ट्रम्प ने AI को दिया नया नाम ‘Super Intelligence’: टेक दिग्गजों के साथ सुरक्षा समझौता, अमेरिका-चीन AI रेस पर जोर

ट्रम्प ने AI को Super Intelligence यानी SI नाम देने का आदेश दिया। Google, Meta, OpenAI समेत टेक कंपनियो ने AI सुरक्षा के लिए चार-स्तरीय समझौते पर हस्ताक्षर किए

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने AI को “Super Intelligence” यानी SI कहने का आदेश दिया। व्हाइट हाउस बैठक में Google, Meta, OpenAI, Anthropic, xAI और Nvidia समेत कंपनियों ने AI सुरक्षा के लिए आंतरिक नियंत्रण, बाहरी ऑडिट और बोर्ड निगरानी वाला समझौता किया।

वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने 29 सितंबर 2026 को व्हाइट हाउस में प्रमुख टेक और AI कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों के साथ बैठक की। बैठक में AI की सुरक्षा, निगरानी, डेटा सेंटर और अमेरिका की तकनीकी प्रतिस्पर्धा जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। इसी दौरान ट्रम्प ने एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए, जिसके तहत अमेरिकी संघीय सरकार के आधिकारिक संचार में Artificial Intelligence यानी AI की जगह “Super Intelligence” या SI शब्द इस्तेमाल करने का निर्देश दिया गया। बैठक में Google के CEO सुंदर पिचाई, Anthropic के CEO डारियो अमोडेई, Meta के CEO मार्क जुकरबर्ग, OpenAI के अध्यक्ष ग्रेग ब्रॉकमैन, xAI के एलन मस्क और Nvidia के CEO जेन्सेन हुआंग समेत टेक उद्योग के प्रमुख अधिकारी शामिल हुए। इन कंपनियों ने AI के उन्नत मॉडलों की सुरक्षा के लिए एक स्वैच्छिक समझौते पर हस्ताक्षर भी किए।

ट्रम्प ने AI को ‘Super Intelligence’ कहने का आदेश दिया

ट्रम्प ने मंगलवार को अमेरिकी सरकारी एजेंसियों को Artificial Intelligence की जगह “Super Intelligence” शब्द इस्तेमाल करने का निर्देश दिया। यह बदलाव आधिकारिक पत्राचार, वेबसाइटों, रिपोर्टों, नीतिगत दस्तावेजों और अन्य गैर-कानूनी सरकारी संचार में लागू करने के लिए किया गया है। कार्यकारी आदेश में विज्ञान और प्रौद्योगिकी से जुड़े राष्ट्रपति के सहायक को 60 दिनों के भीतर “Super Intelligence” की संभावित कानूनी परिभाषा को लेकर प्रस्तावित विधायी भाषा तैयार करने का निर्देश भी दिया गया है।

ट्रम्प ने इससे पहले 22 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र महासभा के अपने भाषण में AI के लिए “Super Intelligence” शब्द का इस्तेमाल किया था। उन्होंने कहा था कि “Artificial” शब्द तकनीक को बनावटी या नकली जैसा दिखाता है, जबकि उनके अनुसार यह तकनीक उससे कहीं आगे बढ़ चुकी है।

ट्रम्प ने AI को इंटरनेट से भी बड़ी तकनीकी शक्ति बताया है। उन्होंने AI के विकास को अमेरिका और चीन के बीच बढ़ती तकनीकी प्रतिस्पर्धा से भी जोड़ा है और अमेरिकी नेतृत्व को बनाए रखने पर जोर दिया।

टेक कंपनियों ने AI सुरक्षा समझौते पर किए हस्ताक्षर

व्हाइट हाउस बैठक का दूसरा प्रमुख हिस्सा AI सुरक्षा से जुड़ा स्वैच्छिक समझौता रहा। समझौते में कंपनियों ने अपने उन्नत AI मॉडलों की सुरक्षा और निगरानी के लिए चार स्तरों वाली व्यवस्था अपनाने पर सहमति जताई।

