कौन हैं पूजा पाल, जिन्हें भाजपा ने बनाया प्रदेश उपाध्यक्ष 10 महीने पहले सपा से निकाली गईं, पति के हत्यारे के खिलाफ लड़कर बनीं पहचान

भाजपा ने पूजा पाल को उत्तर प्रदेश का प्रदेश उपाध्यक्ष बनाया है। जानिए उनका राजनीतिक सफर, सपा से निष्कासन और पति राजू पाल हत्याकांड से जुड़ी पूरी कहानी।
कौन हैं पूजा पाल, जिन्हें भाजपा ने बनाया प्रदेश उपाध्यक्ष 10 महीने पहले सपा से निकाली गईं, पति के हत्यारे के खिलाफ लड़कर बनीं पहचान
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उत्तर प्रदेश भाजपा के नए संगठन में बड़ा बदलाव करते हुए Pooja Pal को प्रदेश उपाध्यक्ष बनाया गया है। यह नियुक्ति ऐसे समय हुई है जब करीब 10 महीने पहले उन्हें Samajwadi Party से निष्कासित किया गया था। भाजपा संगठन में मिली इस नई जिम्मेदारी के बाद पूजा पाल एक बार फिर राजनीतिक चर्चा के केंद्र में आ गई हैं।

पूजा पाल का नाम पहली बार उस समय सुर्खियों में आया था जब उनके पहले पति और पूर्व विधायक Raju Pal की 2005 में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। राजू पाल ने उपचुनाव में बाहुबली राजनीति को चुनौती देते हुए जीत दर्ज की थी। उनकी हत्या के बाद पूजा पाल ने न्याय की लड़ाई जारी रखी और सक्रिय राजनीति में कदम रखा। राजू पाल की हत्या के बाद हुए चुनाव में पूजा पाल ने उसी सीट से चुनाव लड़ा। उन्होंने अपने पति की हत्या के मुख्य आरोपी रहे Mohammad Ashraf के खिलाफ चुनावी मुकाबला किया और राजनीतिक पहचान बनाई। यही चुनाव उनके सार्वजनिक जीवन का सबसे महत्वपूर्ण मोड़ माना जाता है।

इसके बाद पूजा पाल ने Bahujan Samaj Party और बाद में समाजवादी पार्टी के साथ राजनीति की। वर्ष 2022 में उन्होंने कौशांबी की चायल विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी के टिकट पर चुनाव जीतकर विधायक बनीं।

अगस्त 2025 में विधानसभा के दौरान मुख्यमंत्री Yogi Adityanath की कानून-व्यवस्था और अपराध के खिलाफ कार्रवाई की सार्वजनिक सराहना करने के बाद समाजवादी पार्टी ने उन्हें "दल-विरोधी गतिविधियों" का आरोप लगाते हुए पार्टी से निष्कासित कर दिया। इसके बाद उन्होंने सपा नेतृत्व पर भी गंभीर आरोप लगाए और राजनीतिक रूप से अलग राह अपनाई।

अब भाजपा ने उन्हें उत्तर प्रदेश संगठन में प्रदेश उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए भाजपा ने सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरणों को ध्यान में रखकर संगठन का विस्तार किया है। पूजा पाल की नियुक्ति भी इसी रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है।

पूजा पाल का राजनीतिक सफर व्यक्तिगत त्रासदी, न्याय की लड़ाई और लगातार बदलते राजनीतिक घटनाक्रमों से जुड़ा रहा है। पति की हत्या के बाद राजनीति में सक्रिय हुईं, प्रमुख विपक्षी दल की विधायक बनीं, फिर पार्टी से निष्कासित हुईं और अब भाजपा में प्रदेश उपाध्यक्ष जैसे अहम संगठनात्मक पद तक पहुंच गई हैं। उनकी नई भूमिका पर उत्तर प्रदेश की राजनीति की नजर बनी हुई है।

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