World Bank Report: भारत में 12 साल में 49.6 करोड़ लोग गरीबी से बाहर आए, लेकिन कमाई में अब भी बड़ा अंतर

World Bank Report 2026: भारत में 12 साल में 49.6 करोड़ लोग गरीबी से बाहर आए। लेकिन अमीर और गरीब की कमाई में अब भी 13 गुना अंतर है। जानें रिपोर्ट के...

विश्व बैंक की अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट में भारत में गरीबी घटने के बड़े आंकड़े सामने आए हैं। साल 2011 से 2023 के बीच करीब 49.6 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकले हैं। हालांकि, रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि देश में रोजगार बढ़ने के बावजूद अच्छी कमाई और पक्की नौकरी मिलना अब भी बड़ी परेशानी है।

बिजनेस डेस्क: भारत में पिछले 12 साल के दौरान गरीब परिवारों की हालत में काफी बदलाव आया है। विश्व बैंक ने अक्टूबर 2026 में जारी अपनी 'पॉवर्टी एंड इक्विटी ब्रीफ' रिपोर्ट में बताया है कि 2011 से 2023 के बीच देश के करीब 49 करोड़ 60 लाख लोग गरीबी से बाहर आए। इस दौरान बेहद गरीबी में रहने वालों की संख्या भी तेजी से घटी है। 

रिपोर्ट के मुताबिक, ज्यादा लोगों को काम मिलने, परिवारों की आमदनी बढ़ने और सरकारी योजनाओं से मिलने वाली मदद ने इसमें बड़ी भूमिका निभाई है। हालांकि, अभी भी लाखों परिवार ऐसे हैं, जिनके लिए रोजमर्रा का खर्च चलाना आसान नहीं है।

भारत में कितनी घटी गरीबी? समझिए विश्व बैंक के आंकड़े

विश्व बैंक की रिपोर्ट में गरीबी को मापने के लिए अलग-अलग आय सीमाओं का इस्तेमाल किया गया है। इनमें रोजाना 4.20 डॉलर की सीमा को देखें तो 2011 में भारत की 57.7 फीसदी आबादी इस स्तर से नीचे जीवन गुजार रही थी। साल 2023 में यह आंकड़ा घटकर 16.1 फीसदी रह गया। रिपोर्ट में बेहद गरीबी की स्थिति भी बताई गई है। साल 2011 में देश के 27.1 फीसदी लोग रोजाना तीन डॉलर की अंतरराष्ट्रीय गरीबी सीमा से नीचे थे। वर्ष 2023 में इनकी हिस्सेदारी घटकर 2.6 फीसदी रह गई।

ये आंकड़े सीधे भारतीय रुपये और डॉलर की बाजार कीमत के हिसाब से नहीं निकाले गए हैं। विश्व बैंक ने इसके लिए 2021 की क्रय शक्ति समता यानी PPP को आधार बनाया है। इसमें देखा जाता है कि अलग-अलग देशों में एक जैसी चीजें खरीदने के लिए कितना पैसा खर्च करना पड़ता है। हालांकि, गरीबी दर कम होने का यह मतलब नहीं है कि सभी परिवार आर्थिक रूप से मजबूत हो गए हैं। कई घरों में अब भी कम कमाई के कारण जरूरी खर्च पूरे करना मुश्किल होता है।

ज्यादा लोगों को मिला काम, सरकारी योजनाओं से भी राहत

विश्व बैंक ने गरीबी कम होने की एक बड़ी वजह रोजगार बढ़ने को बताया है। रिपोर्ट के मुताबिक, 2017 से 2023 के बीच भारत में काम करने वाले लोगों की संख्या करीब 13 करोड़ 40 लाख बढ़ी। यह बढ़ोतरी काम करने की उम्र वाले लोगों की संख्या में हुई वृद्धि से लगभग दोगुनी थी। इस दौरान गांवों की महिलाओं ने भी बड़ी संख्या में काम करना शुरू किया। पहले जिन परिवारों में एक या दो लोग ही कमाते थे, वहां महिलाओं के रोजगार से घर की कमाई बढ़ाने में मदद मिली।

