गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार में जोरदार बिकवाली देखने को मिली। कारोबार की शुरुआत से ही दबाव में रहे घरेलू बाजार में दिन बढ़ने के साथ गिरावट और गहरी होती चली गई।
बिजनेस न्यूज़: भारतीय शेयर बाजार में 24 सितंबर 2026 को जोरदार बिकवाली देखने को मिली। कारोबारी सत्र की शुरुआत से दबाव में रहे घरेलू बाजार में दिन बढ़ने के साथ गिरावट और गहरी होती गई। कारोबार समाप्त होने तक Sensex 1,247.71 अंक यानी 1.67 फीसदी गिरकर 73,580.54 पर बंद हुआ। वहीं Nifty 383.70 अंक यानी 1.64 फीसदी की गिरावट के साथ 23,063.10 पर पहुंच गया।
बाजार में गिरावट का असर व्यापक रहा। करीब 2,772 शेयर गिरावट के साथ बंद हुए, जबकि लगभग 1,400 शेयरों में तेजी रही। यानी बिकवाली केवल चुनिंदा बड़े शेयरों तक सीमित नहीं रही, बल्कि व्यापक बाजार पर इसका असर दिखाई दिया।
लगभग सभी प्रमुख सेक्टर में बिकवाली
गुरुवार के कारोबार में निवेशकों ने बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं, मेटल, ऑटो, इंफ्रास्ट्रक्चर और ऑयल एंड गैस समेत कई प्रमुख सेक्टर में बिकवाली की। निफ्टी प्राइवेट बैंक इंडेक्स करीब 2.2 फीसदी और मेटल इंडेक्स लगभग 1.9 फीसदी नीचे रहा। बैंकिंग इंडेक्स में भी करीब 1.7 फीसदी की कमजोरी दर्ज हुई। ब्रॉडर मार्केट में भी दबाव रहा। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में गिरावट ने संकेत दिया कि बाजार में जोखिम से बचने की प्रवृत्ति केवल बड़े शेयरों तक सीमित नहीं थी।
बड़े शेयरों में बजाज फाइनेंस, एचडीएफसी लाइफ, बजाज फिनसर्व, एक्सिस बैंक और इंटरग्लोब एविएशन प्रमुख गिरने वाले शेयरों में शामिल रहे। दूसरी ओर सिप्ला और एनटीपीसी ने बाजार की कमजोरी के बीच बढ़त दर्ज की।
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में उछाल से बढ़ी चिंता
भारतीय बाजार की गिरावट के पीछे सबसे प्रमुख वैश्विक कारणों में अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में तेज बढ़ोतरी रही। अमेरिका की 10 साल की ट्रेजरी यील्ड 2007 के बाद के ऊंचे स्तरों तक पहुंच गई, जबकि 2 साल की यील्ड भी 4.9 फीसदी के करीब पहुंची। मजबूत अमेरिकी आर्थिक गतिविधियों के आंकड़ों के बाद निवेशकों के बीच ब्याज दरों को लेकर चिंता बढ़ी।
जब अमेरिकी बॉन्ड यील्ड बढ़ती है, तो निवेशकों के लिए अपेक्षाकृत सुरक्षित डेट इंस्ट्रूमेंट आकर्षक हो सकते हैं। इससे इक्विटी जैसे जोखिम वाले एसेट में निवेश पर दबाव बढ़ सकता है। ऊंची यील्ड का असर कंपनियों की वैल्यूएशन पर भी पड़ता है, खासकर उन कंपनियों पर जिनकी भविष्य की कमाई को ज्यादा महत्व दिया जाता है।
फेड की ब्याज दर नीति पर नजर
अमेरिका में मजबूत आर्थिक गतिविधियों के संकेतों ने यह चिंता बढ़ाई कि फेडरल रिजर्व महंगाई को नियंत्रित करने के लिए ब्याज दरों पर अपेक्षाकृत सख्त रुख बनाए रख सकता है। बाजार में अक्टूबर की बैठक में संभावित दर बढ़ोतरी को लेकर उम्मीदें भी बढ़ी हैं। इससे वैश्विक इक्विटी बाजारों में जोखिम लेने की क्षमता प्रभावित हुई।
अमेरिकी बाजारों में भी इससे पहले दबाव देखने को मिला था। ऊंची बॉन्ड यील्ड और महंगे तेल ने वैश्विक निवेशकों के लिए मुद्रास्फीति और ब्याज दरों से जुड़े जोखिम बढ़ा दिए हैं।











