सुल्तानपुर में 8 अक्टूबर से काम बंद करने का ऐलान, नियमितीकरण समेत कई मांगें

NHM संविदा कर्मचारियों ने नियमितीकरण, समान वेतन और चिकित्सा सुविधा समेत मांगों को लेकर डीएम-सीएमओ को ज्ञापन दिया। 8 अक्टूबर से कार्य बहिष्कार की चेतावनी दी
सुल्तानपुर में 8 अक्टूबर से काम बंद करने का ऐलान, नियमितीकरण समेत कई मांगें
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सुल्तानपुर में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के तहत कार्यरत संविदा कर्मचारियों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलन का ऐलान किया है। कर्मचारियों ने जिलाधिकारी और मुख्य चिकित्सा अधिकारी को ज्ञापन सौंपकर लंबे समय से चली आ रही समस्याओं के समाधान की मांग की। कर्मचारियों का कहना है कि यदि शासन स्तर से उनकी मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई तो अक्टूबर में चरणबद्ध तरीके से विरोध किया जाएगा। इसके तहत 8, 9 और 10 अक्टूबर को जिला मुख्यालय पर कार्य बहिष्कार करने की चेतावनी दी गई है। इसके बाद 12 अक्टूबर को प्रदेश मुख्यालय पर धरना-प्रदर्शन की भी घोषणा की गई है।

एनएचएम संविदा कर्मचारी संघ के पदाधिकारियों ने जिलाध्यक्ष डॉ. आकर्ष शुक्ला के नेतृत्व में डीएम और सीएमओ को ज्ञापन सौंपा। कर्मचारियों ने कहा कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत बड़ी संख्या में कर्मचारी लंबे समय से स्वास्थ्य विभाग की विभिन्न योजनाओं और सेवाओं में अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं। इसके बावजूद उनकी सेवा शर्तों, वेतन, सामाजिक सुरक्षा और भविष्य को लेकर कई समस्याएं बनी हुई हैं। कर्मचारियों ने इन मुद्दों पर शासन से स्पष्ट नीति बनाने और उनकी मांगों पर कार्रवाई करने की मांग की है।

संघ की प्रमुख मांगों में लंबे समय से सेवा दे रहे एनएचएम संविदा कर्मचारियों का नियमितीकरण शामिल है। कर्मचारियों का कहना है कि कई कर्मी वर्षों से संविदा व्यवस्था के तहत स्वास्थ्य विभाग में काम कर रहे हैं। संगठन ने नियमितीकरण की प्रक्रिया पूरी होने तक समान कार्य के लिए समान वेतन देने की मांग भी रखी है। कर्मचारियों के अनुसार, एक ही विभाग में समान प्रकृति का काम करने वाले कर्मचारियों के बीच सेवा शर्तों और पारिश्रमिक में अंतर को दूर किया जाना चाहिए।

कर्मचारियों ने यह भी मांग रखी कि उन्हें महंगाई भत्ता, ईपीएफ, एचआरए और ग्रेच्युटी जैसी सुविधाओं का लाभ दिया जाए। संगठन के मुताबिक, लंबे समय से सेवा दे रहे संविदा कर्मचारियों के लिए सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी सुविधाएं महत्वपूर्ण हैं। इसके अलावा कर्मचारियों और उनके आश्रित परिवारों के लिए कम से कम 10 लाख रुपये की कैशलेस चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की मांग भी ज्ञापन में शामिल की गई है।

एनएचएम कर्मचारियों ने गैर जनपद स्थानांतरण की सुविधा उपलब्ध कराने की मांग भी उठाई है। उनका कहना है कि नौकरी के दौरान व्यक्तिगत और पारिवारिक परिस्थितियों के कारण कई कर्मचारियों को स्थानांतरण की आवश्यकता होती है। संगठन ने रिक्त पदों के आधार पर गैर जनपद स्थानांतरण की व्यवस्था लागू करने की मांग की है। इसके साथ ही सेवाकाल के दौरान किसी कर्मचारी की मृत्यु होने की स्थिति में पात्र आश्रित को अनुकंपा नियुक्ति देने की मांग भी की गई है।

