25 सितंबर थी अंतिम तारीख, सुप्रीम कोर्ट ने जल्द रिपोर्ट देने के निर्देश दिए थे

अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में SIT ने सभी 8 आरोपियों के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की। 25 सितंबर से पहले कार्रवाई, CCTV में 105 घटनाएं मिलीं।
25 सितंबर थी अंतिम तारीख, सुप्रीम कोर्ट ने जल्द रिपोर्ट देने के निर्देश दिए थे
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अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे से जुड़ी कथित चोरी और गबन के मामले में जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) ने बुधवार को अदालत में चार्जशीट दाखिल कर दी। पुलिस ने मामले में जेल में बंद सभी आठ आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र अदालत के समक्ष पेश किया है। चार्जशीट दाखिल होने की जानकारी सामने आते ही अदालत परिसर में हलचल बढ़ गई। अधिवक्ताओं ने इस मामले में कार्य बहिष्कार भी किया।

यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब सुप्रीम कोर्ट ने जांच की प्रगति पर लगातार नजर रखी थी। 21 सितंबर को हुई सुनवाई में उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट को बताया गया था कि SIT 25 सितंबर या उससे पहले आरोपपत्र दाखिल कर देगी। इसकी वजह पहली गिरफ्तारी के बाद 90 दिन की वैधानिक समय-सीमा पूरी होना बताया गया था। अदालत को यह भी बताया गया था कि अगर तय अवधि में आरोपपत्र दाखिल नहीं होता तो आरोपियों के लिए डिफॉल्ट जमानत का कानूनी आधार बन सकता था।

सुप्रीम कोर्ट के समक्ष पेश की गई SIT की स्टेटस रिपोर्ट में जांच के दौरान सीसीटीवी फुटेज और अन्य इलेक्ट्रॉनिक व दस्तावेजी साक्ष्यों के विश्लेषण की जानकारी दी गई थी। रिपोर्ट के अनुसार मंदिर में चढ़ावे से जुड़ी कथित चोरी की 105 घटनाओं की पहचान सीसीटीवी फुटेज के विश्लेषण के दौरान की गई। जांच टीम ने आरोपियों की पहचान और उनकी कथित भूमिका तय करने के लिए सीसीटीवी के साथ-साथ अन्य उपलब्ध साक्ष्यों का भी परीक्षण किया।

सुप्रीम कोर्ट के 21 सितंबर के आदेश में दर्ज जानकारी के अनुसार, मामले की जांच में सीसीटीवी फुटेज, गवाहों के बयान, तलाशी और बरामदगी, बैंक एवं वित्तीय रिकॉर्ड, संपत्ति से जुड़े दस्तावेज, मोबाइल डेटा, कॉल डिटेल रिकॉर्ड, फोरेंसिक जांच और अन्य दस्तावेजी तथा इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को शामिल किया गया। अदालत के रिकॉर्ड के मुताबिक मामला 25 जून 2026 को अयोध्या के राम जन्मभूमि थाने में आठ आरोपियों के खिलाफ दर्ज किया गया था।

SIT की जांच को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही तेजी से कार्रवाई करने और जांच को तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाने को कहा था। अदालत ने उत्तर प्रदेश सरकार से जांच में फोरेंसिक ऑडिटर को शामिल करने के संबंध में भी निर्देश दिए थे। इसके बाद SIT ने अपनी प्रगति रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में अदालत के समक्ष रखी। 21 सितंबर की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने उस रिपोर्ट को रिकॉर्ड पर लिया और चार्जशीट दाखिल किए जाने की समय-सीमा को भी नोट किया।

मामले में पहली गिरफ्तारी के 90 दिन 25 सितंबर को पूरे होने थे। इसी वजह से चार्जशीट दाखिल करने की तारीख कानूनी तौर पर महत्वपूर्ण हो गई थी। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि जांच लगभग पूरी हो चुकी है और 25 सितंबर तक आरोपपत्र दाखिल कर दिया जाएगा। अदालत ने भी इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की अनुमति दी थी और कहा था कि फिलहाल वह मामले को सत्र अदालत से अपने हाथ में नहीं लेना चाहती।

