यूपी ट्रेड शो में 16 तरह का शहद:सरसों के फूल, जामुन, लीची और तुलसी से तैयार होती है, विदेशों तक सप्लाई

ग्रेटर नोएडा के यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में 16 तरह का शहद आकर्षण का केंद्र है। सरसों, जामुन, लीची और तुलसी से तैयार शहद की विदेशों तक सप्लाई होती है।
यूपी ट्रेड शो में 16 तरह का शहद:सरसों के फूल, जामुन, लीची और तुलसी से तैयार होती है, विदेशों तक सप्लाई
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ग्रेटर नोएडा में चल रहे उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो-2026 में इस बार उत्तर प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों के खास उत्पाद लोगों का ध्यान खींच रहे हैं। इन्हीं में शहद की कई किस्में भी शामिल हैं। यहां एक-दो नहीं बल्कि करीब 16 तरह के शहद की चर्चा हो रही है, जिन्हें अलग-अलग फूलों और वनस्पतियों से मधुमक्खियों द्वारा तैयार किया जाता है। सरसों, जामुन, लीची और तुलसी जैसे स्रोतों से मिलने वाले शहद की अपनी अलग खुशबू, स्वाद और रंग बताया जा रहा है। प्राकृतिक उत्पादों की यह विविधता ट्रेड शो में आने वाले खरीदारों और उपभोक्ताओं के लिए आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो का चौथा संस्करण 25 से 29 सितंबर तक ग्रेटर नोएडा के इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट में आयोजित किया जा रहा है।

इस ट्रेड शो में उत्तर प्रदेश के कृषि, खाद्य प्रसंस्करण, वन उत्पाद, एमएसएमई और अन्य क्षेत्रों से जुड़े उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने की कोशिश की जा रही है। आधिकारिक जानकारी के मुताबिक UPITS 2026 में 2,400 से ज्यादा प्रदर्शकों की भागीदारी है और अंतरराष्ट्रीय खरीदारों को भी जोड़ा गया है। आयोजकों के अनुसार इस संस्करण में 85 देशों से 550 से अधिक अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के आने की उम्मीद जताई गई थी। ऐसे में स्थानीय और प्राकृतिक उत्पाद तैयार करने वाले उत्पादकों के लिए अपने सामान को बड़े बाजार तक पहुंचाने का अवसर मिल रहा है।

शहद की खासियत यह है कि इसका स्वाद केवल मधुमक्खियों पर निर्भर नहीं करता, बल्कि मधुमक्खियां जिन फूलों से रस एकत्र करती हैं, उनका भी इसमें असर पड़ता है। सरसों के फूलों वाले क्षेत्र में तैयार शहद का स्वाद और सुगंध अलग हो सकती है, जबकि जामुन या लीची के फूलों से प्राप्त शहद में अलग तरह की विशेषताएं देखने को मिल सकती हैं। इसी तरह तुलसी जैसे पौधों से जुड़े शहद को भी अलग उत्पाद के रूप में पेश किया जा रहा है। यही वजह है कि ट्रेड शो में एक ही नाम के शहद की अलग-अलग किस्में देखकर लोग इनके बारे में जानकारी लेते नजर आ रहे हैं।

सरसों से तैयार शहद विशेष रूप से उन क्षेत्रों से जुड़ा है जहां बड़े पैमाने पर सरसों की खेती होती है। जब सरसों में फूल आते हैं, तो मधुमक्खियां इन फूलों से पराग और रस एकत्र करती हैं। मधुमक्खी पालन से जुड़े उत्पादकों के लिए सरसों की फसल का मौसम शहद उत्पादन के लिहाज से भी महत्वपूर्ण होता है। दूसरी ओर जामुन के फूलों से मिलने वाला शहद अपने अलग स्वाद और सुगंध के कारण बाजार में अलग पहचान बनाने की कोशिश कर रहा है।

