भारतीय शेयर बाजार ने तीन दिनों की लगातार बढ़त के बाद गिरावट के साथ कारोबार खत्म किया। प्रमुख सूचकांक BSE Sensex 756.84 अंक टूटकर 78,516.49 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं Nifty 50 भी 24,400 के स्तर से नीचे फिसल गया और 198.50 अंक की गिरावट के साथ 24,378.10 पर बंद हुआ।
बिजनेस न्यूज़: भारतीय शेयर बाजार में लगातार तीन दिनों की तेजी के बाद बुधवार, 22 अप्रैल को गिरावट का दौर देखने को मिला। BSE Sensex 756.84 अंक टूटकर 78,516.49 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं NSE Nifty 50 भी 198.50 अंक की गिरावट के साथ 24,378.10 पर आ गया, जो 24,400 के महत्वपूर्ण स्तर से नीचे है। यह गिरावट मुख्य रूप से आईटी सेक्टर में भारी बिकवाली के कारण देखने को मिली, जिसने पूरे बाजार की धारणा को कमजोर कर दिया।
आईटी स्टॉक्स में भारी बिकवाली
बाजार में सबसे ज्यादा दबाव आईटी सेक्टर पर रहा। ट्रेडिंग के दौरान आईटी इंडेक्स में करीब 4.5% की बड़ी गिरावट दर्ज की गई। HCL Technologies, Infosys, Tata Consultancy Services और Tech Mahindra जैसे दिग्गज शेयरों में तेज गिरावट देखी गई। आईटी कंपनियों के तिमाही नतीजों से निवेशकों को निराशा हुई, जिसके चलते इन शेयरों में भारी बिकवाली हुई और बाजार पर इसका सीधा असर पड़ा।
टॉप लूजर शेयरों की सूची
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एनएसई पर दिन के सबसे बड़े नुकसान वाले शेयरों में आईटी कंपनियां प्रमुख रहीं।
- HCL Tech में करीब 10% से ज्यादा की गिरावट
- Infosys में 3% से अधिक की कमजोरी
- TCS और Tech Mahindra भी 2-3% तक फिसले
- Mahindra & Mahindra में भी गिरावट दर्ज की गई
इन शेयरों में आई कमजोरी ने इंडेक्स को नीचे खींचने में अहम भूमिका निभाई।
अन्य सेक्टर्स का मिला-जुला प्रदर्शन
जहां एक ओर आईटी और प्राइवेट बैंकिंग शेयरों में दबाव रहा, वहीं कुछ सेक्टर्स ने बाजार को सहारा देने की कोशिश की। एफएमसीजी, मेटल, मीडिया और रियल्टी सेक्टर में 0.4% से 1% तक की बढ़त दर्ज की गई। इसके अलावा मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी हल्की मजबूती देखने को मिली। मिडकैप इंडेक्स में 0.2% और स्मॉलकैप इंडेक्स में 1% से अधिक की तेजी रही, जो बाजार में चुनिंदा खरीदारी का संकेत देती है।
भारतीय मुद्रा भी दबाव में रही। रुपया लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में कमजोर हुआ और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 39 पैसे गिरकर 93.83 पर बंद हुआ।इंटरबैंक फॉरेक्स मार्केट में रुपया 93.69 पर खुला और दिन के दौरान 93.87 के निचले स्तर तक पहुंच गया। यह गिरावट वैश्विक और घरेलू दोनों कारणों से आई।
बाजार और रुपये पर दबाव का एक बड़ा कारण वैश्विक अनिश्चितता रही। अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव ने कच्चे तेल की कीमतों को बढ़ाया, जिससे आयात पर निर्भर देशों जैसे भारत पर दबाव बढ़ा।