समझौते के अनुसार, कंपनियां अपने AI सिस्टम की क्षमताओं और सुरक्षा से जुड़े जोखिमों की नियमित निगरानी करेंगी। इसमें साइबर सुरक्षा, जैविक और रासायनिक खतरों जैसे क्षेत्रों पर भी ध्यान देने की बात कही गई है। कंपनियों को यह सुनिश्चित करने के लिए भी कहा गया है कि उनके AI मॉडल अनजाने में किसी तकनीकी सिस्टम में सेंध न लगाएं या उस तक अनधिकृत पहुंच न बनाएं।

1. कंपनियां खुद करेंगी AI सिस्टम की निगरानी

पहले स्तर पर कंपनियों को अपने AI मॉडलों के लिए मजबूत आंतरिक नियंत्रण व्यवस्था बनाने की बात कही गई है। इसका उद्देश्य मॉडल के प्रशिक्षण और इस्तेमाल के दौरान उसकी क्षमताओं तथा सुरक्षा से जुड़े व्यवहार की निगरानी करना है।

2. अलग आंतरिक टीम करेगी निगरानी

दूसरे स्तर पर कंपनियों को एक आंतरिक टीम रखने की बात कही गई है। यह टीम यह देखेगी कि सुरक्षा नियंत्रण, निगरानी और खतरे का पता लगाने वाली व्यवस्थाएं ठीक तरह से काम कर रही हैं या नहीं। किसी समस्या की पहचान होने पर उसे दूर करने की जिम्मेदारी भी इसी व्यवस्था का हिस्सा होगी।

3. बाहरी विशेषज्ञों से भी होगी जांच

तीसरे स्तर पर कंपनियों को स्वतंत्र बाहरी ऑडिटर या मूल्यांकनकर्ता के साथ काम करने की बात कही गई है। बाहरी विशेषज्ञ यह आकलन करेंगे कि कंपनी की AI सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था वास्तव में तय उद्देश्य के अनुसार काम कर रही है या नहीं।

4. बोर्ड की स्वतंत्र समिति करेगी निगरानी

चौथे स्तर पर कंपनी के निदेशक मंडल की एक स्वतंत्र समिति को आंतरिक टीमों और बाहरी ऑडिटरों की रिपोर्ट की निगरानी करने की जिम्मेदारी दी जाएगी। यदि कोई समस्या सामने आती है तो उसके समाधान की प्रक्रिया पर भी नजर रखी जाएगी।

समझौते में यह भी कहा गया है कि संबंधित कंपनियां आगे नियमित रूप से बैठक करेंगी और AI सिस्टम की सुरक्षा बेहतर बनाने के लिए मानक तथा सर्वोत्तम प्रक्रियाएं विकसित करेंगी। दस्तावेज में भविष्य में इन उपायों को कानून या नियमों का हिस्सा बनाने की संभावना का भी उल्लेख किया गया है।

समझौते पर किन टेक दिग्गजों के हस्ताक्षर?

इस समझौते पर ट्रम्प के अलावा Google के सुंदर पिचाई, Anthropic के डारियो अमोडेई, Meta के मार्क जुकरबर्ग, OpenAI के ग्रेग ब्रॉकमैन, xAI के एलन मस्क और Nvidia के जेन्सेन हुआंग के हस्ताक्षर हैं।

समझौते को अनिवार्य सरकारी कानून के बजाय कंपनियों की स्वैच्छिक प्रतिबद्धता के रूप में पेश किया गया है। ट्रम्प ने AI कंपनियों से अपनी तकनीक की सुरक्षा को लेकर स्वयं निगरानी और नियंत्रण मजबूत करने पर जोर दिया।

डेटा सेंटर पर भी हुई चर्चा

व्हाइट हाउस बैठक में AI के लिए जरूरी बुनियादी ढांचे, खासकर डेटा सेंटर, पर भी चर्चा हुई। AI मॉडल को प्रशिक्षित करने और चलाने के लिए बड़ी मात्रा में कंप्यूटिंग क्षमता की जरूरत होती है। यही क्षमता बड़े डेटा सेंटर उपलब्ध कराते हैं।

ट्रम्प ने डेटा सेंटर के विस्तार का समर्थन किया। साथ ही उन्होंने कहा कि जिन समुदायों में ऐसे केंद्र बनाए जाएंगे, टेक कंपनियों को वहां रहने वाले लोगों के साथ मिलकर काम करना चाहिए। कंपनियों से स्थानीय समुदायों को लाभ पहुंचाने की दिशा में योगदान देने की अपेक्षा जताई गई।

