संयुक्त राष्ट्र ने सीरिया में बारूदी सुरंगों और युद्ध के विस्फोटक अवशेषों से बढ़ते खतरे पर चिंता जताई है। पिछले सप्ताह छह प्रांतों में करीब एक दर्जन घटनाओं में नौ लोगों की मौत हुई, जिनमें छह बच्चे थे, जबकि 13 लोग घायल हुए।
दमिश्क: सीरिया में वर्षों से चले आ रहे संघर्ष के बाद जमीन में मौजूद बारूदी सुरंगों और युद्ध के विस्फोटक अवशेष आम नागरिकों के लिए लगातार जानलेवा खतरा बने हुए हैं। संयुक्त राष्ट्र के मानवीय मामलों के समन्वय कार्यालय (OCHA) ने शुक्रवार को चेतावनी दी कि विस्फोटक आयुधों से दूषित क्षेत्र लोगों के जीवन को केवल उनके घरों तक सीमित नहीं कर रहे, बल्कि उनके आवागमन, कामकाज और परिवार के लिए रोजी-रोटी जुटाने की क्षमता को भी प्रभावित कर रहे हैं।
OCHA के मुताबिक, पिछले एक सप्ताह के दौरान सीरिया के छह प्रांतों में विस्फोटक आयुध से जुड़ी करीब एक दर्जन घटनाएं दर्ज की गईं। इन घटनाओं में नौ लोगों की मौत हुई, जिनमें छह बच्चे शामिल थे। इसके अलावा 13 लोग घायल हुए।
छह सीरियाई प्रांतों में दर्ज हुईं घटनाएं
संयुक्त राष्ट्र की मानवीय एजेंसी के अनुसार, बीते सप्ताह सीरिया के अलग-अलग हिस्सों में विस्फोटक अवशेषों से जुड़े कई हादसे सामने आए। इन घटनाओं ने एक बार फिर यह उजागर किया है कि युद्ध खत्म होने के बाद भी संघर्ष से जुड़ी घातक सामग्री आम नागरिकों के लिए गंभीर खतरा बनी हुई है।
बारूदी सुरंगें और अन्य विस्फोटक आयुध अक्सर उन क्षेत्रों में मौजूद रहते हैं जहां लोग खेती, पशुपालन या आवागमन के लिए जाते हैं। इस वजह से ग्रामीण आबादी, किसान, चरवाहे और गांवों के बीच यात्रा करने वाले लोग विशेष जोखिम में रहते हैं।
दीर अल-जौर में वाहन को बारूदी सुरंग ने बनाया निशाना
OCHA ने बताया कि सोमवार को दीर अल-जौर प्रांत में एक बारूदी सुरंग ने एक नागरिक वाहन को अपनी चपेट में ले लिया। इस घटना में पांच बच्चों की मौत हो गई, जबकि तीन अन्य नागरिक घायल हुए।
यह हादसा इस बात का गंभीर उदाहरण है कि युद्ध के दौरान बिछाई गई बारूदी सुरंगें संघर्ष समाप्त होने के बाद भी आम लोगों की जान ले सकती हैं। नागरिक वाहन के इसकी चपेट में आने से एक ही परिवार या समूह के कई लोगों के प्रभावित होने का खतरा भी सामने आता है।
घटना के बाद क्षेत्र में मौजूद विस्फोटक सामग्री को लेकर सुरक्षा संबंधी चिंताएं और बढ़ गई हैं। संयुक्त राष्ट्र लगातार ऐसे इलाकों में विस्फोटक आयुधों की पहचान और सफाई की आवश्यकता पर जोर देता रहा है।
रक्का में सबसे ज्यादा विस्फोट
संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, रक्का प्रांत में विस्फोटक आयुधों से जुड़ी घटनाओं की संख्या सबसे अधिक रही। यह स्थिति उत्तरी सीरिया में युद्ध के बचे हुए विस्फोटक अवशेषों से जारी खतरे को रेखांकित करती है।
रक्का और इसके आसपास के क्षेत्रों में बड़ी संख्या में लोग अपनी आजीविका के लिए कृषि और पशुपालन पर निर्भर हैं। ऐसे क्षेत्रों में जमीन के नीचे मौजूद बारूदी सुरंगें और अन्य विस्फोटक अवशेष खेती या चराई के दौरान अचानक विस्फोट का कारण बन सकते हैं।
इसका असर केवल शारीरिक सुरक्षा तक सीमित नहीं है। यदि किसी इलाके को असुरक्षित माना जाता है तो लोग खेतों, चरागाहों और दूसरे जरूरी स्थानों तक पहुंचने से भी बचते हैं। इससे स्थानीय समुदायों की आर्थिक गतिविधियां प्रभावित होती हैं।
इदलिब के बिन्निश शहर में भी बड़ा विस्फोट
सीरिया के उत्तर-पश्चिमी इदलिब प्रांत के बिन्निश शहर में मंगलवार को एक अन्य गंभीर विस्फोट हुआ। सरकारी समाचार एजेंसी SANA ने प्रांतीय आपातकालीन एवं आपदा प्रबंधन निदेशालय के हवाले से बताया कि गोला-बारूद से लदे एक वाहन में विस्फोट हुआ।
इस घटना में दो लोगों की मौत हुई और पांच अन्य घायल हो गए। SANA के मुताबिक, शुरुआती धमाके के बाद शहर में कई और विस्फोट हुए। इससे आसपास के क्षेत्र में खतरा बढ़ गया और राहत एवं आपातकालीन सेवाओं के सामने अतिरिक्त चुनौती पैदा हुई।
