देश का यूनियन बजट 2026 रविवार, 1 फरवरी को संसद में पेश किया जाएगा। बजट के समय आम चर्चा अक्सर सड़क, रेलवे, रक्षा, स्वास्थ्य और कल्याणकारी योजनाओं पर होती है।
नई दिल्ली: देश का यूनियन बजट 2026 रविवार, 1 फरवरी को संसद में पेश किया जाएगा। बजट पेश होने में अब 24 घंटे से भी कम समय बाकी है। आमतौर पर बजट चर्चा में सड़क, रेलवे, रक्षा और कल्याणकारी योजनाओं का ज़िक्र अधिक होता है। हालांकि, पुराने बजट के आंकड़ों को देखें तो यह साफ होता है कि सरकार का सबसे बड़ा खर्च सकल सरकारी खर्च में सबसे ज्यादा वेतन, पेंशन और ब्याज अदायगी (Interest Payment) पर होता है, इसके बाद सामाजिक कल्याण, रक्षा और इंफ्रास्ट्रक्चर पर आवंटन आता है।
सरकार का सबसे बड़ा खर्च: ब्याज भुगतान
पुराने बजट आंकड़ों के अनुसार, भारत सरकार का सबसे बड़ा खर्च ब्याज भुगतान में होता है।
- बजट 2024-25 के संशोधित अनुमानों के अनुसार, कुल सरकारी खर्च का लगभग 24% हिस्सा ब्याज चुकाने में गया।
- बजट 2025-26 के अनुमान के अनुसार यह बढ़कर लगभग 25% हो गया।
आसान भाषा में कहें तो भारत सरकार जो भी एक रुपया खर्च करती है, उसका लगभग एक चौथाई हिस्सा पुराने कर्ज को चुकाने में चला जाता है, यानी यह पैसा नई संपत्ति, रोजगार या इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने में इस्तेमाल नहीं होता।

मंत्रालयों के हिसाब से सबसे बड़ा आवंटन: रक्षा मंत्रालय
- सभी मंत्रालयों में रक्षा मंत्रालय को सबसे ज्यादा बजट मिलता है।
- बजट 2025-26 में रक्षा मंत्रालय को 6.81 लाख करोड़ रुपए आवंटित किए गए, जो पिछले साल की तुलना में लगभग 10% अधिक है।
- इस खर्च में वेतन, रक्षा पेंशन, आधुनिकीकरण, हथियारों की खरीद और ऑपरेशनल तैयारी शामिल हैं।
रक्षा पर खर्च सरकार की सुरक्षा प्राथमिकता और वैश्विक रणनीति को दर्शाता है।
राज्यों का हिस्सा: केंद्रीय वित्त का 22%
- केंद्र सरकार का बड़ा हिस्सा सीधे राज्यों को जाता है।
- केंद्रीय टैक्स और शुल्कों में राज्यों का हिस्सा कुल खर्च का लगभग 22% है।
- यह राशि राज्य स्तरीय शासन, विकास और कल्याणकारी योजनाओं के लिए संवैधानिक रूप से अनिवार्य है।
राज्यों को दिए जाने वाले ये पैसे शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़कों और ग्रामीण विकास जैसे क्षेत्रों में निवेश के लिए इस्तेमाल होते हैं।
इंफ्रास्ट्रक्चर और परिवहन
सड़कों और राजमार्गों के विकास के लिए सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय को पर्याप्त बजट मिलता है।इस बजट का मकसद संपत्ति निर्माण, लॉजिस्टिक्स दक्षता और दीर्घकालिक आर्थिक विकास को बढ़ावा देना है। पिछले बजट में ग्राम विकास पर 2.66 लाख करोड़ रुपए खर्च किए गए थे, जिसमें रोजगार सृजन, आवास, साफ-सफाई और बेसिक इंफ्रास्ट्रक्चर शामिल था।











