सीकर के चर्चित मनीष भामू हत्याकांड में एडीजे कोर्ट-2 ने आरोपी पुलिस कॉन्स्टेबल प्रदीप सिंह उर्फ मुकेश की जमानत खारिज कर दी। अभियोजन के अनुसार, वह घटना वाली रात मृतक के साथ था और हत्या की साजिश में उसकी भूमिका की जांच जारी है
सीकर: राजस्थान के सीकर जिले में चर्चित मनीष भामू हत्याकांड में अदालत ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए आरोपी पुलिस कॉन्स्टेबल प्रदीप सिंह उर्फ मुकेश की जमानत याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और जांच के दौरान सामने आए तथ्यों को देखते हुए राहत देने से इनकार कर दिया। अभियोजन पक्ष का कहना है कि घटना वाली पूरी रात आरोपी कॉन्स्टेबल मृतक मनीष भामू के साथ मौजूद था। जांच एजेंसियों के अनुसार, यह हत्या करोड़ों रुपये के जमीन विवाद और दो आपराधिक गिरोहों के बीच समझौता कराने की कोशिश से जुड़ी हुई है।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला 29 सितंबर 2025 की रात का है। अगले दिन 30 सितंबर को सीकर के उद्योग नगर थाने में मृतक के परिजन प्यारेलाल ने हत्या का मामला दर्ज कराया था।
शिकायत के अनुसार, मनीष भामू को महिपाल नामक व्यक्ति नवलगढ़ रोड स्थित एक होटल के पास से अपनी गाड़ी में बैठाकर रानोली ले गया। वहां कथित रूप से एक शराब पार्टी आयोजित की गई थी, जिसमें कई लोग मौजूद थे। पुलिस जांच के अनुसार, इसी पार्टी के बाद घटनाक्रम ने गंभीर मोड़ लिया और बाद में मनीष की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई।
जमीन विवाद बना हत्या की कथित वजह
जांच में सामने आया कि मनीष भामू दो प्रभावशाली समूहों के बीच चल रहे करोड़ों रुपये के जमीन विवाद में समझौता कराने का प्रयास कर रहा था। बताया गया कि विवाद को सुलझाने के लिए उसने अपनी लगभग पांच बीघा जमीन भी गिरवी रखी थी। अभियोजन पक्ष का दावा है कि इसी कारण कुछ लोगों में उसके प्रति नाराजगी बढ़ गई थी और यही आगे चलकर हत्या की कथित वजह बनी। हालांकि, इस पूरे विवाद की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगी।
शराब पार्टी के बाद बदल गया घटनाक्रम
एफआईआर के अनुसार, शराब पार्टी के दौरान मनीष से उसके रिश्तेदार को फोन कर फॉर्च्यूनर वाहन मंगवाने के लिए कहा गया। जब पता चला कि वाहन खिरोड़ गांव में है, तब मनीष और अन्य आरोपी वहां पहुंचे और गाड़ी लेकर जयपुर के लिए रवाना हुए। अभियोजन का आरोप है कि यात्रा के दौरान मनीष को लगातार शराब पिलाई गई। अगले दिन सुबह उसके निधन की सूचना परिजनों को मिली, जिसके बाद पूरे मामले ने हत्या के केस का रूप ले लिया।
पुलिस जांच में सामने आए गंभीर आरोप
जांच एजेंसियों के अनुसार, मनीष भामू को जयपुर के एक फार्महाउस ले जाया गया, जहां उसके साथ गंभीर अपराध किए जाने का आरोप है। अभियोजन पक्ष ने अदालत में कहा कि आरोपी कॉन्स्टेबल प्रदीप सिंह समेत अन्य आरोपियों ने कथित रूप से मनीष को जहरीला पदार्थ दिया और बाद में उसके शव को फार्महाउस के स्विमिंग पूल में डाल दिया, ताकि घटना को सामान्य मौत या दुर्घटना की तरह दिखाया जा सके। हालांकि, इन आरोपों की अंतिम पुष्टि अदालत में चल रही सुनवाई और साक्ष्यों के परीक्षण के बाद ही होगी।

घटना वाली रात कॉन्स्टेबल की मौजूदगी बनी अहम आधार
जमानत का विरोध करते हुए अभियोजन पक्ष ने अदालत को बताया कि आरोपी कॉन्स्टेबल पूरी रात मृतक के साथ था। जांच में उसके मोबाइल लोकेशन, अन्य परिस्थितिजन्य साक्ष्य और घटनाक्रम को महत्वपूर्ण माना गया। अभियोजन ने दलील दी कि आरोपी की भूमिका प्रथम दृष्टया गंभीर दिखाई देती है, इसलिए उसे जमानत देना जांच और मुकदमे की निष्पक्षता को प्रभावित कर सकता है। इन्हीं तर्कों के आधार पर अदालत ने आरोपी को राहत देने से इनकार कर दिया।
बचाव पक्ष ने क्या दलील दी?