सरकार की तरफ से मिलने वाले राशन और दूसरी सहायता योजनाओं का भी असर पड़ा। जिन परिवारों को सस्ते या मुफ्त अनाज की सुविधा मिली, उनका खाने-पीने पर होने वाला कुछ खर्च बचा। इससे घर की दूसरी जरूरतों के लिए पैसे निकालना थोड़ा आसान हुआ। रिपोर्ट में लोगों के खर्च करने की क्षमता बढ़ने को भी गरीबी घटने की एक वजह माना गया है।

World Bank Report: भारत में 12 साल में 49.6 करोड़ लोग गरीबी से बाहर आए, लेकिन कमाई में अब भी बड़ा अंतर

गांवों में शहरों के मुकाबले अब भी ज्यादा गरीबी

देश में गरीबी भले ही कम हुई हो, लेकिन गांव और शहर के हालात अभी एक जैसे नहीं हैं। विश्व बैंक के मुताबिक, 2023 में रोजाना 4.20 डॉलर वाली सीमा के आधार पर ग्रामीण इलाकों में गरीबी दर 19.3 फीसदी थी। वहीं शहरों में यह 8.6 फीसदी दर्ज की गई। इस अंतर से पता चलता है कि गांवों में रहने वाले परिवारों को अभी भी कमाई के अच्छे मौके मिलने में परेशानी हो रही है। खासकर उन लोगों के लिए मुश्किल ज्यादा है, जिनके पास जमीन, दूसरे संसाधन या नियमित रोजगार नहीं है।

रिपोर्ट में कम पढ़े-लिखे और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों में गरीबी ज्यादा होने की बात भी सामने आई है। उत्तर प्रदेश से पश्चिम बंगाल तक के राज्यों वाले क्षेत्र में देश की गरीब आबादी का लगभग 57 फीसदी हिस्सा रहता है।

नौकरी बढ़ी, लेकिन कमाई में 13 गुना का अंतर

विश्व बैंक की रिपोर्ट में रोजगार से जुड़ी एक और बात सामने आई है। देश में काम करने वालों की संख्या तो बढ़ी है, लेकिन सभी की कमाई में एक जैसा सुधार नहीं हुआ। साल 2023 में सबसे ज्यादा कमाने वाले 10 फीसदी कामगारों की बीच की कमाई, सबसे कम कमाने वाले 10 फीसदी कामगारों की बीच की कमाई से करीब 13 गुना थी।

रिपोर्ट के मुताबिक, महंगाई का असर हटाकर देखें तो कामगारों की वास्तविक कमाई में बहुत ज्यादा बढ़ोतरी नहीं हुई। इसकी एक वजह यह भी है कि बड़ी संख्या में नए रोजगार ऐसे कामों में मिले, जहां कमाई और उत्पादन दोनों कम हैं। यही कारण है कि विश्व बैंक ने केवल रोजगार बढ़ाने के बजाय बेहतर वेतन और स्थायी नौकरी के मौके बढ़ाने को भी जरूरी बताया है।

2028 तक गरीबी कितनी रह सकती है?

विश्व बैंक का अनुमान है कि आने वाले वर्षों में भी भारत में गरीबी घट सकती है। हालांकि, इसकी रफ्तार पहले जैसी तेज रहने की उम्मीद नहीं है। रिपोर्ट के अनुसार, रोजाना 4.20 डॉलर की सीमा पर गरीबी दर 2026 में अनुमानित 14.2 फीसदी से घटकर 2028 तक 12.1 फीसदी रह सकती है। ये अभी अनुमान हैं। आगे रोजगार, लोगों की कमाई और देश की आर्थिक स्थिति में होने वाले बदलाव से आंकड़े बदल सकते हैं। रिपोर्ट से जुड़ी पूरी जानकारी विश्व बैंक की आधिकारिक वेबसाइट पर देखी जा सकती है।

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