बारिश से बर्बाद फसलों का सर्वे जारी: अलीगढ़ में सुबह खेतों पर पहुंचे लेखपाल पात्र किसानों को मिलेगा मुआवजा

अलीगढ़ में बारिश और तेज हवा से फसलों को हुए नुकसान का सर्वे जारी है। लेखपाल खेतों में पहुंचकर क्षति का आकलन कर रहे हैं पात्र किसानों को नियमानुसार मुआवजा मिलेगा
बारिश से बर्बाद फसलों का सर्वे जारी: अलीगढ़ में सुबह खेतों पर पहुंचे लेखपाल पात्र किसानों को मिलेगा मुआवजा
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उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले में पिछले दिनों हुई बारिश और तेज हवाओं से किसानों की फसलों को हुए नुकसान का आकलन शुरू हो गया है। जिला प्रशासन के निर्देश पर राजस्व विभाग की टीमें गांव-गांव पहुंचकर खेतों का स्थलीय निरीक्षण कर रही हैं। मंगलवार सुबह भी लेखपाल प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचे और खेतों में खड़ी तथा गिर चुकी फसलों की स्थिति देखी। प्रशासन का कहना है कि सर्वे के आधार पर नुकसान का वास्तविक आकलन तैयार किया जाएगा और पात्र किसानों को नियमानुसार मुआवजा दिलाने की कार्रवाई की जाएगी।

अलीगढ़ में 26 सितंबर को हुई बारिश के बाद कई ग्रामीण इलाकों में खेतों में खड़ी फसलों को नुकसान पहुंचने की सूचना सामने आई थी। बारिश के साथ चली तेज हवाओं के कारण कई जगह धान और बाजरा की फसल जमीन पर गिर गई। कुछ क्षेत्रों में खेतों में पानी भरने से कटी हुई फसल भी भीग गई। पककर तैयार हो रही फसल के समय हुई बारिश ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि इस समय फसल को नुकसान होने से उत्पादन के साथ-साथ उसकी गुणवत्ता प्रभावित होने की आशंका रहती है।

जिला प्रशासन ने स्थिति को देखते हुए फसल क्षति का वास्तविक आंकड़ा जुटाने के लिए राजस्व टीमों को सक्रिय किया है। लेखपाल अपने-अपने क्षेत्र के गांवों में जाकर प्रभावित खेतों का निरीक्षण कर रहे हैं। निरीक्षण के दौरान यह देखा जा रहा है कि किस खेत में कौन सी फसल लगी थी, बारिश और हवा से फसल को कितना नुकसान हुआ है और कितने क्षेत्रफल में फसल प्रभावित हुई है। मौके पर जुटाई जा रही जानकारी को सर्वे रिपोर्ट में शामिल किया जाएगा।

प्रशासन की ओर से स्पष्ट किया गया है कि केवल बारिश होने के आधार पर सभी किसानों को एक समान राहत नहीं दी जाएगी, बल्कि फसल क्षति के वास्तविक आकलन और निर्धारित नियमों के आधार पर पात्रता तय होगी। यानी जिन किसानों की फसल निर्धारित मानकों के अनुसार प्रभावित पाई जाएगी, उनकी रिपोर्ट तैयार कर नियमानुसार मुआवजे की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। इस वजह से खेतों का मौके पर निरीक्षण और नुकसान का सही रिकॉर्ड तैयार करना बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

अलीगढ़ में बारिश के बाद प्रशासन की निगरानी लगातार जारी है। अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व प्रमोद कुमार के अनुसार जिले में फिलहाल स्थिति सामान्य है। हालांकि कुछ क्षेत्रों में बारिश और तेज हवा के कारण फसलों के आंशिक रूप से गिरने की जानकारी मिली है। इसी नुकसान का वास्तविक आकलन करने के लिए राजस्व टीमों को मैदान में उतारा गया है। सर्वे से प्राप्त रिपोर्ट के आधार पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

बारिश का असर खास तौर पर उन खेतों में दिखाई दे रहा है जहां धान और बाजरा की फसल पकने की स्थिति में थी। तेज हवा और पानी के कारण कई जगह पौधे खेत में बिछ गए। किसानों के लिए यह स्थिति इसलिए भी मुश्किल है क्योंकि फसल गिर जाने के बाद उसकी कटाई प्रभावित हो सकती है और लंबे समय तक नमी रहने पर दाने की गुणवत्ता पर भी असर पड़ सकता है। स्थानीय रिपोर्टों में अलीगढ़ के ग्रामीण क्षेत्रों में धान, बाजरा और ज्वार की फसलों को नुकसान की जानकारी सामने आई है।

कुछ किसानों ने प्रशासन से नुकसान का जल्द से जल्द सर्वे कराकर राहत उपलब्ध कराने की मांग भी की है। किसानों का कहना है कि फसल तैयार होने के समय हुई बारिश से उनकी मेहनत पर असर पड़ा है। ऐसे में यदि खेत में हुई क्षति का सही तरीके से आकलन हो और समय पर सहायता मिले तो प्रभावित किसानों को आर्थिक दबाव से राहत मिल सकती है।