आरोपी कॉन्स्टेबल के वकील ने अदालत में कहा कि उनके मुवक्किल को झूठा फंसाया गया है। बचाव पक्ष का कहना था कि मनीष भामू पहले से शराब पीने का आदी था और उसकी मृत्यु के पीछे अन्य कारण भी हो सकते हैं। इसके अलावा यह भी दलील दी गई कि लंबे समय से जेल में रहने के कारण आरोपी के परिवार को आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। बचाव पक्ष ने इन आधारों पर जमानत देने की मांग की, लेकिन अदालत इन दलीलों से संतुष्ट नहीं हुई।
अदालत ने क्यों खारिज की जमानत?
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सीकर की एडीजे कोर्ट-2 की न्यायाधीश डॉ. वीनू नागपाल ने जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत ने माना कि मामले की गंभीरता, आरोपी की कथित भूमिका और जांच के दौरान सामने आए तथ्यों को देखते हुए इस स्तर पर जमानत देना उचित नहीं होगा। इस फैसले के बाद आरोपी कॉन्स्टेबल फिलहाल न्यायिक हिरासत में ही रहेगा।
हत्या की जांच अभी भी जारी
पुलिस का कहना है कि मामले की जांच अभी पूरी नहीं हुई है। जांच एजेंसियां इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य, कॉल रिकॉर्ड, फोरेंसिक रिपोर्ट और अन्य दस्तावेजों के आधार पर पूरे घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ रही हैं। जांच अधिकारियों का उद्देश्य यह स्पष्ट करना है कि हत्या की साजिश कैसे बनी, इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही और घटना को अंजाम देने की पूरी योजना क्या थी।
प्रदेश में चर्चित बना हुआ है मामला
मनीष भामू हत्याकांड राजस्थान के चर्चित आपराधिक मामलों में शामिल हो चुका है। इस मामले में कथित तौर पर जमीन विवाद, आपराधिक गिरोहों के बीच तनाव, समझौते की कोशिश और पुलिसकर्मी की गिरफ्तारी जैसे कई संवेदनशील पहलू जुड़े हुए हैं। इसी वजह से यह मामला लगातार सार्वजनिक और कानूनी चर्चा का विषय बना हुआ है।
आगे क्या होगा?
अब इस मामले में पुलिस अपनी जांच पूरी कर अदालत में अतिरिक्त साक्ष्य और दस्तावेज प्रस्तुत करेगी। इसके बाद आरोप तय होने और गवाहों के बयान दर्ज होने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
फिलहाल अदालत द्वारा जमानत याचिका खारिज किए जाने के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने तक आरोपी को राहत मिलने की संभावना सीमित मानी जा रही है। वहीं अंतिम निर्णय अदालत में प्रस्तुत सभी साक्ष्यों और सुनवाई के बाद ही होगा।