इस घटना की प्रकृति दीर अल-जौर में हुए बारूदी सुरंग विस्फोट से अलग थी, लेकिन यह भी दिखाती है कि सीरिया में विस्फोटक सामग्री से जुड़े खतरे कई रूपों में मौजूद हैं।
दिसंबर 2024 के बाद 1,400 से ज्यादा घटनाएं
OCHA के अनुसार, 8 दिसंबर 2024 से अब तक सीरिया में विस्फोटक आयुधों से जुड़ी 1,400 से अधिक घटनाएं दर्ज की जा चुकी हैं। इन घटनाओं में करीब 2,500 नागरिक हताहत हुए हैं, जिनमें लगभग 880 लोगों की मौत हुई है।
ये आंकड़े बताते हैं कि सीरिया में युद्ध के दौरान छोड़ी गई या बिछाई गई विस्फोटक सामग्री अभी भी बड़े पैमाने पर मौजूद है। कई इलाकों में लोगों के रोजमर्रा के जीवन में लौटने के साथ इन खतरों का सामना और बढ़ रहा है।
संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, दो-तिहाई से अधिक घटनाएं कृषि और चरागाहों वाली जमीन पर हुई हैं। इससे किसान और पशुपालक विशेष रूप से खतरे में हैं।
किसानों और चरवाहों के लिए बढ़ा जोखिम
कृषि और चरागाहों में विस्फोटक अवशेषों की मौजूदगी का सीधा असर ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। किसान खेतों में काम करते समय, जबकि चरवाहे पशुओं को चराने के दौरान बारूदी सुरंग या अन्य विस्फोटक सामग्री की चपेट में आ सकते हैं।
इसके अलावा, गांवों के बीच आने-जाने वाले लोगों के लिए भी खतरा बना रहता है। सड़क, पगडंडी या खुले मैदान का सुरक्षित दिखाई देना यह सुनिश्चित नहीं करता कि वहां विस्फोटक सामग्री मौजूद नहीं है।
OCHA ने बड़े पैमाने पर विस्फोटक आयुधों की सफाई यानी क्लियरेंस ऑपरेशन की तत्काल आवश्यकता पर जोर दिया है। ऐसी कार्रवाई के जरिए संदिग्ध इलाकों की पहचान कर उन्हें सुरक्षित बनाया जा सकता है।
जागरूकता अभियान भी जरूरी
संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, केवल बारूदी सुरंगों और विस्फोटक अवशेषों को हटाना ही पर्याप्त नहीं है। नागरिकों को इन खतरों के बारे में जागरूक करना भी जरूरी है।
माइन एक्शन के क्षेत्र में काम करने वाले संगठनों का कहना है कि जोखिम संबंधी शिक्षा, विस्फोटक सामग्री की सफाई और प्रभावित लोगों को सहायता—तीनों कदम एक साथ जरूरी हैं।
ग्रामीण समुदायों को यह जानकारी देना महत्वपूर्ण है कि संदिग्ध वस्तु मिलने पर उससे दूरी बनाए रखें और संबंधित अधिकारियों को सूचना दें। ऐसे जागरूकता कार्यक्रम खासकर बच्चों के लिए महत्वपूर्ण माने जाते हैं, क्योंकि वे अक्सर अनजानी वस्तुओं को उठाने या उनके करीब जाने के खतरे को नहीं समझ पाते।
सुरक्षित वापसी के सामने बड़ी चुनौती
सीरिया में बड़ी संख्या में लोग संघर्ष के कारण विस्थापित हुए हैं। कई परिवार अब अपने मूल इलाकों में लौटने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन यदि घरों, खेतों, सड़कों और चरागाहों के आसपास विस्फोटक सामग्री मौजूद है, तो सुरक्षित वापसी मुश्किल हो जाती है।
OCHA ने कहा कि विस्फोटक आयुधों की सफाई और प्रभावित लोगों को सहायता उपलब्ध कराना नागरिकों की सुरक्षा के लिए जरूरी है। इससे लोगों को अपने घरों में सुरक्षित लौटने और सामान्य जीवन दोबारा शुरू करने में मदद मिल सकती है।
संयुक्त राष्ट्र की चेतावनी ऐसे समय आई है जब सीरिया में विस्फोटक अवशेषों की समस्या लगातार मानवीय संकट का हिस्सा बनी हुई है। पिछले सप्ताह की घटनाओं में बच्चों समेत नौ लोगों की मौत और 13 लोगों के घायल होने से खतरे की गंभीरता एक बार फिर सामने आई है।
जब तक प्रभावित क्षेत्रों में व्यापक स्तर पर सफाई अभियान नहीं चलाया जाता, तब तक खेतों, चरागाहों और गांवों के बीच के रास्तों में छिपे विस्फोटक आम नागरिकों की जिंदगी के लिए खतरा बने रहेंगे। इसलिए संयुक्त राष्ट्र ने विस्फोटक आयुधों की सफाई, जोखिम संबंधी शिक्षा और पीड़ितों की सहायता को सुरक्षित और टिकाऊ वापसी की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है।