ज्ञापन में एनएचएम के तहत काम कर रहे आउटसोर्स कर्मचारियों के समायोजन का मुद्दा भी उठाया गया है। कर्मचारियों ने मांग की है कि ऐसे कर्मियों के अनुभव और लंबे समय से स्वास्थ्य सेवाओं में योगदान को ध्यान में रखते हुए उन्हें जिला स्वास्थ्य समिति के तहत समायोजित करने की दिशा में कदम उठाए जाएं। संगठन ने स्वास्थ्य विभाग की नियमित भर्तियों में एनएचएम संविदा कर्मचारियों के लिए 25 प्रतिशत कोटा निर्धारित करने की मांग भी रखी है।

कर्मचारी संगठन ने आंदोलन को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने की बात कही है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार 21 से 23 सितंबर के बीच प्रदेश के अलग-अलग जिलों में डीएम, सीएमओ और संबंधित जनप्रतिनिधियों को ज्ञापन सौंपने का कार्यक्रम रखा गया है। इसके बाद शासन को मांगों पर कार्रवाई के लिए समय दिया जाएगा। यदि इस अवधि में सकारात्मक पहल नहीं होती है तो 5, 6 और 7 अक्टूबर को कर्मचारी काली पट्टी बांधकर काम करते हुए विरोध दर्ज कराएंगे।

इसके बाद 8, 9 और 10 अक्टूबर को जिला मुख्यालयों पर कार्य बहिष्कार का कार्यक्रम प्रस्तावित है। सुल्तानपुर में भी कर्मचारियों ने इसी चरण के तहत काम बंद करने की चेतावनी दी है। यानी अगर बातचीत या मांगों के समाधान की दिशा में कोई पहल नहीं होती है तो अक्टूबर के दूसरे सप्ताह से पहले ही स्वास्थ्य विभाग की विभिन्न सेवाओं से जुड़े संविदा कर्मचारियों का विरोध ज्यादा व्यापक हो सकता है।

कर्मचारी संगठन ने यह भी कहा है कि यदि जिला स्तर और शासन स्तर पर उनकी मांगों का समाधान नहीं हुआ तो 12 अक्टूबर को प्रदेश मुख्यालय पर धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। अन्य जिलों से सामने आई आंदोलन की रूपरेखा में 12 अक्टूबर से लखनऊ में अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी भी दी गई है। हालांकि सुल्तानपुर के स्थानीय कार्यक्रम में फिलहाल 8 से 10 अक्टूबर के कार्य बहिष्कार और उसके बाद प्रदेश मुख्यालय पर आंदोलन की चेतावनी प्रमुख रूप से सामने आई है।

एनएचएम संविदा कर्मचारियों का कहना है कि वे स्वास्थ्य सेवाओं में लंबे समय से काम कर रहे हैं और ग्रामीण क्षेत्रों तक सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं को पहुंचाने में उनकी भूमिका रहती है। संगठन ने इसी आधार पर सेवा सुरक्षा, वेतन और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर सरकार से निर्णय लेने की मांग की है। अन्य जिलों में भी इसी तरह के ज्ञापन और चरणबद्ध आंदोलन की घोषणा सामने आई है, जिससे स्पष्ट है कि ये मांगें केवल सुल्तानपुर तक सीमित नहीं हैं।

सुल्तानपुर में ज्ञापन सौंपने के दौरान संतोष यादव, शुभम शर्मा, नितिन भारद्वाज, अमित सिंह समेत बड़ी संख्या में एनएचएम कर्मचारी मौजूद रहे। कर्मचारियों ने प्रशासन के सामने अपनी मांगें रखीं और कहा कि वे चाहते हैं कि आंदोलन की स्थिति आने से पहले शासन स्तर पर बातचीत के जरिए समाधान निकाला जाए।

फिलहाल सुल्तानपुर में 8 अक्टूबर से प्रस्तावित कार्य बहिष्कार को लेकर कर्मचारियों ने अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। अब देखना होगा कि शासन और स्वास्थ्य विभाग की ओर से इन मांगों पर क्या कदम उठाया जाता है। यदि निर्धारित समय तक कोई समाधान नहीं निकलता है तो अक्टूबर के पहले सप्ताह से विरोध के अलग-अलग चरण शुरू होंगे और 8 से 10 अक्टूबर के बीच जिला मुख्यालय पर कार्य बहिष्कार का असर स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ सकता है। हालांकि कार्य बहिष्कार की वास्तविक स्थिति और स्वास्थ्य सेवाओं पर उसका प्रभाव उस समय कर्मचारियों की भागीदारी तथा प्रशासन की ओर से किए जाने वाले इंतजामों पर निर्भर करेगा।

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