स्वीडन में सरकार आपराधिक जिम्मेदारी की उम्र 15 से घटाकर 14 करने की तैयारी कर रही है। गैंग हिंसा और किशोर अपराध बढ़ने के कारण यह कदम उठाया गया है, हालांकि मानवाधिकार संगठनों ने इसका विरोध किया है।
स्टॉकहोम: स्वीडन ने अपने किशोर अपराध कानूनों में एक बड़ा बदलाव करते हुए 13 वर्ष के गंभीर अपराधियों को जेल भेजने की योजना को वापस ले लिया है। पर्याप्त संसदीय समर्थन न मिलने के कारण यह प्रस्ताव आगे नहीं बढ़ सका। अब सरकार ने संकेत दिया है कि वह अपराध की न्यूनतम आयु सीमा को 15 वर्ष से घटाकर 14 वर्ष करने के लिए नया कानून लाएगी। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब देश में युवा गैंग हिंसा और नाबालिगों की आपराधिक गतिविधियों में शामिल होने के मामले लगातार बढ़ रहे हैं।
सरकार का नया रुख और कानून में बदलाव की दिशा
स्वीडन की केंद्र-दक्षिणपंथी सरकार पहले 13 वर्षीय गंभीर अपराधियों को जेल में भेजने पर विचार कर रही थी, लेकिन राजनीतिक सहमति न बनने के कारण इस योजना को छोड़ दिया गया। न्याय मंत्री गुन्नार स्ट्रोमर ने कहा कि सरकार अब एक संतुलित समाधान की ओर बढ़ रही है, जिसमें अपराध की उम्र सीमा को केवल एक वर्ष घटाकर 14 वर्ष किया जाएगा। सरकार का तर्क है कि इससे सजा अधिक न्यायसंगत होगी और पुनर्वास की संभावनाएं बेहतर बनी रहेंगी। इसके साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि गंभीर अपराधों पर नियंत्रण मजबूत रहे।
बढ़ती गैंग हिंसा और किशोरों की भागीदारी
पिछले कुछ वर्षों में स्वीडन में संगठित गैंग हिंसा तेजी से बढ़ी है और इसमें नाबालिगों की भूमिका चिंता का विषय बन गई है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले वर्ष 15 वर्ष से कम उम्र के 50 से अधिक बच्चे हत्या या हत्या के प्रयास जैसे गंभीर मामलों में अदालत तक पहुंचे। रिपोर्टों से यह भी सामने आया है कि कई आपराधिक गिरोह नाबालिगों को अपने नेटवर्क में शामिल कर रहे हैं क्योंकि उनकी कानूनी जिम्मेदारी सीमित होती है। यह स्थिति कानून-व्यवस्था और सामाजिक सुरक्षा दोनों के लिए गंभीर चुनौती बन गई है।
वर्तमान व्यवस्था और उसकी चुनौतियाँ
स्वीडन में फिलहाल 15 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को जेल नहीं भेजा जाता, बल्कि उन्हें विशेष युवा देखभाल केंद्रों में रखा जाता है जिन्हें SiS Homes कहा जाता है। सरकार का कहना है कि इन संस्थानों में सुधार की जरूरत है क्योंकि वहां कई बार पुनर्वास की प्रक्रिया प्रभावी नहीं होती। कई मामलों में देखा गया है कि इन केंद्रों से बाहर आने के बाद युवा फिर से अपराध की दुनिया में लौट जाते हैं। इसी कारण सरकार मानती है कि मौजूदा प्रणाली को और मजबूत करने की आवश्यकता है।
सरकार की नई योजना और जेल प्रणाली में बदलाव
नए प्रस्ताव के तहत आठ मौजूदा जेलों में नाबालिगों के लिए अलग विशेष इकाइयाँ तैयार की जाएंगी, जहां उन्हें वयस्क कैदियों से अलग रखा जाएगा। सरकार का उद्देश्य यह है कि गंभीर अपराध करने वाले किशोरों को एक नियंत्रित वातावरण में रखा जाए, जिससे वे नकारात्मक प्रभाव से बच सकें और पुनर्वास की प्रक्रिया बेहतर हो सके। न्याय मंत्रालय का मानना है कि यह कदम समाज की सुरक्षा और अपराध की रोकथाम दोनों के लिए जरूरी है।
मानवाधिकार संगठनों की प्रतिक्रिया
इस प्रस्ताव पर मानवाधिकार और बाल अधिकार संगठनों ने चिंता जताई है। BRIS नामक स्वीडिश संगठन की महासचिव मारिया फ्रिस्क का कहना है कि केवल उम्र घटाने से समस्या का समाधान नहीं होगा। उनका मानना है कि मौजूदा युवा देखभाल केंद्रों को मजबूत करना ज्यादा जरूरी है और बच्चों के पुनर्वास पर अधिक ध्यान दिया जाना चाहिए। उनका तर्क है कि अपराध की जड़ सामाजिक परिस्थितियों में है, जिसे केवल सजा से ठीक नहीं किया जा सकता।
गैंग नेटवर्क और नाबालिगों का इस्तेमाल
स्वीडन में फॉक्सट्रॉट जैसे संगठित अपराध गिरोहों पर आरोप है कि वे नाबालिगों को हिंसक गतिविधियों में शामिल कर रहे हैं। इन गिरोहों में किशोरों का इस्तेमाल गोलीबारी, विस्फोट और अन्य अपराधों के लिए किया जाता है। हाल के वर्षों में गैंग संघर्षों में हिंसा बढ़ी है, जिससे देश की सुरक्षा व्यवस्था पर दबाव बढ़ गया है। यह भी बताया गया है कि कई बार किशोरों को जानबूझकर ऐसे अपराधों में धकेला जाता है जिनके लिए उन्हें कम सजा मिलती है।
अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा चिंताएँ
स्वीडन की सुरक्षा एजेंसी SÄPO ने कुछ मामलों में विदेशी प्रभाव की संभावना जताई है। एजेंसी का कहना है कि कुछ हमलों में अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की भूमिका हो सकती है। हालांकि ईरान ने इन आरोपों को खारिज करते हुए इन्हें गलत और बिना आधार बताया है। इस पूरे मामले ने यूरोप में भी सुरक्षा और आतंकवाद से जुड़े नए सवाल खड़े कर दिए हैं।











