IDBI बैंक की बिक्री को लेकर राहुल गांधी और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आमने-सामने हैं। वित्त मंत्री ने कहा कि NDA सरकार को बैंक खराब वित्तीय स्थिति में मिला था। वहीं राहुल गांधी ने मुनाफे में लौट चुके बैंक की बिक्री और कर्मचारियों के भविष्य पर सवाल उठाए हैं।
बिजनेस न्यूज़: IDBI बैंक की प्रस्तावित बिक्री को लेकर केंद्र सरकार और कांग्रेस के बीच राजनीतिक विवाद बढ़ गया है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के सवालों पर शुक्रवार, 30 अक्टूबर को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने जवाब दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली कांग्रेस सरकारों के दौरान बड़े कारोबारी समूहों को दिए गए खराब कर्ज के कारण बैंक को भारी नुकसान हुआ था। वित्त मंत्री के मुताबिक, मोदी सरकार ने 25,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की पूंजी और बेहतर प्रबंधन के जरिए बैंक की वित्तीय स्थिति सुधारने में मदद की।
निर्मला सीतारमण ने कांग्रेस पर लगाए गंभीर आरोप
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर राहुल गांधी के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि 2014 में NDA सरकार को IDBI बैंक बेहद खराब वित्तीय हालत में मिला था। उनके मुताबिक, बैंक में बड़ी मात्रा में ऐसे कर्ज थे, जिनकी वसूली नहीं हो पा रही थी। सीतारमण ने वीडियोकॉन, विंसम, एबीजी शिपयार्ड और किंगफिशर जैसी कंपनियों का नाम लेते हुए कहा कि इन्हें दिए गए कर्ज के खराब होने से बैंक को नुकसान उठाना पड़ा।
उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस के शासनकाल में राजनीतिक संपर्क रखने वाले कुछ बड़े कारोबारी समूहों को वित्तीय नियमों की अनदेखी करके कर्ज दिए गए थे। इसके चलते बैंक की वित्तीय स्थिति कमजोर हुई। हालांकि ये आरोप वित्त मंत्री की ओर से कांग्रेस की पिछली सरकारों पर लगाए गए हैं। संबंधित कंपनियों के कर्ज और राजनीतिक दबाव के बीच संबंध को स्वतंत्र रूप से स्थापित तथ्य नहीं माना जा सकता।
बैंक को बचाने के लिए 25 हजार करोड़ से ज्यादा की पूंजी
निर्मला सीतारमण ने कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार ने IDBI बैंक को वित्तीय संकट से बाहर निकालने के लिए कई कदम उठाए। इनमें बैंक में 25,000 करोड़ रुपये से अधिक की पूंजी डालना, पेशेवर प्रबंधन को बढ़ावा देना और कर्ज देने की प्रक्रिया सुधारना शामिल रहा। वित्त मंत्री के अनुसार, इन उपायों से बैंक की वित्तीय हालत बेहतर हुई और अब वह कारोबार के अगले चरण के लिए तैयार है।
IDBI बैंक की खराब स्थिति को देखते हुए भारतीय रिजर्व बैंक ने मई 2017 में उसे प्रॉम्प्ट करेक्टिव एक्शन (PCA) के तहत रखा था। इसके चलते बैंक पर कई कारोबारी पाबंदियां लागू हुई थीं। वित्तीय स्थिति में सुधार आने के बाद मार्च 2021 में RBI ने कुछ शर्तों के साथ बैंक को इस व्यवस्था से बाहर कर दिया था।
राहुल गांधी ने पूछा- मुनाफा कमा रहा बैंक क्यों बेच रही सरकार?
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IDBI बैंक की हिस्सेदारी बेचने के सरकार के फैसले पर राहुल गांधी ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने बैंक कर्मचारियों को लिखे पत्र में कहा कि सात साल पहले IDBI बैंक घाटे में चल रहा था। कर्मचारियों की मेहनत से बैंक की हालत सुधरी और पिछले वित्त वर्ष में उसने 9,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का मुनाफा कमाया। राहुल ने पूछा कि जब बैंक अब अच्छी कमाई कर रहा है, तो सरकार उसे निजी हाथों में क्यों सौंप रही है?
राहुल गांधी ने कहा कि IDBI बैंक को खड़ा करने में जनता का पैसा लगा है। ऐसे बैंक देश की अर्थव्यवस्था के लिए जरूरी हैं। उन्होंने बैंक में काम करने वाले कर्मचारियों की नौकरी और उन्हें मिलने वाली सुविधाओं को लेकर भी चिंता जताई।
कांग्रेस नेता का कहना है कि बैंक निजी कंपनी के हाथों में जाने के बाद कर्मचारियों की नौकरी की शर्तें बदल सकती हैं। इसके अलावा SC, ST और OBC वर्गों को मिलने वाले आरक्षण पर भी असर पड़ सकता है। हालांकि, बिक्री के बाद कर्मचारियों की सुविधाओं और आरक्षण को लेकर क्या व्यवस्था रहेगी, यह लागू नियमों और आगे होने वाले फैसलों से साफ होगा।
कनाडा की कंपनी को 52,878 करोड़ रुपये में मिलेगी हिस्सेदारी
केंद्र सरकार ने 14 अक्टूबर 2026 को IDBI बैंक की 60.72 फीसदी हिस्सेदारी बेचने की मंजूरी दी थी। इसे कनाडा की Fairfax Financial Holdings से जुड़ी कंपनी खरीदेगी। सौदा करीब 52,878 करोड़ रुपये में तय हुआ है। इसमें केंद्र सरकार अपने हिस्से के 30.48 फीसदी और भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) अपने हिस्से के 30.24 फीसदी शेयर बेचेगा। सौदा पूरा होने के बाद सरकार के पास बैंक की 15 फीसदी और LIC के पास 19 फीसदी हिस्सेदारी रह जाएगी।
वित्त मंत्रालय के मुताबिक, बैंक को बेचने के लिए कंपनियों से बोलियां मंगाई गई थीं। इनमें 81 रुपये प्रति शेयर की बोली मंजूर की गई। हालांकि, सौदा पूरी तरह पूरा होने से पहले खरीदार को भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की जरूरी शर्तें पूरी करनी होंगी।








