West Bengal Bypolls 2026: ममता गुट ने जारी किया नया फुटबॉल खिलाड़ी चुनाव चिन्ह, जानें पूरा विवाद

West Bengal Bypolls 2026: चुनाव आयोग ने ममता बनर्जी गुट को ‘Mamata All India Trinamool Congress’ नाम और ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ चुनाव चिन्ह दिया है। पुराने TMC नाम

नंदीग्राम और रेजीनगर उपचुनाव से करीब दो हफ्ते पहले टीएमसी के ममता बनर्जी गुट ने नए नाम के साथ अपना नया चुनाव चिन्ह जारी किया है। सूत्रों के अनुसार, ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस के नए चुनाव चिन्ह में फुटबॉल खिलाड़ी का डिजाइन शामिल किया गया है, जिसे ममता बनर्जी ने खुद तैयार किया है।

West Bengal Bypolls 2026: पश्चिम बंगाल में नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा उपचुनाव से पहले तृणमूल कांग्रेस के ममता बनर्जी गुट ने अपनी नई चुनावी पहचान को सामने रखा है। गुट को चुनाव आयोग की ओर से अस्थायी तौर पर ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ चुनाव चिन्ह आवंटित किया गया है। 21 सितंबर को इस नए प्रतीक को सार्वजनिक किया गया।

यह बदलाव तृणमूल कांग्रेस के नाम और उसके पारंपरिक ‘घास और फूल’ चुनाव चिन्ह को लेकर चल रहे विवाद के बीच हुआ है। चुनाव आयोग ने 17 सितंबर को अंतरिम व्यवस्था के तहत दोनों प्रतिद्वंद्वी गुटों को पुराने पार्टी नाम और आरक्षित चुनाव चिन्ह के इस्तेमाल से रोक दिया था। आयोग के मुताबिक, दोनों पक्ष खुद को वास्तविक तृणमूल कांग्रेस बताते हुए दावा कर रहे थे और आगामी उपचुनावों से पहले इस विवाद का अंतिम समाधान संभव नहीं था।

ममता गुट को मिला नया नाम और चुनाव चिन्ह

चुनाव आयोग के अंतरिम फैसले के बाद ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम दिया गया। इसके साथ चुनावी प्रतीक के तौर पर फुटबॉल खिलाड़ी का चिन्ह आवंटित किया गया है। वहीं, प्रतिद्वंद्वी गुट को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ नाम और लिफाफा चुनाव चिन्ह दिया गया है। दोनों नाम और प्रतीक फिलहाल आगामी चुनावों के लिए अंतरिम व्यवस्था का हिस्सा हैं। इसका मतलब है कि पार्टी के मूल नाम और पारंपरिक प्रतीक पर अंतिम स्थिति अभी तय नहीं हुई है।

नया लोगो मतदाताओं तक पहुंचाने की तैयारी

ममता गुट ने अब नए चुनाव चिन्ह को मतदाताओं के बीच पहचान दिलाने के लिए प्रचार शुरू किया है। पार्टी से जुड़े लोगों के मुताबिक, नेताओं, पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं से अपने डिजिटल और सार्वजनिक प्लेटफॉर्म के जरिए नए प्रतीक को लोगों तक पहुंचाने को कहा गया है। उपचुनाव में चुनाव चिन्ह की पहचान महत्वपूर्ण होती है, खासकर ऐसे समय में जब किसी राजनीतिक संगठन को अचानक नया नाम और प्रतीक लेकर मतदाताओं के सामने जाना पड़े। 

इस वजह से ममता गुट के लिए नए फुटबॉल खिलाड़ी वाले प्रतीक को मतदाताओं तक पहुंचाना चुनावी तैयारी का एक प्रमुख हिस्सा बन गया है। नए लोगो के डिजाइन में पार्टी के पारंपरिक रंगों का इस्तेमाल किए जाने की बात भी सामने आई है।

क्यों फ्रीज किया गया तृणमूल का पुराना नाम और चिन्ह?

तृणमूल कांग्रेस के भीतर दो गुटों के बीच पार्टी के नाम, संगठन और चुनाव चिन्ह को लेकर विवाद सामने आया। दोनों पक्षों ने पार्टी पर अपना दावा किया। चुनाव आयोग ने 17 सितंबर को दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अंतरिम व्यवस्था लागू की। इसके तहत ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और घास-फूल वाला पारंपरिक चुनाव चिन्ह दोनों गुटों के लिए फिलहाल फ्रीज कर दिया गया। आयोग ने दोनों पक्षों को वैकल्पिक नाम और उपलब्ध चुनाव चिन्हों में से विकल्प देने को कहा। इसके बाद अलग-अलग पहचान आवंटित की गई।

नंदीग्राम और रेजीनगर में 6 अक्टूबर को उपचुनाव

पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर 6 अक्टूबर 2026 को उपचुनाव होना है। चुनाव से कुछ ही समय पहले पार्टी के नाम और चिन्ह में बदलाव होने से दोनों निर्वाचन क्षेत्रों में चुनावी प्रक्रिया का यह पहलू खास महत्व रखता है। नंदीग्राम में ममता गुट की उम्मीदवार संचिता प्रधान डे ने नामांकन वापस ले लिया। 

रेजीनगर में ममता गुट के उम्मीदवार रबीउल आलम चौधरी से जुड़ा नामांकन वापस लेने और बाद में फैसला बदलने का घटनाक्रम भी सामने आया। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने सुरक्षा और चुनाव प्रचार से जुड़ी चिंताओं का हवाला दिया था और बाद में चुनाव मैदान में बने रहने की बात कही।

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