उत्तराखंड हाईकोर्ट ने अंकिता भंडारी हत्याकांड में उम्रकैद की सजा पाए दोषियों को अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया। अदालत ने सजा पर रोक और जमानत की मांग खारिज करते हुए मामले की अगली सुनवाई 20 जुलाई तय की है।
Nainital: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने अंकिता भंडारी हत्याकांड में दोषी करार दिए गए पुलकित आर्य, सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता को फिलहाल कोई अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया है। दोषियों ने निचली अदालत के फैसले को चुनौती देते हुए सजा पर रोक और जमानत की मांग की थी, लेकिन अदालत ने इसे स्वीकार नहीं किया।
हाईकोर्ट ने अंतरिम राहत देने से किया इनकार
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड में दोषियों की ओर से दाखिल अपील पर सुनवाई करते हुए उन्हें तत्काल राहत देने से इनकार कर दिया। न्यायमूर्ति रवींद्र मैठाणी और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ साह की खंडपीठ ने दोषियों की सजा पर रोक लगाने और जमानत देने की मांग स्वीकार नहीं की। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 20 जुलाई तय की है।
दोषियों ने निचली अदालत द्वारा सुनाई गई आजीवन कारावास की सजा और दोषसिद्धि को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। फिलहाल अदालत ने उन्हें जेल से रिहाई की कोई अंतरिम राहत नहीं दी है।
दोषियों और सरकार ने रखीं अपनी-अपनी दलीलें
सुनवाई के दौरान दोषियों की ओर से दलील दी गई कि अंकिता भंडारी की मौत आत्महत्या का मामला था और घटना का कोई प्रत्यक्ष चश्मदीद गवाह मौजूद नहीं है। इसी आधार पर सजा को निलंबित कर जमानत दिए जाने की मांग की गई।
वहीं राज्य सरकार और पीड़ित परिवार ने इस याचिका का कड़ा विरोध किया। सरकारी पक्ष ने अदालत को बताया कि घटना के बाद सबूतों से छेड़छाड़ के गंभीर आरोप सामने आए थे। आरोप है कि रिजॉर्ट के कुछ हिस्सों को तोड़ा गया, सीसीटीवी फुटेज और डीवीआर के साथ छेड़छाड़ की गई तथा महत्वपूर्ण साक्ष्यों को नष्ट करने का प्रयास किया गया। सरकार ने यह भी कहा कि फोरेंसिक रिपोर्ट और व्हाट्सएप चैट जैसे डिजिटल साक्ष्य आरोपियों को अपराध से जोड़ते हैं।
निचली अदालत ने सुनाई थी उम्रकैद की सजा
कोटद्वार की जिला अदालत ने 30 मई 2025 को इस मामले में फैसला सुनाते हुए पुलकित आर्य, सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता को हत्या, मारपीट और सबूत मिटाने सहित भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी ठहराया था। अदालत ने तीनों आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।
मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष ने अदालत के समक्ष 47 गवाहों के बयान दर्ज कराए थे। इन्हीं साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर निचली अदालत ने दोषसिद्धि का फैसला दिया था।
20 जुलाई को होगी अगली सुनवाई
अब दोषियों की अपील पर हाईकोर्ट में नियमित सुनवाई जारी रहेगी। अगली सुनवाई 20 जुलाई को निर्धारित की गई है, जिसमें अदालत दोषसिद्धि और सजा को चुनौती देने वाली अपील पर आगे विचार करेगी। तब तक निचली अदालत द्वारा सुनाई गई आजीवन कारावास की सजा प्रभावी रहेगी और दोषियों को कोई अंतरिम राहत नहीं मिलेगी।