अब चार्जशीट दाखिल होने के बाद मामले की आगे की कानूनी प्रक्रिया संबंधित अदालत में चलेगी। अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, चार्जशीट में जेल में निरुद्ध आठ आरोपियों के नाम शामिल हैं। इनमें टिन्नू यादव, करुणेश, मनीष, सुभाष चंद्र श्रीवास्तव, रमाशंकर, अनुकल्प मिश्र और लवकुश मिश्र समेत आठ आरोपी बताए गए हैं। चार्जशीट में लगाए गए आरोपों और प्रत्येक आरोपी के खिलाफ उपलब्ध साक्ष्यों की विस्तृत जानकारी अदालत की कार्यवाही में सामने आएगी।

चार्जशीट दाखिल किए जाने के बाद अधिवक्ताओं के कार्य बहिष्कार का मामला भी सामने आया है। अमर उजाला के अनुसार, कुछ अधिवक्ताओं ने आपत्ति जताई कि पहले उनकी ओर से दी गई शिकायत या आपत्ति पर सुनवाई होनी चाहिए थी और उसके बाद चार्जशीट दाखिल की जानी चाहिए। इसी वजह से कोर्ट परिसर में कुछ समय तक गहमागहमी की स्थिति रही। यह अधिवक्ताओं की ओर से व्यक्त की गई आपत्ति है और मामले की न्यायिक प्रक्रिया में इसका क्या प्रभाव होगा, यह संबंधित अदालत के आदेश से स्पष्ट होगा।

इस प्रकरण में मंदिर ट्रस्ट के पदाधिकारियों और बैंक कर्मचारियों की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ अधिवक्ताओं ने राम मंदिर ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय, डॉ. अनिल मिश्र और गोपाल राव के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज करने की मांग को लेकर तहरीर दी थी। हालांकि, इन व्यक्तियों के खिलाफ आरोपों को चार्जशीट में किस तरह संबोधित किया गया है, इसकी पूरी जानकारी सामने आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।

सुप्रीम कोर्ट के समक्ष रखी गई SIT रिपोर्ट में यह भी बताया गया था कि चढ़ावे में मिलने वाली मूल्यवान वस्तुओं की रसीद एक विशेष सॉफ्टवेयर के जरिए तैयार की जाती है और ऐसी वस्तुओं को SBI के लॉकर में सुरक्षित रखा जाता है। जांच के दौरान इन व्यवस्थाओं और चढ़ावे के प्रबंधन से जुड़े रिकॉर्ड को भी देखा गया। इससे जांच का दायरा केवल सीसीटीवी फुटेज तक सीमित नहीं रहा, बल्कि वित्तीय और प्रशासनिक रिकॉर्ड की भी पड़ताल की गई।

सुप्रीम कोर्ट ने 21 सितंबर की सुनवाई में यह भी स्पष्ट किया कि वह इस स्तर पर मामले को संबंधित सत्र अदालत से अपने हाथ में नहीं लेना चाहता। अदालत ने कहा कि संबंधित अदालत कानून के अनुसार उचित आदेश पारित कर सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी व्यवस्था रखी कि यदि आगे की जांच की आवश्यकता महसूस होती है तो बाद में इस संबंध में उचित आदेश दिए जा सकते हैं। अगली सुनवाई के लिए 2 नवंबर 2026 की तारीख तय की गई है।

चार्जशीट दाखिल होने के बाद अब अदालत के सामने जांच एजेंसी की ओर से जुटाए गए साक्ष्यों और आरोपों की कानूनी जांच होगी। आरोपपत्र में शामिल आरोप अभी न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा हैं और आरोपियों के खिलाफ दोष सिद्ध होना अदालत के अंतिम निर्णय पर निर्भर करेगा। आगे की सुनवाई में आरोपों पर अदालत का रुख, आरोपियों की ओर से रखी गई दलीलें और जांच से जुड़े अन्य पहलू सामने आ सकते हैं।

फिलहाल इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण घटनाक्रम यह है कि जिस आरोपपत्र को 25 सितंबर की वैधानिक समय-सीमा से पहले दाखिल करने की जानकारी सुप्रीम कोर्ट को दी गई थी, वह 23 सितंबर को ही अदालत में पेश कर दिया गया। इससे SIT की जांच का पहला प्रमुख चरण पूरा हो गया है और अब मामला आरोपपत्र के आधार पर आगे की न्यायिक प्रक्रिया में प्रवेश कर चुका है

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