उत्तराखंड में 15 अगस्त से महज दो दिन पहले पुलिस पर फायरिंग की घटना से हड़कंप मच गया। पुलिस की टीम इलाके में चेकिंग अभियान चला रही थी। इसी दौरान संदिग्ध गतिविधि के आधार पर एक वाहन को रोकने की कोशिश की गई। आरोप है कि वाहन में सवार बदमाशों ने पुलिस टीम पर गोलियां चला दीं और मौके से भागने का प्रयास किया।
पुलिस के मुताबिक, आरोपी उत्तर प्रदेश से उत्तराखंड में गोकशी की वारदात को अंजाम देने के इरादे से पहुंचे थे। चेकिंग के दौरान पुलिस की नजर संदिग्ध गतिविधियों पर पड़ी तो उन्हें रोकने का प्रयास किया गया। इसके बाद आरोपियों ने पुलिसकर्मियों पर फायरिंग कर दी। पुलिस ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए दोनों आरोपियों को दबोच लिया।
घटना के बाद पुलिस ने इलाके में सघन तलाशी अभियान चलाया। स्वतंत्रता दिवस से ठीक पहले हुई इस वारदात को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था को और कड़ा कर दिया गया है। संवेदनशील इलाकों में पुलिस की गश्त बढ़ाने के साथ संदिग्ध वाहनों की जांच भी की जा रही है।
बताया जा रहा है कि पुलिस टीम नियमित चेकिंग कर रही थी। इसी दौरान संदिग्ध वाहन को देखकर पुलिसकर्मियों ने उसे रोकने का इशारा किया। वाहन रोकने के बजाय उसमें मौजूद लोगों ने पुलिस पर गोली चला दी। अचानक हुई फायरिंग से पुलिसकर्मियों में भी अफरा-तफरी मच गई।
इसके बाद पुलिस ने आरोपियों का पीछा किया। पुलिस की कार्रवाई के दौरान दोनों संदिग्धों को पकड़ लिया गया। उनके कब्जे से हथियार और अन्य सामान बरामद किए जाने की बात सामने आई है। हालांकि बरामद सामान और आरोपियों के खिलाफ दर्ज धाराओं की पूरी जानकारी पुलिस की आधिकारिक कार्रवाई के बाद स्पष्ट होगी।
जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी उत्तर प्रदेश से उत्तराखंड पहुंचे थे। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि दोनों किसके संपर्क में थे और उन्हें गोकशी के लिए किस स्थान पर जाना था। उनके नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
स्वतंत्रता दिवस से पहले पुलिस पहले से ही विशेष सतर्कता बरत रही थी। 15 अगस्त को देखते हुए उत्तराखंड के अलग-अलग हिस्सों में संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। सार्वजनिक स्थानों, बाजारों, मुख्य सड़कों और सीमावर्ती इलाकों में चेकिंग बढ़ाई गई है।
इसी सुरक्षा अभियान के दौरान पुलिस को यह संदिग्ध गतिविधि मिली। अधिकारियों का कहना है कि स्वतंत्रता दिवस के मद्देनजर किसी भी संदिग्ध व्यक्ति या वाहन को नजरअंदाज नहीं किया जा रहा है। वाहनों की जांच के साथ उनके कागजात और सवार लोगों की जानकारी भी देखी जा रही है।
पुलिस पर फायरिंग के बाद मामले को सामान्य अपराध से अलग गंभीरता से लिया जा रहा है। पुलिसकर्मियों पर गोली चलाने के आरोप में आरोपियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की तैयारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि उनके पास हथियार कहां से आए।
गोकशी की आशंका को लेकर भी पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। आरोपियों से पूछताछ कर यह पता लगाया जा रहा है कि उत्तराखंड में उनका उद्देश्य क्या था और क्या इससे पहले भी वे इस तरह की गतिविधियों में शामिल रहे हैं। उनके आपराधिक रिकॉर्ड को भी संबंधित राज्यों से खंगाला जा सकता है।
घटना के बाद स्थानीय स्तर पर भी पुलिस की सक्रियता बढ़ गई है। पुलिस ने लोगों से संदिग्ध गतिविधि या अनजान लोगों की आवाजाही की जानकारी तत्काल पुलिस को देने की अपील की है। स्वतंत्रता दिवस को देखते हुए किसी भी तरह की अफवाह से बचने और बिना पुष्टि के जानकारी सोशल मीडिया पर साझा नहीं करने की सलाह भी दी जा सकती है।
पुलिस अब आरोपियों से पूछताछ के आधार पर आगे की कार्रवाई कर रही है। अगर जांच में उनके साथ किसी अन्य व्यक्ति के जुड़े होने की जानकारी सामने आती है तो पुलिस उस व्यक्ति तक भी पहुंचने का प्रयास करेगी।
उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश की सीमा से लगे क्षेत्रों में अपराधियों की आवाजाही पर निगरानी पहले से ही महत्वपूर्ण रही है। दोनों राज्यों की पुलिस समय-समय पर संयुक्त रूप से भी कार्रवाई करती है। ऐसे में इस घटना के बाद सीमावर्ती इलाकों में वाहन जांच और गश्त को और मजबूत किए जाने की संभावना है।
फिलहाल पुलिस की जांच का मुख्य फोकस फायरिंग की घटना, आरोपियों के हथियार, उनके उत्तर प्रदेश से उत्तराखंड आने के उद्देश्य और कथित गोकशी की योजना पर है। आरोपियों से पूछताछ के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि इस मामले में उनका नेटवर्क कितना बड़ा था और वे पहले भी ऐसी घटनाओं में शामिल रहे हैं या नहीं।
कुल मिलाकर, स्वतंत्रता दिवस से दो दिन पहले उत्तराखंड में चेकिंग के दौरान पुलिस टीम पर फायरिंग से हड़कंप मच गया। पुलिस के अनुसार उत्तर प्रदेश से आए दो बदमाश कथित तौर पर गोकशी की वारदात के इरादे से पहुंचे थे। चेकिंग के दौरान उन्होंने पुलिस पर गोलियां चलाईं, जिसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए दोनों को पकड़ लिया। मामले में आरोपियों के नेटवर्क और हथियारों के स्रोत की जांच जारी है।











