जर्मनी की बड़ी कंपनियां भारत में अपना कारोबार बढ़ाने की संभावनाएं देख रही हैं। वे यहां सामान बनाने के साथ नई तकनीक पर भी काम करना चाहती हैं। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने बताया कि करीब 2,000 जर्मन कंपनियां पहले से भारत में काम कर रही हैं। आने वाले समय में निवेश और रोजगार के नए मौके बन सकते हैं।
बिजनेस डेस्क: जर्मनी की कंपनियां अब भारत में सिर्फ अपना सामान बेचना नहीं चाहतीं। वे यहां फैक्ट्रियां लगाने, नए प्रोडक्ट तैयार करने और रिसर्च सेंटर बढ़ाने में भी दिलचस्पी ले रही हैं। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने 24 अक्टूबर को इसकी जानकारी दी। जर्मनी के बर्लिन में दो दिन की यात्रा के दौरान उन्होंने कई बड़ी कंपनियों के अधिकारियों से मुलाकात की। इनमें फॉक्सवैगन, स्कोडा, सीमेंस हेल्थकेयर और बर्टेल्समैन जैसी कंपनियां शामिल हैं।
भारत में कारोबार क्यों बढ़ाना चाहती हैं जर्मन कंपनियां?
पीयूष गोयल ने बताया कि जर्मन कंपनियों के लिए भारत अब एक बड़ा बाजार होने के साथ सामान बनाने की भी अच्छी जगह बन रहा है। जर्मनी की कंपनियों के पास अच्छी मशीनें और नई तकनीक है। दूसरी तरफ भारत में बड़ी संख्या में प्रशिक्षित कर्मचारी हैं। यहां सामान बनाने का खर्च भी कई मामलों में कम पड़ सकता है।
इसी वजह से जर्मन कंपनियां भारत में अपने कारखाने और रिसर्च से जुड़े काम बढ़ाने की संभावनाएं देख रही हैं। गोयल के मुताबिक, इस समय करीब 2,000 जर्मन कंपनियां भारत में काम कर रही हैं। इनमें गाड़ियां, मशीनें, दवाइयां और तकनीक से जुड़ी कंपनियां भी हैं।
फॉक्सवैगन और सीमेंस के अधिकारियों से हुई बातचीत
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बर्लिन दौरे पर पीयूष गोयल ने कई बड़ी कंपनियों के अधिकारियों से अलग-अलग मुलाकात की। उन्होंने सीमेंस हेल्थिनियर्स के सीईओ बर्न्ड मोंटाग और बर्टेल्समैन इन्वेस्टमेंट्स के सीईओ कार्स्टन कोएसफेल्ड से बातचीत की। इसके अलावा फॉक्सवैगन और स्कोडा से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी होल्गर पीटर्स के साथ भी बैठक हुई।
इन मुलाकातों में भारत में कारोबार बढ़ाने, नई तकनीक पर मिलकर काम करने और निवेश की संभावनाओं पर चर्चा की गई। हालांकि, अभी किसी नई फैक्ट्री को लगाने या कितने रुपये का निवेश होगा, इसकी पक्की घोषणा नहीं हुई है।
नई तकनीक पर भी मिलकर काम करेंगे दोनों देश
पीयूष गोयल ने जर्मनी के कई रिसर्च संस्थानों के अधिकारियों से भी मुलाकात की। इस दौरान छोटी इलेक्ट्रॉनिक चिप, बैटरी, आधुनिक मशीनों और सामान की ढुलाई से जुड़ी नई तकनीक पर बात हुई। जर्मनी के फ्राउनहोफर रिसर्च संस्थानों के प्रतिनिधियों के साथ भी बैठक हुई। इसमें चर्चा की गई कि भारत और जर्मनी के वैज्ञानिक, इंजीनियर और कंपनियां मिलकर नए प्रोडक्ट कैसे तैयार कर सकते हैं। गोयल का कहना है कि जर्मनी की तकनीक और भारत के हुनरमंद युवाओं को साथ लाने से दोनों देशों को फायदा हो सकता है।
भारतीय युवाओं को नौकरी के नए मौके मिल सकते हैं
भारत में कई विदेशी कंपनियों ने अपने ऑफिस और रिसर्च सेंटर खोल रखे हैं। इन जगहों पर सॉफ्टवेयर, इंजीनियरिंग, डिजाइन और नई तकनीक से जुड़े काम होते हैं। ऐसे केंद्रों को ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) कहा जाता है। पीयूष गोयल के मुताबिक, भारत में इस तरह के 2,100 से ज्यादा सेंटर हैं। इनमें लाखों लोग काम कर रहे हैं।
जर्मनी की भी कई कंपनियों के सेंटर भारत में पहले से मौजूद हैं। गोयल ने बताया कि कुछ कंपनियां अगले दो से पांच साल में यहां अपना काम दोगुना या तीन गुना करने की योजना बना रही हैं। अगर कंपनियां अपनी ये योजनाएं आगे बढ़ाती हैं, तो इंजीनियरिंग, आईटी और रिसर्च से जुड़े युवाओं के लिए नौकरी के नए मौके खुल सकते हैं।










