वाराणसी में नशे के कारोबार से जुड़ा एक बड़ा मामला सामने आया है। पुलिस ने 55 किलो गांजा बरामद कर तस्करी के नेटवर्क का खुलासा किया है। बताया जा रहा है कि गांजा उड़ीसा से लाकर पूर्वांचल के अलग-अलग इलाकों में सप्लाई करने की तैयारी थी। तस्करों ने पुलिस से बचने के लिए गांजे को एक सीक्रेट चेंबर में छिपाकर रखा था। बरामदगी के बाद पुलिस ने पूरे नेटवर्क की जांच शुरू कर दी है।
पुलिस की कार्रवाई के बाद मामले की तुलना फिल्म 'पुष्पा' में दिखाए गए तस्करी के तरीके से की जा रही है। हालांकि वास्तविक घटना में पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इतनी बड़ी मात्रा में गांजा वाराणसी तक कैसे पहुंचा और इसके पीछे कौन-कौन लोग काम कर रहे थे।
जांच के दौरान पुलिस को गांजा छिपाकर रखने के लिए बनाए गए गुप्त स्थान की जानकारी मिली। तलाशी के दौरान वहां से बड़ी मात्रा में गांजा बरामद किया गया। करीब 55 किलो गांजा मिलने के बाद पुलिस अधिकारियों के भी होश उड़ गए।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि गांजे की खेप उड़ीसा से पूर्वांचल लाई गई थी। इसके बाद इसे वाराणसी और आसपास के जिलों में सप्लाई किए जाने की तैयारी थी। पुलिस अब उस व्यक्ति या गिरोह की तलाश कर रही है जिसने गांजे की खेप उपलब्ध कराई थी।
इतनी बड़ी मात्रा में नशीले पदार्थ की बरामदगी से साफ है कि मामला सिर्फ स्थानीय स्तर पर नशीले पदार्थ रखने तक सीमित नहीं है। पुलिस को आशंका है कि इसके पीछे एक संगठित नेटवर्क काम कर रहा हो सकता है। इसी वजह से जांच को आगे बढ़ाते हुए सप्लाई चेन से जुड़े लोगों की जानकारी जुटाई जा रही है।
पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि गांजा उड़ीसा के किस इलाके से लाया गया था। इसके लिए आरोपियों से पूछताछ के साथ-साथ यात्रा और संपर्क से जुड़े रिकॉर्ड भी खंगाले जा सकते हैं। खेप को वाराणसी तक पहुंचाने में किन लोगों ने मदद की, इसकी जानकारी भी जुटाई जा रही है।
जांच में यह भी पता लगाया जा रहा है कि 55 किलो गांजा किस-किस इलाके में सप्लाई किया जाना था। वाराणसी के अलावा पूर्वांचल के दूसरे जिलों में भी इसके खरीदार या सप्लायर होने की आशंका है। पुलिस अब इस नेटवर्क के स्थानीय संपर्कों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।
सीक्रेट चेंबर में गांजा छिपाने का तरीका पुलिस के लिए भी जांच का अहम बिंदु है। इससे यह संकेत मिलता है कि तस्करों ने पुलिस की नजर से बचने के लिए पहले से तैयारी कर रखी थी। अब पुलिस यह पता कर रही है कि इस गुप्त स्थान का इस्तेमाल पहले भी नशीले पदार्थ छिपाने के लिए किया गया था या नहीं।
बरामद गांजे को पुलिस ने कब्जे में लेकर नियमानुसार कार्रवाई शुरू कर दी है। इसकी मात्रा और अन्य विवरण को केस की जांच में शामिल किया जा रहा है। नशीले पदार्थ की बरामदगी के आधार पर संबंधित धाराओं में कार्रवाई की जा रही है।
पुलिस आरोपियों से पूछताछ कर यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस कारोबार से उन्हें कितना मुनाफा होता था और गांजे की सप्लाई किन लोगों तक की जाती थी। यदि जांच में दूसरे जिलों के लोगों की भूमिका सामने आती है तो वहां भी पुलिस टीम कार्रवाई कर सकती है।
इस मामले में पुलिस की जांच सिर्फ बरामदगी तक सीमित नहीं रहने वाली है। अधिकारियों का फोकस अब पूरे सप्लाई नेटवर्क को पकड़ने पर है। उड़ीसा से खेप भेजने वाले, उसे वाराणसी तक पहुंचाने वाले और स्थानीय स्तर पर इसे खपाने वाले लोगों की पहचान की जा रही है।
पूर्वांचल में नशीले पदार्थों की तस्करी को लेकर पुलिस लगातार कार्रवाई कर रही है। बड़ी मात्रा में गांजे की बरामदगी को इसी अभियान की एक अहम कार्रवाई माना जा रहा है। पुलिस का कहना है कि नशे के कारोबार में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल 55 किलो गांजे की बरामदगी के बाद पुलिस पूरे मामले की कड़ियां जोड़ रही है। सीक्रेट चेंबर से मिली इस खेप ने तस्करी के नेटवर्क को लेकर कई सवाल खड़े किए हैं। अब जांच से यह साफ होगा कि इस कारोबार का मुख्य संचालक कौन है और उड़ीसा से वाराणसी तक इस नेटवर्क की जड़ें कितनी गहरी हैं।










