UNSC की ताज़ा 1267 रिपोर्ट में लाल किला आतंकी हमले को शामिल किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार इस हमले का संबंध जैश-ए-मोहम्मद से था, जिससे पाकिस्तान के आतंकवाद नकारने के दावे कमजोर पड़े हैं।
Pakistan: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (United Nations Security Council – UNSC) की 1267 प्रतिबंध निगरानी समिति की ताज़ा रिपोर्ट ने पाकिस्तान की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। इस रिपोर्ट में पहली बार साफ तौर पर यह दर्ज किया गया है कि पाकिस्तान में सक्रिय आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (JeM) का दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किले पर हुए आतंकी हमले से सीधा संबंध था। यह खुलासा भारत के लिए कूटनीतिक स्तर पर बड़ी सफलता माना जा रहा है, क्योंकि पाकिस्तान लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय मंचों पर यह दावा करता रहा है कि उसकी धरती से संचालित आतंकी संगठन अब सक्रिय नहीं हैं।
UNSC की यह रिपोर्ट पाकिस्तान के उस नैरेटिव को कमजोर करती है, जिसमें वह खुद को आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में एक जिम्मेदार देश के रूप में पेश करता रहा है। रिपोर्ट सामने आने के बाद पाकिस्तान की प्रतिक्रिया भी इसी वजह से तीखी दिखाई दी।
जैश-ए-मोहम्मद पर गंभीर आरोप
UNSC की रिपोर्ट में कहा गया है कि जैश-ए-मोहम्मद न केवल भारत के खिलाफ आतंकी गतिविधियों में शामिल रहा है, बल्कि वह अपने नेटवर्क और प्रभाव को लगातार मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। रिपोर्ट में इस बात पर भी जोर दिया गया है कि संगठन ने बीते वर्षों में कई आतंकी हमलों की जिम्मेदारी ली है।
रिपोर्ट के मुताबिक, एक सदस्य देश ने यह जानकारी साझा की कि 9 नवंबर को लाल किले पर हुए हमले से जैश-ए-मोहम्मद का सीधा जुड़ाव था। इस हमले में 15 लोगों की मौत हुई थी, जिसने देश की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए थे। UNSC की रिपोर्ट में इस हमले का जिक्र होना भारत की उस बात को मजबूती देता है, जिसमें वह अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद का मुद्दा उठाता रहा है।
आतंकी संगठन की ताकत बढ़ाने की रणनीति
रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि जैश-ए-मोहम्मद केवल पारंपरिक आतंकी ढांचे तक सीमित नहीं रहना चाहता। संगठन अपनी ताकत बढ़ाने के लिए नए-नए तरीकों पर काम कर रहा है। UNSC की रिपोर्ट के अनुसार, JeM एक महिला-मात्र विंग बनाने की योजना पर भी काम कर चुका है।

इस महिला विंग का नाम “जमात-उल-मुमिनात” बताया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि 8 अक्टूबर को जैश-ए-मोहम्मद के प्रमुख मौलाना मसूद अज़हर अल्वी ने औपचारिक तौर पर इस विंग के गठन का ऐलान किया था। इसका मकसद आतंकी गतिविधियों को लॉजिस्टिक सपोर्ट देना और संगठन की पहुंच को और मजबूत करना बताया गया है।
पाकिस्तान की आपत्ति से बढ़ा विवाद
UNSC की इस रिपोर्ट पर सबसे तीखी प्रतिक्रिया पाकिस्तान की तरफ से आई। रिपोर्ट में जैश-ए-मोहम्मद का नाम शामिल किए जाने पर पाकिस्तान ही अकेला ऐसा देश था, जिसने औपचारिक आपत्ति दर्ज कराई। पाकिस्तान का कहना था कि जैश-ए-मोहम्मद अब निष्क्रिय हो चुका है और उसका कोई सक्रिय नेटवर्क मौजूद नहीं है।
हालांकि UNSC के अन्य सदस्य देशों ने पाकिस्तान के इस दावे को स्वीकार नहीं किया। भारत के रुख को व्यापक समर्थन मिला और रिपोर्ट में JeM का जिक्र बरकरार रखा गया। यह स्थिति पाकिस्तान के लिए कूटनीतिक झटके की तरह देखी जा रही है, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय मंच पर उसका विरोध अलग-थलग पड़ता नजर आया।
भारत को मिली कूटनीतिक बढ़त
UNSC की रिपोर्ट भारत के लिए रणनीतिक और कूटनीतिक दोनों ही नजरिए से अहम मानी जा रही है। लंबे समय से भारत यह आरोप लगाता रहा है कि पाकिस्तान अपनी जमीन का इस्तेमाल आतंकवादी संगठनों को पनाह देने के लिए करता है। अब UNSC की आधिकारिक रिपोर्ट में लाल किला हमले का जिक्र भारत के दावों को अंतरराष्ट्रीय वैधता देता है।
BLA मुद्दे पर पाकिस्तान को दूसरा झटका
UNSC की रिपोर्ट में पाकिस्तान को सिर्फ जैश-ए-मोहम्मद के मुद्दे पर ही नहीं, बल्कि बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) के मामले में भी निराशा हाथ लगी है। पाकिस्तान की कोशिश थी कि BLA को तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) से जोड़कर उसे अल-कायदा या ISIL जैसे आतंकी संगठनों से संबंधित दिखाया जाए।
पाकिस्तान चाहता था कि इस आधार पर BLA को UNSC की 1267 प्रतिबंध सूची में शामिल किया जाए। हालांकि रिपोर्ट में इस तर्क को स्वीकार नहीं किया गया। UNSC की रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि कुछ सदस्य देशों का मानना है कि BLA का न तो अल-कायदा से कोई सीधा संबंध है और न ही ISIL से।
CPEC पर हमले का जिक्र
UNSC की रिपोर्ट में यह जरूर माना गया है कि BLA ने चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (China-Pakistan Economic Corridor – CPEC) से जुड़े एक काफिले पर घात लगाकर हमला किया था। इस हमले में 32 पाकिस्तानी सैनिकों की मौत हुई थी। इसके बावजूद रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया गया है कि BLA को वैश्विक आतंकी संगठनों के साथ जोड़ने के पर्याप्त सबूत नहीं हैं।










