प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2025 में 11 विदेश यात्राओं के दौरान 23 देशों का दौरा किया और 42 दिन विदेश में बिताए। व्यापार समझौते, निर्यात बाजारों और दुर्लभ खनिज आपूर्ति पर केंद्रित इन दौरों से भारत की कूटनीति को नई रफ्तार मिली।
New Delhi: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 18 दिसंबर को जॉर्डन, इथियोपिया और ओमान की चार दिवसीय यात्रा पूरी कर भारत लौटे। यह यात्रा 2025 की उनकी आखिरी विदेश यात्रा रही। इस दौरे का सबसे अहम आकर्षण भारत और ओमान के बीच मुक्त व्यापार समझौता (Free Trade Agreement) और व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते (CEPA – Comprehensive Economic Partnership Agreement) पर हस्ताक्षर रहा। इन समझौतों को भारत की आर्थिक कूटनीति के लिहाज से बड़ा कदम माना जा रहा है।
एक साल में 23 देशों का दौरा
इस अहम यात्रा के साथ ही प्रधानमंत्री मोदी ने 2025 में कुल 11 विदेश यात्राएं करते हुए 23 देशों का दौरा पूरा किया। विदेश मंत्रालय और प्रधानमंत्री कार्यालय की वेबसाइट पर उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार प्रधानमंत्री ने इस साल अब तक कुल 42 दिन विदेश में बिताए। कोविड के बाद यह पहला मौका है जब किसी एक कैलेंडर वर्ष में प्रधानमंत्री ने इतनी बड़ी संख्या में देशों का दौरा किया है।
2015 के बाद सबसे व्यस्त विदेश कैलेंडर
साल 2015 के बाद यह पहला अवसर है जब प्रधानमंत्री मोदी ने एक कैलेंडर वर्ष में सबसे अधिक देशों की यात्रा की है। 2015 को अब तक उनका सबसे सक्रिय विदेश दौरा वर्ष माना जाता रहा है। उस साल उन्होंने 13 विदेश यात्राओं में 28 देशों का दौरा किया था। रूस और फ्रांस जैसे देशों की उन्होंने दो-दो बार यात्रा की थी। उस वर्ष प्रधानमंत्री ने कुल 54 दिन विदेश में बिताए थे। 2025 भले ही दिनों की संख्या में उससे पीछे रहा हो, लेकिन देशों की संख्या और रणनीतिक महत्व के लिहाज से यह साल भी बेहद अहम माना जा रहा है।
ऑपरेशन सिंदूर के बाद बढ़ी यात्राओं की रफ्तार
2025 में प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं में मई के बाद तेजी देखने को मिली। खास तौर पर ऑपरेशन सिंदूर के बाद उनकी यात्राएं ज्यादा सक्रिय हो गईं। इन दौरों का एक बड़ा उद्देश्य दुर्लभ खनिजों (Rare Minerals) की आपूर्ति के नए विकल्प तलाशना रहा। चीन द्वारा इन खनिजों के निर्यात पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद भारत के लिए वैकल्पिक स्रोत ढूंढना रणनीतिक जरूरत बन गया था। प्रधानमंत्री की कई यात्राएं इसी दिशा में केंद्रित रहीं।
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निर्यात बाजारों की तलाश बनी प्राथमिकता
प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं का एक और अहम कारण भारत के निर्यात (Export) से जुड़ा रहा। अमेरिका द्वारा भारतीय वस्तुओं पर भारी शुल्क लगाए जाने के बाद भारत को अपने निर्यात में विविधता लाने की जरूरत पड़ी। ऐसे में एशिया, अफ्रीका और मिडिल ईस्ट के देशों के साथ व्यापारिक रिश्ते मजबूत करना जरूरी हो गया। प्रधानमंत्री मोदी की यात्राओं ने भारत को नए बाजारों तक पहुंच बनाने में मदद की।
कम चुनावों से मिला विदेश नीति पर फोकस
प्रधानमंत्री के अधिक विदेश दौरों के पीछे एक अहम घरेलू कारण भी रहा। साल 2015 की तरह 2025 में भी देश में चुनावों की संख्या कम रही। इस वर्ष केवल दिल्ली और बिहार में ही विधानसभा चुनाव हुए। इससे प्रधानमंत्री का समय चुनाव प्रचार में अपेक्षाकृत कम लगा और वह विदेश नीति पर ज्यादा ध्यान दे सके। इसके उलट 2024 में लोकसभा चुनाव के साथ जम्मू-कश्मीर, झारखंड, हरियाणा और महाराष्ट्र में भी विधानसभा चुनाव हुए थे। उस वर्ष प्रधानमंत्री को विदेश यात्राओं के लिए सीमित समय मिल पाया था।
2024 के मुकाबले बढ़ा अंतरराष्ट्रीय दौरा
2024 में प्रधानमंत्री मोदी ने 11 विदेश यात्राओं के दौरान 16 देशों का दौरा किया था और कुल 31 दिन विदेश में बिताए थे। 2025 में न केवल देशों की संख्या बढ़ी, बल्कि विदेश में बिताए गए दिनों की संख्या में भी इजाफा हुआ। इससे साफ है कि मौजूदा साल में भारत की विदेश नीति ज्यादा सक्रिय और बहुआयामी रही।
दूसरे कार्यकाल में कोविड का असर
प्रधानमंत्री मोदी के दूसरे कार्यकाल की शुरुआत 2019 में हुई थी। इस कार्यकाल में पहले कार्यकाल की तुलना में विदेश यात्राएं कम रहीं। इसका सबसे बड़ा कारण कोविड-19 महामारी रहा। वैश्विक स्तर पर यात्रा प्रतिबंध और सख्त प्रोटोकॉल के चलते करीब दो साल तक अंतरराष्ट्रीय आवाजाही बेहद सीमित रही।
2020 से 2022 तक का सफर
कोविड के सबसे गंभीर वर्ष 2020 में प्रधानमंत्री मोदी ने कोई विदेश यात्रा नहीं की। 2021 में स्थिति थोड़ी सामान्य होने पर उन्होंने तीन विदेश यात्राएं कीं और चार देशों का दौरा किया। 2022 में प्रधानमंत्री सात विदेश यात्राओं पर गए, जिनमें 10 देश शामिल थे। इसके बाद धीरे-धीरे अंतरराष्ट्रीय दौरे फिर से रफ्तार पकड़ने लगे।









