अयोध्या। राममंदिर में कथित चढ़ावा चोरी मामले की जांच के बीच उत्तर प्रदेश की राजनीति और मंदिर प्रबंधन को लेकर हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कल अयोध्या दौरे पर रहेंगे और राममंदिर में दर्शन-पूजन करेंगे। इस दौरे को इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि हाल के दिनों में मंदिर प्रशासन और प्रबंधन को लेकर कई तरह की चर्चाएं सामने आई हैं।
सूत्रों के मुताबिक, मुख्यमंत्री के कार्यक्रम को लेकर प्रशासन ने मंदिर ट्रस्ट के पदाधिकारियों को आवश्यक जानकारी दी है। इस बीच यह चर्चा भी तेज है कि मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय से कुछ दूरी बनाए जाने के संकेत मिल रहे हैं। हालांकि इस संबंध में प्रशासन या ट्रस्ट की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
बताया जा रहा है कि प्रशासन की ओर से कार्यक्रम में ट्रस्ट की तरफ से प्रतिनिधि भेजने का सुझाव दिया गया है। इसे लेकर राजनीतिक और धार्मिक हलकों में अलग-अलग तरह की चर्चाएं चल रही हैं। हालांकि, आधिकारिक तौर पर किसी भी प्रकार के मतभेद या दूरी की पुष्टि नहीं की गई है।
इधर, राममंदिर में कथित चढ़ावा चोरी मामले की जांच लगातार जारी है। विशेष जांच दल (SIT) कई दिनों से मंदिर परिसर में दस्तावेजों, सुरक्षा व्यवस्था और कर्मचारियों से पूछताछ कर रही है। जांच के दौरान चढ़ावे के संग्रह, गिनती और सुरक्षा से जुड़े कई पहलुओं की समीक्षा की जा रही है।
इसी बीच मंदिर के प्रशासनिक ढांचे में बदलाव की संभावना पर भी चर्चा शुरू हो गई है। सूत्रों के अनुसार, काशी विश्वनाथ मंदिर की तर्ज पर राममंदिर में भी मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) नियुक्त करने के प्रस्ताव पर विचार किया जा सकता है। यदि ऐसा होता है तो मंदिर के प्रशासनिक और वित्तीय कार्यों की निगरानी अधिक व्यवस्थित तरीके से की जा सकेगी।
हालांकि, CEO नियुक्ति को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक निर्णय सामने नहीं आया है। सरकार और मंदिर ट्रस्ट की ओर से भी इस विषय पर औपचारिक घोषणा नहीं की गई है। लेकिन चढ़ावा विवाद के बाद मंदिर प्रबंधन व्यवस्था को लेकर बहस जरूर तेज हो गई है।
राजनीतिक दल भी इस मुद्दे पर लगातार प्रतिक्रिया दे रहे हैं। विपक्षी दल पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग कर रहे हैं, जबकि मंदिर ट्रस्ट का कहना है कि जांच एजेंसियों को पूरा सहयोग दिया जा रहा है और जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर उचित कार्रवाई की जाएगी।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का कल का दौरा इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यह ऐसे समय हो रहा है, जब मंदिर प्रबंधन, चढ़ावा विवाद और प्रशासनिक बदलाव जैसे मुद्दे चर्चा के केंद्र में हैं। माना जा रहा है कि इस दौरे के बाद कई अहम संकेत सामने आ सकते हैं।











