2014 के लोकसभा चुनाव में ऐतिहासिक जीत के बाद जब Narendra Modi पहली बार राष्ट्रपति भवन में तत्कालीन राष्ट्रपति Pranab Mukherjee से मिलने पहुंचे थे, तब दोनों नेताओं के बीच हुई एक बातचीत आज फिर चर्चा में है।
नई दिल्ली: 2014 के लोकसभा चुनाव में ऐतिहासिक जीत के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से राष्ट्रपति भवन में हुई मुलाकात एक बार फिर चर्चा में है। पूर्व राष्ट्रपति की बेटी शर्मिष्ठा मुखर्जी ने अपने हालिया लेख में इस मुलाकात के कुछ दिलचस्प पहलुओं का उल्लेख किया है, जो अब राजनीतिक और ऐतिहासिक दोनों ही दृष्टि से सुर्खियों में हैं।
प्रणब मुखर्जी का एक सवाल और मोदी का जवाब
शर्मिष्ठा मुखर्जी के अनुसार, चुनाव परिणामों के बाद नरेंद्र मोदी जब राष्ट्रपति भवन पहुंचे, तो प्रणब मुखर्जी ने उनसे चुनावी जनादेश का विश्लेषण पूछा। इस पर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि लगभग तीन दशक बाद किसी एक पार्टी को लोकसभा में पूर्ण बहुमत मिला है। इसके बाद प्रणब मुखर्जी ने अपने विशिष्ट अकादमिक अंदाज में सवाल किया— “और क्या?”
जब कुछ क्षण के लिए बातचीत थम गई, तो पूर्व राष्ट्रपति ने स्वयं ही यह महत्वपूर्ण विश्लेषण सामने रखा कि 2014 का चुनाव इसलिए ऐतिहासिक था क्योंकि पहली बार किसी राजनीतिक दल ने पहले से घोषित प्रधानमंत्री चेहरे के साथ चुनाव लड़ा और उसी चेहरे के नाम पर जनता ने जनादेश दिया।
‘पार्टी नहीं, चेहरे पर मिला जनादेश’
अपने लेख में शर्मिष्ठा मुखर्जी ने लिखा कि 2014 का चुनाव केवल भारतीय जनता पार्टी (BJP) की जीत नहीं था, बल्कि यह एक व्यक्ति—नरेंद्र मोदी—के नेतृत्व में जनता का स्पष्ट समर्थन था। उन्होंने कहा कि भारत में पारंपरिक रूप से प्रधानमंत्री का नाम चुनाव से पहले घोषित नहीं किया जाता था, लेकिन 2014 में यह राजनीतिक परंपरा बदल गई।
शर्मिष्ठा मुखर्जी ने अपने लेख में यह भी उल्लेख किया कि 2014 से पहले नरेंद्र मोदी केवल गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय थे। लेकिन 2014 के बाद उनका राजनीतिक सफर पूरी तरह बदल गया। उन्होंने उस ऐतिहासिक क्षण को भी याद किया जब नरेंद्र मोदी पहली बार सांसद बनने के बाद संसद पहुंचे और संसद भवन की सीढ़ियों को प्रणाम किया। इसे उन्होंने भारतीय लोकतंत्र में एक भावनात्मक और ऐतिहासिक क्षण बताया।
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प्रणब मुखर्जी और मोदी के रिश्तों पर टिप्पणी
लेख में यह भी कहा गया कि राजनीतिक मतभेदों के बावजूद प्रणब मुखर्जी और नरेंद्र मोदी के बीच सम्मानजनक संबंध थे। शर्मिष्ठा मुखर्जी के अनुसार, लोकतंत्र की असली ताकत यही है कि राजनीतिक विरोध के बावजूद व्यक्तिगत स्तर पर सम्मान और संवाद बना रहे। अपने लेख में उन्होंने BJP की चुनावी सफलता के कई कारण बताए, जिनमें संगठन की मजबूत जमीनी पकड़, सामाजिक समीकरणों में संतुलन और समय के साथ खुद को बदलने की क्षमता शामिल है. हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पार्टी की सबसे बड़ी ताकत नरेंद्र मोदी का नेतृत्व और उनका व्यक्तिगत करिश्मा है।
“मोदी को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता”
शर्मिष्ठा मुखर्जी ने अपने लेख के अंत में लिखा कि नरेंद्र मोदी भारतीय राजनीति में एक ऐसे नेता हैं जिनके प्रभाव को अनदेखा नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि भले ही लोग उनके काम करने के तरीके से सहमत या असहमत हों, लेकिन उनके राजनीतिक प्रभाव और जनाधार को नकारा नहीं जा सकता। उनके अनुसार, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों में भी यह प्रभाव स्पष्ट रूप से देखने को मिला।
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में लगातार 12 वर्षों का कार्यकाल पूरा किया है। इसके साथ ही वे भारत के सबसे लंबे समय तक लगातार सेवा देने वाले निर्वाचित प्रधानमंत्री बन गए हैं।










