राजस्थान के टोंक जिले में गुरुवार सुबह एक दर्दनाक घटना सामने आई, जहां 17 वर्षीय 12वीं कक्षा के छात्र ने अपने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। घटना ने पूरे इलाके में शोक और चिंता का माहौल पैदा कर दिया है। प्रारंभिक जांच में मामला प्रेम प्रसंग और मानसिक तनाव से जुड़ा बताया जा रहा है।
टोंक: राजस्थान के टोंक जिले में एक 17 वर्षीय 12वीं कक्षा के छात्र की आत्महत्या का मामला सामने आया है, जिसने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है। यह घटना न केवल एक व्यक्तिगत त्रासदी के रूप में देखी जा रही है, बल्कि इसके पीछे प्रेम संबंध, पारिवारिक तनाव और गंभीर आरोपों की भी चर्चा हो रही है।
पुलिस और परिजनों के अनुसार, छात्र पिछले कुछ समय से मानसिक दबाव में था और अपने निजी जीवन को लेकर काफी परेशान चल रहा था। फिलहाल मामले की जांच विभिन्न पहलुओं को ध्यान में रखकर की जा रही है।
सुबह कमरे में मिला छात्र का शव, परिवार में मचा कोहराम
घटना Tonk के कोतवाली थाना क्षेत्र की है, जहां गुरुवार सुबह 17 वर्षीय छात्र अपने कमरे में फंदे से लटका मिला।
परिवार के अनुसार, सुबह करीब 8 बजे उसकी मां उसे जगाने के लिए कमरे में गईं। दरवाजा अंदर से बंद था और बार-बार आवाज देने पर भी कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। इसके बाद खिड़की से झांकने पर उन्होंने बेटे को पंखे से लटका देखा।
घबराए परिजनों ने आसपास के लोगों को बुलाया और पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने छात्र को नीचे उतारकर अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
12वीं का छात्र, निजी स्कूल में पढ़ाई कर रहा था
मृतक छात्र टोंक के एक निजी स्कूल में 12वीं कक्षा का छात्र था और पिछले करीब पांच वर्षों से अपनी मां और छोटे भाई के साथ किराए के मकान में रह रहा था। उसके पिता का पहले ही निधन हो चुका था।
परिवार का कहना है कि छात्र पढ़ाई में सामान्य रूप से अच्छा था, लेकिन पिछले कुछ महीनों से उसका व्यवहार बदलने लगा था। वह अक्सर अकेला रहने लगा था और मोबाइल फोन में अधिक समय बिताने लगा था।
साथ पढ़ने वाली छात्रा से प्रेम प्रसंग का दावा
पुलिस और परिजनों से मिली जानकारी के अनुसार, छात्र का अपनी ही स्कूल में पढ़ने वाली एक नाबालिग छात्रा के साथ पिछले लगभग दो वर्षों से प्रेम प्रसंग चल रहा था।

दोनों के बीच रिश्ते को लेकर कई बार विवाद भी हुआ था। परिवार के अनुसार, इस संबंध के कारण छात्र मानसिक रूप से परेशान रहने लगा था और उसकी पढ़ाई पर भी असर पड़ा था।
मां का गंभीर आरोप: धर्म परिवर्तन के लिए दबाव
मृतक छात्र की मां ने आरोप लगाया है कि उसके बेटे पर उसकी नाबालिग प्रेमिका और उसके माता-पिता द्वारा धर्म परिवर्तन का दबाव बनाया जा रहा था।
उनका कहना है कि इसी वजह से घर में भी अक्सर तनाव और विवाद की स्थिति बनी रहती थी। मां के अनुसार, बेटा पिछले कुछ महीनों से बेहद परेशान था और धीरे-धीरे उसने परिवार से दूरी बनानी शुरू कर दी थी।
हालांकि, यह आरोप अभी तक पुलिस जांच का हिस्सा है और किसी भी पक्ष की ओर से स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
पिछले 2-3 महीनों से बढ़ा मानसिक तनाव
परिजनों के अनुसार, छात्र पिछले दो से तीन महीनों में काफी बदल गया था। वह घर में कम बात करता था, अक्सर अकेला रहता था और कई बार खाना भी नहीं खाता था।
उसकी दिनचर्या में मोबाइल फोन का उपयोग बढ़ गया था और वह मानसिक रूप से अस्थिर दिखाई देने लगा था। परिवार का कहना है कि उन्होंने उसे कई बार समझाने की कोशिश की, लेकिन उसका व्यवहार लगातार बदलता गया।
सुसाइड नोट नहीं मिला, पुलिस सभी पहलुओं की जांच में जुटी
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, घटना स्थल से कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है। कोतवाली पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
कोतवाली थाना अधिकारी भंवर लाल वैष्णव ने बताया कि परिजनों और सहपाठियों से मिली जानकारी के आधार पर यह मामला प्रेम प्रसंग और मानसिक तनाव से जुड़ा प्रतीत होता है। हालांकि, सभी आरोपों की जांच की जा रही है।
पोस्टमॉर्टम के बाद शव परिजनों को सौंपा गया
घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस अधिकारी और टोंक के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी अस्पताल पहुंचे। मृतक का पोस्टमॉर्टम मेडिकल बोर्ड द्वारा कराया गया और उसके बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया।
DSP Mritunjay Mishra ने भी अस्पताल पहुंचकर मामले की जानकारी ली और परिजनों से बातचीत की।
पुलिस जांच में प्रेम संबंध और पारिवारिक विवाद दोनों शामिल
प्रारंभिक जांच में पुलिस इस बात की पुष्टि कर रही है कि मामला केवल प्रेम प्रसंग तक सीमित है या इसमें अन्य सामाजिक और पारिवारिक कारण भी शामिल हैं।
पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या छात्र पर किसी प्रकार का दबाव या मानसिक उत्पीड़न हुआ था। साथ ही, मोबाइल रिकॉर्ड और सोशल मीडिया गतिविधियों की भी जांच की जा रही है।
मानसिक स्वास्थ्य और किशोरों पर बढ़ता दबाव
विशेषज्ञों के अनुसार, किशोरावस्था में भावनात्मक असंतुलन, रिश्तों का दबाव और पढ़ाई से जुड़ा तनाव कई बार गंभीर परिणामों का कारण बन सकता है।
यह मामला एक बार फिर इस बात की ओर संकेत करता है कि स्कूल स्तर पर काउंसलिंग और मानसिक स्वास्थ्य सहायता की जरूरत कितनी महत्वपूर्ण है।









