AI फर्जीवाड़ा मामला: वसुंधरा राजे के नाम से नकली लेटर और वीडियो बनाने वाले 4 आरोपी गिरफ्तार

वसुंधरा राजे के नाम से AI से फर्जी लेटर और वीडियो वायरल करने मामले में 4 आरोपी गिरफ्तार किया है। भोपाल और मोहाली से पकड़े गए आरोपियों से पुलिस पूछताछ जारी।

वसुंधरा राजे के नाम से AI से बनाए गए फर्जी लेटर और वीडियो वायरल करने के मामले में पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार किया। भोपाल और मोहाली से पकड़े गए आरोपियों को जयपुर लाकर पूछताछ की जा रही है।

जयपुर: राजस्थान की राजधानी जयपुर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के दुरुपयोग से जुड़ा एक बड़ा मामला सामने आया है। पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के नाम से फर्जी लेटर और वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर प्रसारित करने के आरोप में पुलिस ने चार लोगों को गिरफ्तार किया है। यह मामला डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर बढ़ते फेक कंटेंट और डीपफेक तकनीक के खतरे को उजागर करता है।

अलग-अलग राज्यों से गिरफ्तारी, जयपुर लाई गई टीम

जयपुर पुलिस के अनुसार, इस मामले में तीन आरोपियों—निखिल, बिलाल खान और इनाम अहमद—को मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल से गिरफ्तार किया गया। वहीं एक महिला आरोपी अमृता धुमाल को पंजाब के मोहाली से पकड़ा गया। सभी आरोपियों को पूछताछ के लिए जयपुर लाया गया है।

पुलिस का कहना है कि यह कार्रवाई शहर के ज्योति नगर थाना क्षेत्र में दर्ज मामले के आधार पर की गई। जांच के दौरान तकनीकी साक्ष्यों और डिजिटल ट्रैकिंग के जरिए आरोपियों तक पहुंच बनाई गई।

AI तकनीक से तैयार किया गया फर्जी लेटर और वीडियो

जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने पूर्व मुख्यमंत्री के नाम से एक फर्जी पत्र तैयार किया, जिसे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत को संबोधित बताया गया। इस पत्र को विश्वसनीय दिखाने के लिए आधुनिक AI तकनीक का इस्तेमाल किया गया।

इसके बाद उसी सामग्री को वीडियो फॉर्मेट में बदलकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर वायरल किया गया। विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह की सामग्री को डीपफेक या एआई-जनरेटेड फर्जी कंटेंट की श्रेणी में रखा जाता है, जो आम लोगों को गुमराह कर सकता है।

पुलिस जांच और नेटवर्क की तलाश

जयपुर पुलिस आयुक्त सचिन मित्तल के निर्देश पर यह कार्रवाई की गई। अधिकारियों का कहना है कि चारों आरोपियों को अदालत में पेश कर पुलिस रिमांड मांगी जाएगी, ताकि उनसे विस्तृत पूछताछ की जा सके।

पुलिस फिलहाल इस पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस फर्जी कंटेंट के निर्माण और प्रसार में और कौन-कौन लोग शामिल हैं। डिजिटल फॉरेंसिक टीम भी इस मामले में अहम भूमिका निभा रही है।

AI फर्जीवाड़ा मामला: वसुंधरा राजे के नाम से नकली लेटर और वीडियो बनाने वाले 4 आरोपी गिरफ्तार

मध्यप्रदेश कनेक्शन और राजनीतिक प्रतिक्रिया

इस मामले की शुरुआती जांच में मध्यप्रदेश कनेक्शन सामने आने के बाद स्थानीय पुलिस ने कुछ लोगों को हिरासत में लिया था, जिनके बारे में बताया गया कि वे एक राजनीतिक आईटी सेल से जुड़े हो सकते हैं। हालांकि, इस कार्रवाई को लेकर राजनीतिक विवाद भी खड़ा हो गया।

कांग्रेस नेता हरीश चौधरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए इस कार्रवाई पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि कार्यकर्ताओं को अवैध रूप से हिरासत में रखना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। वहीं सांसद विवेक टांक ने भी इस मामले में निष्पक्ष जांच की मांग की।

डिजिटल युग में बढ़ता AI दुरुपयोग

यह मामला एक बार फिर दिखाता है कि कैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का गलत इस्तेमाल कर फर्जी दस्तावेज और वीडियो तैयार किए जा सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि डीपफेक तकनीक का उपयोग राजनीतिक छवि को नुकसान पहुंचाने, गलत जानकारी फैलाने और सामाजिक भ्रम पैदा करने के लिए किया जा रहा है।

भारत सहित दुनिया भर में सरकारें और एजेंसियां इस तरह के साइबर अपराधों से निपटने के लिए सख्त कानून और तकनीकी उपायों पर काम कर रही हैं।

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