उत्तर प्रदेश सरकार की मुख्यमंत्री हथकरघा बुनकर समृद्धि योजना के तहत बुनकरों को सोलर लूम, सस्ता कच्चा माल, आसान ऋण और बाजार से जुड़ने की सुविधा मिलेगी। पांच वर्षों में 150 हैंडलूम क्लस्टर विकसित करने का लक्ष्य है।
उत्तर प्रदेश: मुख्यमंत्री हथकरघा बुनकर समृद्धि योजना के जरिए उत्तर प्रदेश के पारंपरिक बुनकरों को आधुनिक तकनीक और बेहतर बाजार उपलब्ध कराने की तैयारी है। योजना के तहत सोलर लूम पर सब्सिडी, सस्ता यार्न, आसान ऋण, ऑनलाइन बिक्री और आधुनिक डिजाइन की ट्रेनिंग जैसी सुविधाएं देने का प्रावधान है। सरकार पांच वर्षों में 150 हैंडलूम क्लस्टर विकसित करने का लक्ष्य लेकर चल रही है।
बुनकरों को आधुनिक सुविधाओं से जोड़ने की तैयारी
उत्तर प्रदेश में हथकरघा उद्योग से जुड़े बुनकरों के सामने महंगे कच्चे माल, बिजली की लागत और बाजार तक सीमित पहुंच जैसी कई चुनौतियां रही हैं। कई स्थानों पर बिचौलियों के कारण बुनकरों को अपने उत्पाद की सही कीमत भी नहीं मिल पाती। इन्हीं समस्याओं को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने मुख्यमंत्री हथकरघा बुनकर समृद्धि योजना पर जोर दिया है।

इस योजना का उद्देश्य पारंपरिक बुनाई को आधुनिक तकनीक से जोड़ने के साथ बुनकरों को सीधे बाजार तक पहुंच उपलब्ध कराना है। इसके तहत तकनीकी सहायता, सब्सिडी, ऋण और प्रशिक्षण जैसी सुविधाओं के जरिए बुनकरों की आय बढ़ाने की कोशिश की जा रही है।
पांच वर्षों में 150 हैंडलूम क्लस्टर बनाने का लक्ष्य
योजना के तहत उत्तर प्रदेश में अगले पांच वर्षों में 150 हैंडलूम क्लस्टर विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। इससे 50 हजार से अधिक बुनकरों को लाभ मिलने की उम्मीद है।
योजना के अनुसार कम से कम 25 बुनकरों का समूह बनाकर उसे फर्म के रूप में पंजीकृत कराया जाएगा। इससे बुनकरों को सामूहिक रूप से सुविधाएं उपलब्ध कराने और उनके उत्पादों को बड़े बाजार तक पहुंचाने में मदद मिलेगी।
सोलर लूम योजना का प्रमुख हिस्सा है। बुनकरों को सौर ऊर्जा से चलने वाले करघों के लिए 80 प्रतिशत तक सब्सिडी देने की व्यवस्था बताई गई है। इससे बिजली के खर्च को कम करने और उत्पादन को अधिक सुविधाजनक बनाने में मदद मिल सकती है।
सस्ता यार्न और आसान लोन से घटेगी लागत
बुनकरों के लिए कच्चे माल की लागत कम करना भी योजना का अहम हिस्सा है। यार्न बैंक और सरकारी सहायता के जरिए बुनाई में इस्तेमाल होने वाला धागा उचित कीमत पर उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जा रही है। इससे उत्पादन लागत में करीब 20 से 30 प्रतिशत तक कमी आने का दावा किया गया है।
इसके अलावा करघा लगाने या कारोबार बढ़ाने के लिए आसान ऋण की सुविधा भी उपलब्ध कराने की योजना है। कम ब्याज दर पर क्रेडिट और लोन की सुविधा मिलने से बुनकरों को अपना काम बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
योजना में बुनकरों को आधुनिक डिजाइन और कंप्यूटर आधारित बुनाई की ट्रेनिंग देने पर भी जोर है। बाजार में बदलते फैशन और ग्राहकों की पसंद के अनुसार नए डिजाइन तैयार करने के लिए बुनकरों और नई पीढ़ी को प्रशिक्षण दिया जाएगा।
ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से सीधे जुड़ेंगे बुनकर
योजना का एक बड़ा उद्देश्य बुनकरों को बिचौलियों पर निर्भरता से बाहर निकालकर सीधे बाजार से जोड़ना है। इसके लिए बुनकरों को ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म और सरकारी GeM पोर्टल से जोड़ने की तैयारी है।
इससे गांवों और छोटे शहरों में तैयार होने वाले हथकरघा उत्पादों को देश के अलग-अलग हिस्सों के साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने का रास्ता खुल सकता है। ऑनलाइन बिक्री के साथ पैकेजिंग और शिपिंग से जुड़ी ट्रेनिंग भी देने की व्यवस्था की जा रही है।
योजना के लिए किन दस्तावेजों की जरूरत होगी?
योजना का लाभ लेने के लिए आवेदक का उत्तर प्रदेश का निवासी होना जरूरी बताया गया है। आवेदन के दौरान आधार कार्ड, बुनकर पहचान पत्र, बैंक पासबुक की कॉपी, पासपोर्ट साइज फोटो और आय प्रमाण पत्र जैसे दस्तावेजों की आवश्यकता हो सकती है।
बुनकर बाहुल्य क्षेत्रों में विभाग की ओर से विशेष पंजीकरण शिविर भी लगाए जाने हैं। इसके अलावा इच्छुक लोग अपने नजदीकी जिला उद्योग केंद्र (DIC) या हथकरघा विभाग के कार्यालय से आवेदन प्रक्रिया की जानकारी ले सकते हैं।