खैर तहसील क्षेत्र में भी फसल नुकसान का स्थलीय सर्वे कराया जा रहा है। एसडीएम एसके सिंह ने लेखपालों को अपने-अपने क्षेत्रों में जाकर फसलों को हुए नुकसान का आकलन करने और रिपोर्ट उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। तहसीलदार विमल कुमार ने भी कई गांवों का दौरा कर प्रभावित खेतों की स्थिति देखी और किसानों से नुकसान की जानकारी ली। अधिकारियों ने लेखपालों को सर्वे के बाद रिपोर्ट पोर्टल पर अपडेट करने के निर्देश दिए हैं।

प्रशासन ने किसानों से यह भी कहा है कि यदि किसी कारण से उनके खेत का सर्वे नहीं हो पाता है तो वे संबंधित अधिकारियों को इसकी सूचना दें, ताकि मामले की जांच कर फसल नुकसान का आकलन कराया जा सके। खैर क्षेत्र में तहसील प्रशासन की ओर से किसानों की शिकायतों के लिए सीयूजी नंबर भी जारी किए गए हैं।

वहीं अतरौली क्षेत्र में भारतीय किसान यूनियन के प्रतिनिधिमंडल ने भी प्रशासन के सामने फसल क्षति का मुद्दा उठाया है। संगठन की ओर से भारी बारिश से धान और बाजरा जैसी फसलों को हुए नुकसान के आधार पर किसानों को क्षतिपूर्ति और अन्य राहत देने की मांग की गई है। यह मांग किसानों के स्तर पर सामने आई है और इसे प्रशासन की सर्वे प्रक्रिया के संदर्भ में देखा जा रहा है।

इस समय सबसे महत्वपूर्ण काम खेत-खेत जाकर नुकसान का सही रिकॉर्ड तैयार करना है। यदि किसी किसान की फसल पूरी तरह गिर गई है और किसी अन्य किसान के खेत में केवल कुछ हिस्से में नुकसान हुआ है तो दोनों स्थितियों का अलग-अलग आकलन किया जाएगा। इसी तरह फसल के प्रकार और प्रभावित क्षेत्रफल को भी सर्वे में दर्ज किया जाएगा। इससे प्रशासन के पास वास्तविक नुकसान का आंकड़ा तैयार करने में मदद मिलेगी।

बारिश के बाद खेतों में पानी जमा होने की स्थिति भी कुछ इलाकों में किसानों के लिए परेशानी का कारण बनी है। लगातार नमी के कारण कटी हुई फसल के खराब होने का खतरा बढ़ जाता है। वहीं जमीन पर गिर चुकी खड़ी फसल की कटाई में भी अतिरिक्त मेहनत लग सकती है। ऐसे में किसान चाहते हैं कि सर्वे की प्रक्रिया जल्द पूरी हो, ताकि वास्तविक नुकसान सामने आ सके और पात्र किसानों को राहत उपलब्ध कराने की कार्रवाई में देरी न हो।

जिला प्रशासन ने बारिश की स्थिति पर निगरानी बनाए रखने के निर्देश भी दिए हैं। अधिकारियों के अनुसार जिले में फिलहाल कोई बड़ी जनहानि, पशुहानि या मकान क्षति की सूचना नहीं है। हालांकि फसलों को हुए नुकसान को लेकर राजस्व टीमें लगातार सक्रिय हैं। तहसील स्तर पर भी अधिकारियों को स्थिति पर नजर रखने और जरूरत के अनुसार कार्रवाई करने को कहा गया है।

किसानों के लिए सर्वे रिपोर्ट इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसी के आधार पर यह तय होगा कि किस क्षेत्र में कितनी फसल प्रभावित हुई और राहत के लिए किन किसानों को पात्र माना जाएगा। प्रशासन की ओर से कहा गया है कि सर्वे के आधार पर नियमानुसार मुआवजा उपलब्ध कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। इसलिए प्रभावित किसानों को अपने खेत और फसल से संबंधित जानकारी सही तरीके से उपलब्ध कराने के साथ-साथ सर्वे टीम के गांव में पहुंचने पर आवश्यक सहयोग करने की जरूरत है।

अलीगढ़ में बारिश से प्रभावित फसलों का सर्वे फिलहाल जारी है और मंगलवार सुबह भी लेखपालों की टीमें खेतों में पहुंचीं। आने वाले दिनों में अलग-अलग गांवों से प्राप्त रिपोर्ट के आधार पर नुकसान की तस्वीर और स्पष्ट होने की उम्मीद है। फिलहाल प्रशासन का फोकस फसल क्षति का वास्तविक आंकलन करने, रिपोर्ट तैयार करने और पात्र किसानों को नियमों के तहत राहत उपलब्ध कराने पर है।

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