असम के वन मंत्री जयंत मल्लाबरुआ ने विभागीय बैठक में पारदर्शिता, ईमानदारी और बेहतर प्रदर्शन पर जोर दिया। उन्होंने भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी और वन विभाग में राजस्व वृद्धि और प्रशासनिक सुधार पर चर्चा की।
गुवाहाटी: असम सरकार के वन मंत्री Jayanta Mallabaruah ने राज्य के वन विभाग में कार्यप्रणाली को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और परिणामोन्मुख बनाने पर जोर दिया है। गुवाहाटी के खानापाड़ा स्थित असम एडमिनिस्ट्रेटिव स्टाफ कॉलेज में आयोजित एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान उन्होंने अधिकारियों और कर्मचारियों को स्पष्ट संदेश दिया कि विभाग की पहचान ईमानदारी, दक्षता और प्रदर्शन के आधार पर होनी चाहिए।
इस बैठक में असम के सभी क्षेत्रीय वन मंडलों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए और विभागीय गतिविधियों, उपलब्धियों तथा भविष्य की रणनीतियों पर विस्तृत चर्चा की गई।
वन संरक्षण और अतिक्रमण विरोधी अभियान पर सरकार का फोकस
बैठक के दौरान मंत्री ने वन विभाग द्वारा किए जा रहे कार्यों की सराहना की, विशेषकर वन भूमि संरक्षण और अतिक्रमण हटाने के अभियानों को लेकर। उन्होंने कहा कि राज्य में वन संसाधनों की सुरक्षा केवल प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं बल्कि पर्यावरणीय संतुलन के लिए भी अत्यंत आवश्यक है।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वन भूमि पर अवैध कब्जों के खिलाफ अभियान को और अधिक प्रभावी बनाया जाए तथा किसी भी स्तर पर ढिलाई न बरती जाए। सरकार का उद्देश्य प्राकृतिक संसाधनों को संरक्षित करते हुए विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन स्थापित करना है।
भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस: सख्त चेतावनी
मंत्री जयंत मल्लाबरुआह ने बैठक में भ्रष्टाचार को लेकर बेहद सख्त रुख अपनाया। उन्होंने स्पष्ट किया कि विभाग में ट्रांसफर और पोस्टिंग के नाम पर किसी भी प्रकार की अनियमितता या धन लेन-देन को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी दी कि यदि कोई व्यक्ति राजनीतिक नेताओं या वरिष्ठ अधिकारियों के नाम का दुरुपयोग कर अवैध रूप से पैसे की मांग करता है या लेता है, तो उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।
मंत्री ने कहा कि वन विभाग की विश्वसनीयता तभी बनी रह सकती है जब हर स्तर पर पारदर्शिता और नैतिकता का पालन किया जाए। उन्होंने अधिकारियों को ऐसे मामलों की तुरंत रिपोर्ट करने के निर्देश भी दिए।
राजस्व बढ़ाने की रणनीति पर विस्तृत मंथन
बैठक का एक महत्वपूर्ण हिस्सा विभाग के राजस्व को बढ़ाने से संबंधित रणनीतियों पर केंद्रित रहा। मंत्री ने कहा कि असम वन विभाग में बेहतर प्रबंधन, निगरानी और संसाधनों के कुशल उपयोग से राजस्व वृद्धि की बड़ी संभावनाएं मौजूद हैं।
उन्होंने राजस्व संग्रह में मौजूद प्रणालीगत बाधाओं (systemic bottlenecks) की पहचान करने और उन्हें दूर करने पर जोर दिया। इसके साथ ही राजस्व में होने वाली लीकेज को रोकने के लिए सख्त निगरानी तंत्र विकसित करने की आवश्यकता पर भी चर्चा की गई।

विभागीय समन्वय को मजबूत करने पर जोर
बैठक में केवल वन विभाग ही नहीं बल्कि कराधान (Taxation) और परिवहन (Transport) विभाग के अधिकारी भी शामिल हुए। इसका उद्देश्य विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर राज्य के राजस्व तंत्र को मजबूत करना था।
मंत्री ने कहा कि जब विभिन्न विभाग मिलकर काम करते हैं तो न केवल प्रशासनिक दक्षता बढ़ती है बल्कि राजस्व संग्रह भी अधिक प्रभावी होता है। उन्होंने संयुक्त रणनीतियों के माध्यम से विकास कार्यों को गति देने पर बल दिया।
अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई और प्रशासनिक दृढ़ता
असम में वन भूमि पर अतिक्रमण एक लंबे समय से चुनौती रहा है। सरकार द्वारा चलाए जा रहे अभियान के तहत कई क्षेत्रों में अवैध कब्जों को हटाया गया है। मंत्री ने कहा कि यह अभियान आगे भी जारी रहेगा और किसी भी दबाव में इसे रोका नहीं जाएगा।
उन्होंने अधिकारियों से कहा कि कानून का पालन सुनिश्चित करना उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी है और इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।
ट्रांसफर और सेवा अनुशासन पर स्पष्ट निर्देश
मंत्री ने अधिकारियों को यह भी याद दिलाया कि सरकारी सेवा में ट्रांसफर एक सामान्य प्रक्रिया है और इसे अनुशासन का हिस्सा माना जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी अधिकारी को अपनी पोस्टिंग को लेकर असंतोष या अनावश्यक दबाव नहीं बनाना चाहिए।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सभी कर्मचारियों को अपने कार्यस्थल पर ईमानदारी से कार्य करना चाहिए और जहां भी उनकी पोस्टिंग हो, वहां पूरी निष्ठा से अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करना चाहिए।
ईमानदारी और दक्षता से ही बढ़ेगी विभाग की साख
बैठक में मंत्री ने दोहराया कि वन विभाग की साख तभी मजबूत होगी जब अधिकारी और कर्मचारी अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से पालन करेंगे। उन्होंने कहा कि पारदर्शिता, जवाबदेही और प्रदर्शन आधारित कार्य संस्कृति को अपनाना समय की आवश्यकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि विभाग बेहतर ढंग से काम करता है तो न केवल पर्यावरण संरक्षण मजबूत होगा बल्कि राज्य के विकास में भी इसका महत्वपूर्ण योगदान होगा।