डेटा सेंटर के विस्तार के साथ बिजली की मांग, स्थानीय उपयोगिता लागत और समुदायों पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर अमेरिका में चर्चा भी बढ़ी है। Reuters के अनुसार, डेटा सेंटर AI मॉडल को प्रशिक्षित और संचालित करने के लिए आवश्यक कंप्यूटिंग शक्ति उपलब्ध कराते हैं।

जुकरबर्ग बोले- AI पर लोगों का भरोसा जरूरी

Meta के CEO मार्क जुकरबर्ग ने समझौते को AI सिस्टम में भरोसा बढ़ाने की दिशा में एक कदम बताया। बैठक के दौरान उन्होंने कंपनियों की मजबूत आंतरिक नियंत्रण व्यवस्था बनाने की प्रतिबद्धता का उल्लेख किया।

Anthropic के CEO डारियो अमोडेई भी बैठक में शामिल थे। समझौते का व्यापक उद्देश्य AI कंपनियों के बीच सुरक्षा मानकों और निगरानी की व्यवस्था को मजबूत करना है।

अमेरिका-चीन AI प्रतिस्पर्धा में चार बड़े मोर्चे

AI को लेकर अमेरिका और चीन के बीच प्रतिस्पर्धा केवल AI मॉडल तक सीमित नहीं है। इसके पीछे कई तकनीकी और औद्योगिक आधार हैं।

चिप्स: AI की कंप्यूटिंग शक्ति

AI मॉडल को प्रशिक्षित और संचालित करने के लिए अत्यधिक शक्तिशाली कंप्यूटिंग चिप्स की जरूरत होती है। इसलिए उन्नत चिप्स की उपलब्धता AI विकास की महत्वपूर्ण आधारभूत जरूरत बन गई है।

डेटा सेंटर: AI का इंफ्रास्ट्रक्चर

बड़े AI मॉडल को चलाने के लिए हजारों कंप्यूटर और विशेष कंप्यूटिंग सिस्टम की जरूरत होती है। इन्हें बड़े डेटा सेंटर में रखा जाता है। AI का इस्तेमाल बढ़ने के साथ इन केंद्रों की मांग भी बढ़ रही है।

बिजली: AI के विस्तार की अहम जरूरत

डेटा सेंटर को लगातार बड़ी मात्रा में बिजली की जरूरत होती है। इसलिए AI के विस्तार के साथ ऊर्जा उपलब्धता भी महत्वपूर्ण मुद्दा बन रही है। अमेरिका में नए डेटा सेंटरों को लेकर बिजली की मांग और स्थानीय प्रभाव पर बहस जारी है।

AI मॉडल: क्षमता और उपयोगिता

आखिर में प्रतिस्पर्धा AI मॉडल की क्षमता पर भी निर्भर करती है। कौन-सी कंपनी ऐसे मॉडल विकसित करती है जो जटिल कामों को अधिक प्रभावी ढंग से पूरा कर सकें, यह AI उद्योग की प्रतिस्पर्धा का एक प्रमुख हिस्सा है।

आगे क्या बदलेगा?

ट्रम्प के कार्यकारी आदेश से अमेरिकी संघीय सरकारी संचार में AI के लिए “Super Intelligence” या “SI” शब्द के इस्तेमाल की दिशा तय हुई है। वहीं टेक कंपनियों का समझौता AI सुरक्षा के लिए स्वैच्छिक आंतरिक और बाहरी ऑडिट व्यवस्था पर केंद्रित है।

इस घटनाक्रम से एक तरफ अमेरिका में AI के तेज विकास और डेटा सेंटर विस्तार पर जोर दिखाई देता है, वहीं दूसरी तरफ AI सुरक्षा, स्वतंत्र निगरानी और कंपनियों की जवाबदेही को लेकर भी व्यवस्था तैयार करने की कोशिश सामने आई है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इन स्वैच्छिक सुरक्षा उपायों को कंपनियां किस तरह लागू करती हैं और क्या इनमें से कुछ उपाय भविष्य में औपचारिक कानून या नियमन का हिस्सा बनते हैं।

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