श्री माता वैष्णो देवी मेडिकल कॉलेज की एमबीबीएस सीटों को लेकर पिछले 45 दिनों से चल रहा आंदोलन भले ही राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) द्वारा कॉलेज की मान्यता रद्द किए जाने के बाद समाप्त हो गया हो, लेकिन इससे जुड़ा विवाद अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।
जम्मू: श्री माता वैष्णो देवी संघर्ष समिति ने एमबीबीएस सीटों के मुद्दे पर पिछले 45 दिनों से चल रहे आंदोलन की सफलता पर सभी का आभार जताते हुए स्पष्ट किया है कि उनका संघर्ष अभी समाप्त नहीं हुआ है। समिति ने कहा कि जम्मू के साथ हो रहे भेदभाव के खिलाफ आवाज उठाने के बाद अब उनकी अगली लड़ाई श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड के संविधान में संशोधन को लेकर होगी, ताकि हिंदुओं के चढ़ावे का किसी भी प्रकार से दुरुपयोग न हो।
आंदोलन की सफलता पर विजय रैली
एनएमसी के फैसले के बाद बुधवार को जम्मू में संघर्ष समिति और उससे जुड़े हिंदू संगठनों ने विजय रैली निकालकर आंदोलन की सफलता का जश्न मनाया। समिति के सदस्यों ने कहा कि यह फैसला जम्मू क्षेत्र के साथ कथित भेदभाव के खिलाफ एक बड़ी जीत है। युवा राजपूत सभा, बजरंग दल सहित कई हिंदू संगठनों ने इसे “जनभावनाओं की जीत” करार दिया।
संघर्ष समिति के संयोजक, सेवानिवृत्त कर्नल सुखवीर सिंह मनकोटिया ने जम्मू के गीता भवन परेड में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि 45 दिनों तक चला यह आंदोलन जन-समर्थन और एकजुटता का परिणाम है। उन्होंने दावा किया कि इस दौरान देशभर के सनातनी संगठनों और आम श्रद्धालुओं का उन्हें व्यापक समर्थन मिला।

क्या है समिति की नई मांग?
संघर्ष समिति ने स्पष्ट किया कि उनका अगला प्रमुख मुद्दा श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड के संविधान में संशोधन है। समिति का कहना है कि मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं द्वारा दिया गया चढ़ावा केवल सनातन धर्म और उससे जुड़ी गतिविधियों के लिए ही उपयोग होना चाहिए। उनका आरोप है कि वर्तमान व्यवस्था में चढ़ावे के उपयोग को लेकर पारदर्शिता और धार्मिक मर्यादाओं को लेकर सवाल उठते रहे हैं।
मनकोटिया ने कहा, हमारा उद्देश्य किसी संस्था या प्रशासन के खिलाफ संघर्ष करना नहीं है, बल्कि माता वैष्णो देवी के करोड़ों भक्तों की आस्था और सनातन परंपराओं की रक्षा करना है। इसके लिए श्राइन बोर्ड के संविधान में आवश्यक संशोधन जरूरी हैं।
केंद्र सरकार का जताया आभार
संघर्ष समिति ने इस पूरे घटनाक्रम में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा का विशेष रूप से आभार व्यक्त किया। समिति का कहना है कि एनएमसी द्वारा मेडिकल कॉलेज की मान्यता रद्द किया जाना उन अनियमितताओं की पुष्टि करता है, जिनकी ओर आंदोलन के दौरान ध्यान दिलाया गया था।
मनकोटिया ने कहा कि केंद्र में एक “संवेदनशील सरकार” है, जो धार्मिक आस्था और जनभावनाओं को समझती है। उन्होंने इसे न्याय की जीत बताते हुए कहा कि इससे भविष्य में ऐसी अनियमितताओं पर रोक लगेगी। संघर्ष समिति ने जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा से भी अपील की है कि वे श्राइन बोर्ड को स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करें। समिति की मांग है कि बोर्ड के अंतर्गत आने वाले सभी संस्थानों में सनातन धर्म की परंपराओं, संस्कृति और धार्मिक मूल्यों का पूर्ण सम्मान सुनिश्चित किया जाए।
समिति का कहना है कि वे केवल विरोध की राजनीति नहीं करना चाहते, बल्कि प्रशासन के साथ सहयोग करते हुए ऐसी व्यवस्था बनाना चाहते हैं, जिससे श्रद्धालुओं की भावनाओं को ठेस न पहुंचे।











