अमेरिकी किसानों की शिकायतों के बाद राष्ट्रपति Donald Trump ने भारतीय चावल पर टैरिफ बढ़ाने के संकेत दिए हैं। मौजूदा लगभग 50% शुल्क और बढ़ सकता है, जिससे अमेरिकी बाजार में भारतीय चावल महंगा होकर मांग व निर्यात पर असर डाल सकता है।
Trump Tariff Plan: राष्ट्रपति Donald Trump ने भारत से निर्यात होने वाले चावल पर नए टैरिफ लगाने के स्पष्ट संकेत दिए हैं। व्हाइट हाउस में किसानों के साथ हुई बैठक के दौरान उन्होंने दावा किया कि भारत, चीन और थाईलैंड जैसे देश अमेरिकी बाजार में कम कीमत वाला चावल डंप कर रहे हैं, जिससे घरेलू किसानों को नुकसान हो रहा है। इसी संदर्भ में उन्होंने अमेरिकी किसानों के लिए 12 अरब डॉलर के बेलआउट पैकेज की घोषणा भी की।
किसानों की शिकायत के बाद टैरिफ बढ़ाने पर चर्चा
अमेरिकी किसानों के प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति से शिकायत की कि भारत सहित कई देशों से आने वाला सस्ता और सब्सिडी वाला चावल अमेरिकी बाजार की कीमतों को गिरा रहा है। किसानों ने कहा कि यह स्थिति उनके लिए नुकसानदेह है और सरकार को कठोर कदम उठाने चाहिए। एक कारोबारी मेरिल कैनेडी ने बताया कि भारत, थाईलैंड, चीन और प्यूर्टो रिको जैसे देशों से लगातार चावल भेजा जा रहा है, जिससे घरेलू चावल उद्योग दबाव में है।
मौजूदा टैरिफ पहले से 50 फीसदी के करीब
फिलहाल अमेरिका भारतीय चावल पर 25 फीसदी आयात शुल्क और 25 फीसदी पेनल्टी लगाता है, जिसके चलते कुल टैरिफ लगभग 50 फीसदी तक पहुँच चुका है। ट्रंप के नए संकेतों के बाद यह आशंका बढ़ गई है कि शुल्क इसमें भी इजाफा कर सकता है। अगर ऐसा हुआ तो भारतीय चावल पर कुल टैरिफ 50 फीसदी से ऊपर चला जाएगा, जिससे भारत का चावल अमेरिकी बाजार में और महंगा हो जाएगा।
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व्हाइट हाउस बैठक में क्या हुई बातचीत
व्हाइट हाउस में हुई बैठक के दौरान जब कारोबारी मेरिल कैनेडी ने राष्ट्रपति ट्रंप को बताया कि भारत, थाईलैंड, चीन और प्यूर्टो रिको जैसे देश अमेरिका में कम कीमत वाला चावल भेज रहे हैं, तो ट्रंप ने तुरंत पूछा कि यह कैसे हो रहा है और कौन-कौन से देश ऐसा कर रहे हैं। कैनेडी ने बताया कि प्यूर्टो रिको पहले अमेरिकी चावल का बड़ा बाजार था, लेकिन अब विदेशी चावल की वजह से अमेरिकी किसानों का बाजार हिस्सा कम हो गया है। इस पर ट्रंप ने कहा कि भारत को इस तरह चावल डंप करने की अनुमति नहीं दी जा सकती और उसे टैरिफ देना होगा।
सरकार करेगी दावों की जांच
बैठक में मौजूद वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने बताया कि किसी भी देश को चावल पर छूट नहीं दी गई है और अमेरिका फिलहाल एक नई ट्रेड डील पर काम कर रहा है। ट्रंप ने कहा कि वे इस बात की जांच करवाएंगे कि क्या वास्तव में विदेशी देश कम कीमत वाला चावल अमेरिकी बाजार में बेचकर घरेलू किसानों को नुकसान पहुँचा रहे हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि कई देशों द्वारा की जा रही ऐसी गतिविधियाँ धोखाधड़ी की श्रेणी में आती हैं और अमेरिका इस पर सख्त रुख अपनाने को तैयार है।
उर्वरक आयात पर भी सख्त रुख संभव
बैठक में ट्रंप ने कहा है कि चावल के अलावा अमेरिका कनाडा से आयातित उर्वरकों पर भी कड़े शुल्क लगाने पर विचार कर सकता है। उनका कहना था कि इस कदम का उद्देश्य अमेरिकी उत्पादन को बढ़ावा देना है ताकि अमेरिकी किसान विदेशी आयात पर निर्भर न रहें।
भारत के लिए बढ़ सकती है चुनौती
भारत दुनिया का सबसे बड़ा चावल निर्यातक देश है और अमेरिका उसका एक महत्वपूर्ण बाजार है। यदि अमेरिकी सरकार टैरिफ बढ़ाती है तो भारतीय चावल अमेरिकी बाजार में महंगा हो जाएगा, जिससे उसकी मांग कम हो सकती है। इससे भारतीय निर्यातकों को आर्थिक झटका लग सकता है और भारत को वैकल्पिक बाजार खोजने की जरूरत पड़ सकती है।









