फ्फरपुर के त्रिपुरारी कुमार ने आईटी सेक्टर में नौकरी करते हुए 70वीं बीपीएससी परीक्षा में 464वीं रैंक हासिल की है। दूसरे प्रयास में मिली इस सफलता के बाद उनका चयन सहायक जिला परिवहन पदाधिकारी (ADTO) पद पर हुआ है।
Muzaffarpur: मुजफ्फरपुर जिले के कोरीगामा गांव निवासी त्रिपुरारी कुमार ने यह साबित कर दिया कि मजबूत संकल्प और सही रणनीति के साथ किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है। आईटी कंपनी में नौकरी के साथ तैयारी करते हुए उन्होंने 70वीं बीपीएससी परीक्षा में सफलता प्राप्त कर सहायक जिला परिवहन पदाधिकारी पद हासिल किया है।
इंजीनियरिंग से प्रशासनिक सेवा तक का सफर
मुरौल प्रखंड के कोरीगामा गांव के रहने वाले Tripurari Kumar ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा पूरी करने के बाद इंजीनियरिंग को करियर के रूप में चुना। वर्ष 2015 में उन्होंने बेंगलुरु स्थित PESIT से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बीटेक की डिग्री हासिल की।
डिग्री पूरी होने के बाद उनका चयन TCS में हुआ, जहां उन्होंने आईटी सेक्टर में काम शुरू किया। हालांकि कॉर्पोरेट करियर के बीच भी उनके मन में प्रशासनिक सेवा में जाने का सपना लगातार बना रहा।
नौकरी के साथ जारी रखी तैयारी
आईटी कंपनी में काम करने के दौरान त्रिपुरारी के सामने सबसे बड़ी चुनौती समय प्रबंधन की थी। एक ओर नौकरी की जिम्मेदारियां थीं और दूसरी ओर बीपीएससी जैसी प्रतियोगी परीक्षा का विस्तृत पाठ्यक्रम।
इसके बावजूद उन्होंने अपने लक्ष्य से समझौता नहीं किया। नियमित नौकरी के साथ उन्होंने पढ़ाई के लिए समय निकाला और सप्ताहांत का अधिकतम उपयोग तैयारी में किया। उनका मानना है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो तो व्यस्त दिनचर्या भी सफलता की राह में बाधा नहीं बनती।
दूसरे प्रयास में मिली सफलता
त्रिपुरारी ने राजनीतिक विज्ञान एवं अंतरराष्ट्रीय संबंध (PSIR) को अपना वैकल्पिक विषय चुना। इस विषय में गहरी समझ और योजनाबद्ध तैयारी ने उनकी सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
पहले प्रयास में उन्हें अपेक्षित परिणाम नहीं मिला, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। अपनी कमजोरियों का विश्लेषण किया और तैयारी के तरीके में आवश्यक सुधार किए। इसी का परिणाम रहा कि दूसरे प्रयास में उन्होंने 70वीं बीपीएससी परीक्षा में 464वीं रैंक हासिल कर ली।
सहायक जिला परिवहन पदाधिकारी पद पर चयन
बीपीएससी की अंतिम चयन सूची में 464वीं रैंक प्राप्त करने के बाद त्रिपुरारी का चयन सहायक जिला परिवहन पदाधिकारी (ADTO) पद के लिए हुआ है। यह उपलब्धि न केवल उनके व्यक्तिगत संघर्ष और मेहनत का परिणाम है, बल्कि उन युवाओं के लिए भी प्रेरणा है जो नौकरी के साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं।
उनकी सफलता यह दर्शाती है कि सीमित समय के बावजूद सही योजना और निरंतर प्रयास से बड़े लक्ष्य हासिल किए जा सकते हैं।
गांव में खुशी का माहौल
सफलता की खबर जैसे ही उनके पैतृक गांव कोरीगामा पहुंची, पूरे क्षेत्र में खुशी का माहौल बन गया। परिवार, रिश्तेदारों और ग्रामीणों ने इस उपलब्धि पर गर्व व्यक्त किया।
उनके पिता प्रमोद कुमार मिश्रा सहित पूरे परिवार ने इस सफलता को वर्षों की मेहनत का परिणाम बताया। ग्रामीणों का कहना है कि त्रिपुरारी की उपलब्धि क्षेत्र के युवाओं को नई प्रेरणा देगी और उन्हें बड़े सपने देखने के लिए प्रोत्साहित करेगी।
युवाओं के लिए बनी प्रेरणा
त्रिपुरारी कुमार की कहानी इस बात का उदाहरण है कि सफलता केवल प्रतिभा से नहीं, बल्कि निरंतर मेहनत, धैर्य और समय के सही उपयोग से मिलती है। आईटी क्षेत्र में कार्यरत रहते हुए प्रशासनिक सेवा तक पहुंचने का उनका सफर हजारों अभ्यर्थियों के लिए प्रेरणादायक बन गया है।
उनकी उपलब्धि यह संदेश देती है कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी चुनौतीपूर्ण क्यों न हों, यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और प्रयास लगातार जारी रहें तो सफलता जरूर मिलती है।









