सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को केरल हाई कोर्ट के उस निर्देश पर रोक हटा दी, जिसमें केरल राज्य वक्फ बोर्ड को एक सरकारी अधिकारी की निगरानी में काम करने का आदेश दिया गया था।
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने केरल वक्फ बोर्ड को बड़ी राहत देते हुए केरल हाई कोर्ट के उस अंतरिम निर्देश को हटा दिया है, जिसके तहत बोर्ड को राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में काम करने के लिए कहा गया था। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के आदेश के अन्य हिस्सों पर रोक नहीं लगाई है। शीर्ष अदालत ने हाई कोर्ट से मामले में सभी संबंधित पक्षों को सुनने के बाद जल्द फैसला लेने को कहा है।
यह मामला केरल वक्फ बोर्ड की ओर से दायर अपील पर सुप्रीम कोर्ट के सामने आया था। बोर्ड ने हाई कोर्ट के अंतरिम आदेश के उस हिस्से को चुनौती दी थी, जिसमें उसके कामकाज पर कुछ प्रतिबंध लगाए गए थे।
क्या था केरल हाई कोर्ट का आदेश?
केरल हाई कोर्ट ने अपने अंतरिम आदेश में वक्फ बोर्ड के कामकाज पर कुछ सीमाएं लगाई थीं। आदेश के तहत बोर्ड को केरल सरकार के संयुक्त सचिव या अतिरिक्त सचिव की निगरानी में काम करने का निर्देश दिया गया था। हाई कोर्ट ने यह व्यवस्था उस समय लागू की थी, जब बोर्ड में दो गैर-मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति से संबंधित मुद्दा अदालत के सामने था। इसके अलावा बोर्ड को कुछ बड़े नीतिगत फैसले लेने और पूंजीगत खर्च से जुड़े निर्णय करने से भी रोका गया था।
वक्फ बोर्ड ने इस आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। बोर्ड की दलील थी कि अंतरिम आदेश के कारण उसके नियमित कामकाज पर गंभीर असर पड़ रहा है और वह प्रभावी तरीके से अपने प्रशासनिक कार्य नहीं कर पा रहा है।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने मामले की सुनवाई की। पीठ में जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल पंचोली भी शामिल थे। सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के आदेश के उस हिस्से को हटाने का फैसला किया, जिसमें वक्फ बोर्ड को राज्य सरकार के संयुक्त सचिव या अतिरिक्त सचिव की निगरानी में काम करने के लिए कहा गया था।
अदालत ने स्पष्ट किया कि संबंधित अधिकारी बोर्ड के सदस्य के रूप में अपनी भूमिका जारी रखेंगे। हालांकि, उन्हें बोर्ड के पूरे कामकाज की निगरानी करने का अलग से निर्देश लागू नहीं रहेगा। सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के आदेश के बाकी हिस्सों पर रोक नहीं लगाई। इसका मतलब है कि आदेश के अन्य निर्देश फिलहाल प्रभावी रहेंगे, जब तक कि हाई कोर्ट मामले पर आगे सुनवाई करते हुए कोई नया आदेश जारी नहीं करता।
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हाई कोर्ट से जल्द सुनवाई का निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि यह मामला जल्द ही केरल हाई कोर्ट के सामने आने वाला है। शीर्ष अदालत ने हाई कोर्ट से कहा कि वह सभी संबंधित पक्षों को निष्पक्ष सुनवाई का अवसर देने के बाद मामले पर जल्द फैसला करे। इस तरह सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल केवल सरकारी निगरानी से जुड़े निर्देश को हटाया है। मामले के अन्य पहलुओं पर अंतिम फैसला हाई कोर्ट की आगे की सुनवाई के बाद ही स्पष्ट होगा।
सुनवाई के दौरान केरल सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता जयदीप गुप्ता पेश हुए। उन्होंने अदालत को बताया कि हाई कोर्ट का आदेश अंतरिम प्रकृति का है और इस स्तर पर सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है। सरकार की दलील पर सुप्रीम कोर्ट ने यह सवाल उठाया कि केवल अंतरिम व्यवस्था के कारण बोर्ड के कामकाज को पूरी तरह सीमित या निष्क्रिय स्थिति में क्यों रखा जाए। इसके बाद शीर्ष अदालत ने सरकारी निगरानी वाले निर्देश को हटाने का फैसला किया।
वक्फ बोर्ड ने जताई थी कामकाज प्रभावित होने की चिंता
इससे पहले 17 जुलाई को वक्फ बोर्ड की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता वी. चितांबरेश ने सुप्रीम कोर्ट से मामले की तत्काल सुनवाई का अनुरोध किया था। उन्होंने दलील दी थी कि बिना दूसरे पक्ष को पर्याप्त नोटिस दिए जारी किए गए अंतरिम आदेश के कारण बोर्ड का कामकाज लगभग ठप हो गया है। वक्फ बोर्ड की ओर से यह भी बताया गया कि इसी तरह के एक अन्य मामले में सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु वक्फ बोर्ड को अंतरिम राहत प्रदान की थी। इसी आधार पर केरल वक्फ बोर्ड ने भी तत्काल राहत की मांग की थी।