लीची वाले क्षेत्रों का शहद भी इस श्रेणी में खास माना जा रहा है। उत्तर प्रदेश और आसपास के क्षेत्रों में लीची उत्पादन वाले इलाकों में मधुमक्खी पालन करने वाले किसान लीची के फूलों के मौसम का इस्तेमाल शहद उत्पादन के लिए करते हैं। लीची के बागों में मधुमक्खियों की मौजूदगी से एक तरफ शहद उत्पादन होता है तो दूसरी तरफ परागण की प्रक्रिया में भी मधुमक्खियों की भूमिका रहती है। इस तरह मधुमक्खी पालन और फल उत्पादन के बीच भी संबंध बनता है।

तुलसी से जुड़ा शहद भी प्राकृतिक उत्पादों की श्रेणी में लोगों की दिलचस्पी बढ़ा रहा है। तुलसी की खुशबू और उसके पारंपरिक उपयोग के कारण इससे जुड़े उत्पादों की मांग बनी रहती है। हालांकि किसी भी शहद को औषधीय उपचार के विकल्प के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए और उसके स्वास्थ्य संबंधी दावों की पुष्टि उत्पाद की गुणवत्ता और प्रमाणित जानकारी के आधार पर ही की जानी चाहिए।

यूपी ट्रेड शो में शहद को केवल खाने-पीने के उत्पाद के तौर पर नहीं बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था और मधुमक्खी पालन से जुड़े रोजगार के उदाहरण के रूप में भी देखा जा रहा है। मधुमक्खी पालन किसानों और छोटे उत्पादकों के लिए अतिरिक्त आय का जरिया बन सकता है। इसके साथ ही पैकेजिंग, प्रोसेसिंग, ब्रांडिंग और बाजार तक पहुंच मिलने पर स्थानीय उत्पादों को बड़े उपभोक्ता वर्ग तक पहुंचाया जा सकता है।

उत्तर प्रदेश के कृषि विदेश व्यापार निदेशालय के पोर्टल पर भी शहद को निर्यात से जुड़े उत्पादों की सूची में शामिल किया गया है। पोर्टल पर शहद के साथ लीची, आम, सरसों और अन्य कृषि उत्पादों के लिए भी निर्यातक विवरण उपलब्ध कराए गए हैं। इससे पता चलता है कि राज्य में कृषि उत्पादों को घरेलू बाजार के साथ विदेशी बाजार से जोड़ने की दिशा में भी काम किया जा रहा है। हालांकि किसी खास शहद की विदेशों में बिक्री या निर्यात की मात्रा अलग-अलग उत्पादक और निर्यातक के हिसाब से अलग हो सकती है।

ट्रेड शो में वनवासियों और प्राकृतिक संसाधनों से जुड़े उत्पादों को भी जगह दी गई है। अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक उत्तर प्रदेश वन विभाग ने जंगलों में रहने वाले समुदायों द्वारा तैयार प्राकृतिक और घरेलू उपयोग के उत्पादों को भी प्रदर्शित किया है, जिनमें शहद और हल्दी जैसे उत्पाद शामिल हैं। इससे स्थानीय स्तर पर तैयार होने वाले प्राकृतिक उत्पादों को उपभोक्ताओं और संभावित खरीदारों तक पहुंचाने का एक मंच मिल रहा है।

शहद की अलग-अलग किस्मों को देखकर उपभोक्ताओं के सामने यह सवाल भी आता है कि आखिर एक ही शहद की इतनी किस्में कैसे बनती हैं। इसका जवाब मधुमक्खियों के भोजन और आसपास मौजूद फूलों की विविधता में छिपा है। मधुमक्खियां जिस क्षेत्र में छत्ते बनाए रखती हैं और जिस मौसम में फूलों से रस एकत्र करती हैं, उससे शहद की विशेषताएं प्रभावित होती हैं। इसलिए मधुमक्खी पालक कई बार छत्तों को ऐसे क्षेत्रों के करीब रखते हैं जहां किसी विशेष फसल या पौधे की पर्याप्त मात्रा में फूल उपलब्ध हों।

किसानों के लिए मधुमक्खी पालन का महत्व केवल शहद उत्पादन तक सीमित नहीं है। मधुमक्खियां फसलों के परागण में भी योगदान देती हैं। फल, सब्जी और कई अन्य फसलों के उत्पादन में परागण की प्रक्रिया महत्वपूर्ण होती है। इसलिए मधुमक्खी पालन को कृषि गतिविधियों से जोड़कर देखने पर किसान की आय और खेती की उत्पादकता दोनों से जुड़े पहलू सामने आते हैं।

यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो जैसे आयोजन इस तरह के उत्पादों के लिए बाजार से जुड़ने का अवसर उपलब्ध कराते हैं। आधिकारिक तौर पर इस आयोजन में कृषि उत्पाद, ODOP, फूड प्रोसेसिंग, MSME और कई अन्य सेक्टर शामिल हैं। आयोजन का उद्देश्य उत्तर प्रदेश के निर्माताओं, निर्यातकों, एमएसएमई और कारोबारियों को घरेलू और अंतरराष्ट्रीय खरीदारों से जोड़ना है।

इस बार ट्रेड शो में विदेशी खरीदारों की भागीदारी भी महत्वपूर्ण है। फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गनाइजेशन के अनुसार UPITS 2026 में 1,000 से अधिक भारतीय विक्रेताओं, निर्यातकों, निर्माताओं और MSME को 600 से अधिक विदेशी खरीदारों से जोड़ने की योजना है। ऐसे में शहद जैसे कृषि और प्राकृतिक उत्पादों को भी नए बाजारों में पहुंच बनाने का अवसर मिल सकता है।

विदेशी बाजार तक किसी खाद्य उत्पाद को पहुंचाने के लिए केवल उत्पाद की लोकप्रियता पर्याप्त नहीं होती। गुणवत्ता, पैकेजिंग, खाद्य सुरक्षा, लेबलिंग, निर्यात मानकों और संबंधित देश के नियमों का पालन भी जरूरी होता है। इसलिए ट्रेड शो में खरीदारों और उत्पादकों के बीच होने वाली कारोबारी बातचीत आगे चलकर किस तरह के समझौतों और ऑर्डर में बदलती है, यह संबंधित उत्पादकों की क्षमता और बाजार की मांग पर निर्भर करेगा।

शहद की इन किस्मों के सामने आने से यह भी पता चलता है कि उत्तर प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में पारंपरिक कृषि उत्पादों के साथ वैल्यू एडेड और प्राकृतिक उत्पादों का बाजार बढ़ाने की संभावनाएं हैं। अगर किसान या उत्पादक केवल कच्चे कृषि उत्पाद की बिक्री के बजाय मधुमक्खी पालन, प्रोसेसिंग, पैकेजिंग और ब्रांडिंग से जुड़ते हैं तो उत्पाद को अलग पहचान मिल सकती है। हालांकि इसके लिए प्रशिक्षण, गुणवत्ता नियंत्रण और बाजार की सही जानकारी भी जरूरी है।

ग्रेटर नोएडा में चल रहा यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो ऐसे ही स्थानीय उत्पादों को बड़े बाजार के सामने लाने का मंच बना हुआ है। एक तरफ जहां बड़े उद्योग और निर्यातक अपने उत्पाद प्रदर्शित कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ प्राकृतिक शहद, वन उत्पाद और स्थानीय स्तर पर तैयार सामान भी खरीदारों का ध्यान खींच रहे हैं। सरसों, जामुन, लीची और तुलसी जैसे अलग-अलग स्रोतों से जुड़े शहद की मौजूदगी ने इस हिस्से को खास बना दिया है।

कुल मिलाकर यूपी ट्रेड शो में 16 तरह के शहद की मौजूदगी उत्तर प्रदेश के कृषि और प्राकृतिक उत्पादों की विविधता को दिखाती है। अलग-अलग फूलों और पौधों से तैयार शहद स्वाद और सुगंध में विविधता देता है, जबकि मधुमक्खी पालन ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़ा अतिरिक्त कारोबार भी बन सकता है। ट्रेड शो के जरिए इन उत्पादों को देश के साथ विदेशी खरीदारों तक पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। अब इन उत्पादों को मिलने वाले कारोबारी ऑर्डर और निर्यात के वास्तविक आंकड़े आने वाले समय में इनकी बाजार क्षमता की तस्वीर और स्पष्ट करेंगे।

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