाधिकारी हो या जनप्रतिनिधि, सभी को पार्टी की मर्यादा में रहकर काम करना होगा। संगठनात्मक अनुशासन तोड़ने वालों के लिए पार्टी में कोई जगह नहीं है।

प्रचार सामग्री को लेकर भी जारी हुई गाइडलाइन

इस विवाद के बीच पार्टी ने प्रचार और प्रसार को लेकर भी सख्त निर्देश जारी किए हैं। जिला अध्यक्ष ने बताया कि जिले में लगाए जाने वाले सभी बैनर, पोस्टर, पैंफलेट, फ्लैक्सी, होर्डिंग्स और स्टिकर पर क्षेत्रीय सांसद और विधायक का फोटो और नाम अनिवार्य रूप से होना चाहिए।

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