यूपी में 21.5 करोड़ के मुआवजे पर रोक, NH-119 की जमीन रिकॉर्ड में निकली रेगिस्तान

बिजनौर में NH-119 की जमीन के पुराने रिकॉर्ड में कई हिस्से रेगिस्तान दर्ज मिले। जांच के बाद 21.5 करोड़ रुपये का मुआवजा रोककर NHAI को राशि लौटाई गई।

बिजनौर में मेरठ-पौड़ी NH-119 के लिए अधिग्रहित जमीन के राजस्व रिकॉर्ड की जांच में कई हिस्से रेगिस्तान दर्ज मिले। मामला सामने आने के बाद 21.5 करोड़ रुपये NHAI को वापस कर दिए गए और मुआवजा वितरण रोक दिया गया।

बिजनौर: मेरठ-पौड़ी राष्ट्रीय राजमार्ग-119 के लिए अधिग्रहित जमीन के मुआवजे में बड़ी अनियमितता सामने आने के बाद करीब 21.5 करोड़ रुपये का भुगतान रोक दिया गया। नवलपुर और खेड़की हेमराज गांव की भूमि की 1359 फसली के रिकॉर्ड से जांच की गई तो कई हिस्से रेगिस्तान की श्रेणी में दर्ज मिले। शिकायत के बाद जांच शुरू हुई और विशेष भूमि अध्यापित अधिकारी ने राशि NHAI को वापस कर दी।

21.5 करोड़ रुपये का मुआवजा भुगतान रुका

बिजनौर में मेरठ-पौड़ी राष्ट्रीय राजमार्ग-119 के लिए अधिग्रहित जमीन के मुआवजे से जुड़ा मामला सामने आने के बाद प्रशासन ने करीब 21.5 करोड़ रुपये के भुगतान को रोक दिया है। जांच में अधिग्रहित भूमि के कई हिस्से पुराने राजस्व रिकॉर्ड में रेगिस्तान की श्रेणी में दर्ज पाए गए। मामला सामने आने के बाद विशेष भूमि अध्यापित अधिकारी ने मुआवजे के लिए प्राप्त रकम राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण यानी NHAI को वापस कर दी।

फिलहाल संबंधित भूमि के मुआवजे का वितरण अटका हुआ है। प्रशासनिक स्तर पर रिकॉर्ड और जमीन की स्थिति को लेकर जांच और कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।

शिकायत के बाद शुरू हुई जमीन की जांच

NHAI ने मेरठ-पौड़ी राष्ट्रीय राजमार्ग-119 के निर्माण के लिए बिजनौर-बैराज मार्ग पर स्थित नवलपुर और खेड़की हेमराज गांव की जमीन का अधिग्रहण किया था। नवलपुर में करीब 9.695 हेक्टेयर और खेड़की हेमराज में लगभग 6.120 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहित की गई थी।

मुआवजा बांटने की प्रक्रिया शुरू होने से पहले एक व्यक्ति ने तत्कालीन जिलाधिकारी अंकित अग्रवाल के सामने शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में आरोप लगाया गया कि कुछ लोग कथित तौर पर सरकारी जमीन को अपनी बताकर उसके बदले मुआवजा हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं।

शिकायत को गंभीरता से लेते हुए तत्कालीन जिलाधिकारी के निर्देश पर दोनों गांवों में अधिग्रहित जमीन के राजस्व रिकॉर्ड की जांच कराई गई। जांच के दौरान 1359 फसली के अभिलेखों में संबंधित भूमि के कई हिस्से रेगिस्तान के रूप में दर्ज पाए गए।

राजस्व रिकॉर्ड में जमीन की श्रेणी बनी बड़ा सवाल

जांच में सामने आए रिकॉर्ड के बाद जमीन की वास्तविक स्थिति और उसकी श्रेणी को लेकर सवाल खड़े हुए। सहायक अभिलेख अधिकारी के स्तर पर मामले की सुनवाई हुई। इसके बाद संबंधित जमीन को रिकॉर्ड में उसकी मूल श्रेणी में दर्ज करने के आदेश दिए गए।

प्रशासनिक कार्रवाई के बाद जमीन की प्रविष्टियों में भी बदलाव किया गया है। हालांकि, मुआवजे के वितरण से पहले रिकॉर्ड की स्थिति सामने आने के कारण पूरी प्रक्रिया फिलहाल रोक दी गई है।

विशेष भूमि अध्यापित अधिकारी वंदना कुशवाह ने मुआवजे के भुगतान के लिए प्राप्त करीब 21.5 करोड़ रुपये NHAI को वापस कर दिए। इससे अधिग्रहित भूमि के मुआवजे के भुगतान में संभावित वित्तीय अनियमितता को समय रहते रोकने में मदद मिली।

कई गाटा संख्या से जुड़े मामले अदालत में लंबित

नवलपुर गांव की कुछ जमीनों से जुड़े राजस्व विवाद अभी भी सहायक अभिलेख अधिकारी के न्यायालय में लंबित हैं। इनमें गाटा संख्या 10/12, 10/11 मिलजुमला और 10/03 से संबंधित भूमि शामिल है। उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार, इन जमीनों के कुछ हिस्से 1359 फसली में रेगिस्तान की श्रेणी में दर्ज थे।

गाटा संख्या 10/12 में दर्ज करीब 17 बीघा भूमि को लेकर भी सहायक अभिलेख अधिकारी के न्यायालय में कार्रवाई हुई है। सुनवाई के बाद रिकॉर्ड में भूमि की श्रेणी को लेकर आदेश जारी किया गया।

इस पूरे मामले के सामने आने के बाद अब मुआवजा वितरण से पहले जमीन के स्वामित्व, राजस्व रिकॉर्ड और अधिग्रहण से जुड़े दस्तावेजों का सत्यापन महत्वपूर्ण हो गया है। प्रशासन की जांच पूरी होने और लंबित मामलों में स्थिति स्पष्ट होने के बाद ही मुआवजे के भुगतान पर आगे निर्णय लिया जा सकेगा।

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