आंध्र प्रदेश: नामांकन में बाधा के आरोपों पर SEC कार्यालय पहुंची YSRCP, प्रदर्शन के बाद मिला मिलने का समय

आंध्र प्रदेश में ZPTC-MPTC चुनावों के नामांकन में बाधा डालने का आरोप लगाकर YSRCP नेताओं ने राज्य चुनाव आयोग के कार्यालय पर विरोध प्रदर्शन किया। जाँच की मांग की

आंध्र प्रदेश में ZPTC और MPTC चुनावों के नामांकन में कथित बाधा को लेकर YSRCP नेताओं ने गुरुवार को राज्य चुनाव आयोग के कार्यालय पर प्रदर्शन किया। पार्टी ने उम्मीदवारों की सुरक्षा और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के पालन की मांग उठाई।

अमरावती: आंध्र प्रदेश में ZPTC और MPTC चुनावों के नामांकन में कथित बाधा के विरोध में YSRCP नेताओं ने गुरुवार को राज्य चुनाव आयोग के कार्यालय पर प्रदर्शन किया। पार्टी ने TDP कार्यकर्ताओं पर पुलिस की मिलीभगत से उम्मीदवारों को नामांकन दाखिल करने से रोकने का आरोप लगाया। राज्य चुनाव आयुक्त से मुलाकात का समय नहीं मिलने पर शुरू हुआ प्रदर्शन बाद में बैठक का समय मिलने के बाद समाप्त हुआ। YSRCP ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के पालन और उम्मीदवारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की।

दूसरे दिन भी आयोग पहुंचा प्रतिनिधिमंडल

YSRCP के नेताओं का कहना है कि नामांकन प्रक्रिया के दौरान उनके उम्मीदवारों को कई जगहों पर रोका गया। पार्टी ने आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ तेलुगु देशम पार्टी (TDP) के कार्यकर्ता पुलिस की कथित मिलीभगत से विपक्षी उम्मीदवारों को पर्चा दाखिल करने से रोक रहे हैं। YSRCP के मुताबिक, कुछ उम्मीदवारों के खिलाफ अवैध गिरफ्तारी और नजरबंदी का सहारा लिया गया, जबकि नामांकन जमा कराने पहुंचे लोगों पर हमले भी हुए।

पार्टी के नेताओं ने गुरुवार को लगातार दूसरे दिन राज्य चुनाव आयोग से संपर्क किया। उनका उद्देश्य आयोग के सामने शिकायतें रखना और चुनाव प्रक्रिया में उम्मीदवारों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए हस्तक्षेप की मांग करना था। शुरुआत में राज्य चुनाव आयुक्त अनिल चंद्र पुनेठा से मुलाकात का समय नहीं मिलने पर प्रतिनिधिमंडल ने आयोग के कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया। इसके बाद नेताओं को मिलने का समय दिया गया।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का हवाला

YSRCP के एमएलसी लेल्ला अप्पी रेड्डी ने मीडिया से बातचीत में कहा कि पार्टी ने उम्मीदवारों को नामांकन दाखिल करने से रोके जाने के मामलों को लेकर सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। उनके अनुसार, अदालत ने नामांकन दाखिल करने वाले उम्मीदवारों को सुरक्षा देने के निर्देश दिए हैं, लेकिन इसके बावजूद पार्टी के प्रत्याशियों को परेशान किए जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं।

रेड्डी ने दावा किया कि कुछ स्थानों पर उम्मीदवारों के नामांकन पत्र छीनकर फाड़ दिए गए। उन्होंने चित्तूर की एक कथित घटना का भी उल्लेख किया, जहां नगर निगम चुनाव के लिए पार्टी के अधिकृत उम्मीदवारों से जुड़े बी-फॉर्म फाड़े जाने का आरोप लगाया गया। बी-फॉर्म पार्टी की ओर से उम्मीदवार को अधिकृत किए जाने का दस्तावेज होता है।

नामांकन प्रक्रिया पर सुप्रीम कोर्ट की निगरानी

नामांकन को लेकर उठे विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट ने 21 अक्टूबर को आंध्र प्रदेश राज्य चुनाव आयोग को निर्देश दिया था कि वह उम्मीदवारों की शिकायतों और उपलब्ध दस्तावेजी व इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों पर विचार करे। अदालत ने अंतिम उम्मीदवार सूची के प्रकाशन को 25 अक्टूबर तक टालने को कहा और उन क्षेत्रों में नामांकन की समयसीमा बढ़ाने के अनुरोध पर निर्णय लेने का निर्देश दिया, जहां कानून-व्यवस्था की समस्या के कारण उम्मीदवार पर्चा दाखिल नहीं कर सके।

अदालत ने राज्य के पुलिस महानिदेशक को भी उम्मीदवारों और नामांकन केंद्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने को कहा। हालांकि, अदालत के निर्देशों का अर्थ यह नहीं है कि YSRCP की ओर से लगाए गए सभी आरोप साबित हो गए हैं। आयोग को शिकायतों और उपलब्ध साक्ष्यों की जांच के आधार पर निर्णय लेना है।

इस बीच, राज्य चुनाव आयोग ने 22 अक्टूबर को चार शहरी स्थानीय निकायों में नामांकन के लिए अतिरिक्त अवसर देने का फैसला किया। आयोग की अधिसूचना के अनुसार, संबंधित क्षेत्रों में 23 और 24 अक्टूबर को सुबह 11 बजे से दोपहर 3 बजे तक नामांकन दाखिल किए जा सकेंगे। यह व्यवस्था उन उम्मीदवारों को मौका देने के उद्देश्य से की गई है, जो कथित धमकी, हमले या अन्य प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण पहले पर्चा जमा नहीं कर पाए थे।

YSRCP की शिकायतों और आयोग के फैसलों के बीच अब निगाहें इस बात पर हैं कि संबंधित अधिकारियों की रिपोर्ट और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे क्या कदम उठाए जाते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में अगली सुनवाई 27 अक्टूबर को निर्धारित की है।

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