भारतीय राजनीति में एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है, जहां आम आदमी पार्टी (AAP) को गंभीर आंतरिक संकट का सामना करना पड़ रहा है। पार्टी के 10 में से 7 राज्यसभा सांसदों ने इस्तीफा देकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थाम लिया है।
नई दिल्ली: भारतीय राजनीति में एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है, जहां आम आदमी पार्टी (AAP) को गंभीर आंतरिक संकट का सामना करना पड़ रहा है। पार्टी के 10 में से 7 राज्यसभा सांसदों ने इस्तीफा देकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थाम लिया है। इस घटनाक्रम ने न केवल संसद में AAP की स्थिति कमजोर कर दी है, बल्कि इसके राष्ट्रीय भविष्य को लेकर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं। इस्तीफा देने वालों में राघव चड्ढा, संदीप पाठक, अशोक मित्तल, हरभजन सिंह, राजेंद्र गुप्ता, विक्रम साहनी और स्वाति मालीवाल जैसे प्रमुख नाम शामिल हैं।
कैसे शुरू हुई पार्टी में दरार?
आम आदमी पार्टी में यह संकट अचानक नहीं, बल्कि लंबे समय से चल रहे घटनाक्रमों का परिणाम माना जा रहा है। इसकी शुरुआत 2024 में सामने आए उस विवाद से जुड़ी है, जब राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल ने दिल्ली के तत्कालीन मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के एक करीबी सहयोगी पर उनके आवास पर कथित हमले का आरोप लगाया था। इस घटना ने पार्टी के भीतर गहरी खाई पैदा कर दी और संगठनात्मक एकता पर सवाल उठने लगे।
स्वाति मालीवाल ने बाद में पार्टी नेतृत्व पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने “बेकाबू भ्रष्टाचार” और महिलाओं के खिलाफ कथित उत्पीड़न की घटनाओं का उल्लेख करते हुए दावा किया कि पार्टी में “गुंडा तत्वों” को बढ़ावा दिया जा रहा है। इन आरोपों ने न केवल पार्टी की छवि को प्रभावित किया, बल्कि अंदरूनी मतभेदों को भी सार्वजनिक कर दिया।
राघव चड्ढा का राजनीतिक उत्थान और बदलाव
राघव चड्ढा को कभी आम आदमी पार्टी के सबसे तेज़ी से उभरते चेहरों में से एक माना जाता था। 2022 में पंजाब से राज्यसभा सांसद बनने के बाद उनका राजनीतिक कद तेजी से बढ़ा। वे भगवंत मान सरकार के दौरान प्रभावशाली नेताओं में शामिल थे। हालांकि 2024 के बाद उनकी भूमिका को लेकर सवाल उठने लगे।
अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी के बाद पार्टी में नेतृत्व संकट गहराया और चड्ढा की सक्रियता पर भी चर्चाएं शुरू हुईं। धीरे-धीरे उन्हें कई अहम जिम्मेदारियों से हटा दिया गया। इस महीने की शुरुआत में उन्हें राज्यसभा में उपनेता पद से हटाए जाने के बाद पार्टी नेतृत्व से उनकी दूरी और बढ़ गई।
![]()
सामूहिक इस्तीफे ने बढ़ाई राजनीतिक हलचल
हालांकि पहले कुछ नेताओं की नाराजगी की खबरें सामने आती रही थीं, लेकिन एक साथ सात सांसदों का इस्तीफा राजनीतिक गलियारों के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। इनमें से कई नेताओं ने पहले सार्वजनिक रूप से असहमति नहीं जताई थी, जिससे यह घटनाक्रम और भी अप्रत्याशित बन गया। अशोक मित्तल के इस्तीफे को लेकर यह भी सामने आया कि उनके आवास और कारोबारी ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई हुई थी। यह मामला फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट (FEMA) से जुड़ा बताया गया है।
इसके बाद राजनीतिक दबाव और केंद्रीय एजेंसियों के इस्तेमाल को लेकर आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए।आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह ने पूरे घटनाक्रम के पीछे भाजपा द्वारा चलाए जा रहे “ऑपरेशन लोटस” का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि केंद्रीय जांच एजेंसियों के दबाव के कारण सांसदों ने पार्टी छोड़ी है। हालांकि विपक्षी दलों ने इन आरोपों को खारिज किया है और इसे पार्टी के भीतर चल रहे आंतरिक संकट का परिणाम बताया है।
राज्यसभा में AAP की ताकत पर असर
इन इस्तीफों का सीधा असर राज्यसभा में आम आदमी पार्टी की संख्या और प्रभाव पर पड़ा है। अधिकांश सांसद पंजाब से थे, ऐसे में राज्य में भी पार्टी की राजनीतिक पकड़ कमजोर होने की आशंका जताई जा रही है। यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय पर हुआ है जब आम आदमी पार्टी पंजाब, गुजरात और गोवा जैसे राज्यों में आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारी कर रही है।









