असम के कामरूप जिले की एक अदालत ने 1995 में जादू-टोना करने के संदेह में 80 वर्षीय महिला की हत्या के मामले में छह दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। अदालत ने साक्ष्य नष्ट करने के लिए अतिरिक्त पांच साल की सजा भी दी।
गुवाहाटी: असम के कामरूप जिले की एक अदालत ने करीब तीन दशक पुराने हत्या के मामले में छह लोगों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। मामला 1995 में 80 वर्षीय महिला की जादू-टोना करने के संदेह में हत्या से जुड़ा है। रंगिया के अतिरिक्त सत्र एवं जिला न्यायाधीश मुकुल चेतिया ने सभी छह दोषियों को हत्या के लिए भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 302 के तहत उम्रकैद की सजा सुनाई। अदालत ने साक्ष्य नष्ट करने के मामले में भी प्रत्येक दोषी को अतिरिक्त पांच साल की सजा सुनाई है। यह फैसला मामले की लंबी न्यायिक प्रक्रिया के करीब 31 साल बाद आया है। इसके साथ ही 1995 में हुई इस हत्या से जुड़े लंबे समय से लंबित मामले का निष्कर्ष सामने आया है।
जादू-टोने के संदेह में 80 वर्षीय महिला की हत्या
मामले की पीड़िता की पहचान मारिया बोरो के रूप में हुई है। आरोप के अनुसार, 1995 में जादू-टोना करने के संदेह में उनके साथ मारपीट की गई थी। घटना असम के कामरूप जिले के बोर्डांगरिकुची गांव की बताई गई है। यह इलाका उस समय बैहाटा चारियाली पुलिस थाने के अधिकार क्षेत्र में आता था।
आरोप के अनुसार, मारिया बोरो को कथित तौर पर पीटा गया और बाद में आग लगा दी गई। इसके बाद उनके आधे जले शव को उनके घर के पास ही दफना दिया गया। घटना के बाद सामने आए मामले ने लंबे समय तक न्यायिक प्रक्रिया का सामना किया। अब अदालत ने छह आरोपियों को हत्या का दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है।
हत्या के लिए IPC की धारा 302 के तहत सजा
रंगिया अतिरिक्त सत्र एवं जिला न्यायाधीश मुकुल चेतिया की अदालत ने छह दोषियों को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत उम्रकैद की सजा दी। धारा 302 हत्या के अपराध से संबंधित है। अदालत ने हत्या की सजा के अतिरिक्त साक्ष्य नष्ट करने के लिए भी पांच साल की अतिरिक्त सजा सुनाई।
इस तरह अदालत के फैसले में हत्या और घटना से जुड़े साक्ष्यों को नष्ट करने, दोनों पहलुओं को शामिल किया गया है। यह मामला उस समय का है जब भारतीय दंड संहिता लागू थी। अदालत का फैसला उसी कानून की धारा 302 के तहत सुनाया गया है, जैसा कि मामले में लागू था।
31 साल बाद खत्म हुआ लंबित मामला
इस मामले में अदालत का फैसला हत्या की घटना के लगभग 31 साल बाद आया है। इतने लंबे समय तक लंबित रहने के बाद अब छह दोषियों को उम्रकैद की सजा मिलने के साथ मुकदमे का निष्कर्ष सामने आया है। 1995 में हुई घटना में एक बुजुर्ग महिला को जादू-टोना करने के संदेह में निशाना बनाया गया था। आरोप के अनुसार, उनके साथ हिंसा की गई, उन्हें जलाया गया और उनके आधे जले शव को घर के पास दफना दिया गया। तीन दशक से अधिक समय बाद आया फैसला मामले की न्यायिक प्रक्रिया के लंबे समय तक चलने को भी दर्शाता है।
जादू-टोने के संदेह ने लिया हिंसक रूप
मामले में हत्या की कथित वजह जादू-टोना करने का संदेह बताया गया है। आरोप के अनुसार, इसी संदेह के आधार पर 80 वर्षीय मारिया बोरो के खिलाफ हिंसा की गई।
घटना में पहले उनके साथ कथित तौर पर मारपीट की गई और फिर उन्हें आग के हवाले कर दिया गया। इसके बाद उनके आधे जले शव को घर के नजदीक दफना दिया गया।
अदालत के फैसले के बाद इस पुराने मामले में छह लोगों को हत्या का दोषी ठहराया गया और सभी को उम्रकैद की सजा दी गई। साक्ष्य नष्ट करने के अपराध के लिए भी पांच साल की अतिरिक्त सजा सुनाई गई।
अदालत के फैसले में दोनों अपराधों पर कार्रवाई
अदालत ने केवल हत्या के आरोप पर ही सजा नहीं सुनाई, बल्कि साक्ष्य नष्ट करने के मामले में भी अतिरिक्त दंड दिया है। छह दोषियों को IPC की धारा 302 के तहत उम्रकैद के साथ साक्ष्य नष्ट करने के लिए पांच साल की अतिरिक्त सजा मिली है।
इस फैसले के साथ 1995 में हुई मारिया बोरो की हत्या से संबंधित लंबे समय से लंबित मामला समाप्त हो गया है।
अदालत का फैसला ऐसे मामले में आया है जिसमें एक बुजुर्ग महिला को जादू-टोना करने के संदेह में कथित तौर पर निशाना बनाया गया था। घटना के समय उनकी उम्र 80 वर्ष थी।
कामरूप जिले के गांव में हुई थी घटना
यह मामला कामरूप जिले के बोर्डांगरिकुची गांव का है। घटना बैहाटा चारियाली पुलिस थाने के अंतर्गत आने वाले क्षेत्र में हुई थी।
मारिया बोरो का आधा जला शव उनके घर के पास दफन पाया गया था। मामले में सामने आए आरोपों के अनुसार, उन्हें पहले पीटा गया और फिर जला दिया गया था।
करीब 31 वर्ष बाद अदालत ने मामले में अपना फैसला सुनाया। रंगिया के अतिरिक्त सत्र एवं जिला न्यायाधीश मुकुल चेतिया ने छह दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई।
लंबे समय बाद मिला न्यायिक निष्कर्ष
इस मामले में अदालत का फैसला लगभग तीन दशक पुरानी हत्या की घटना के लिए न्यायिक प्रक्रिया का निष्कर्ष है। 1995 में हुई इस घटना में 80 वर्षीय मारिया बोरो की जान चली गई थी।
अदालत के फैसले के अनुसार, छह दोषियों को हत्या के लिए उम्रकैद और साक्ष्य नष्ट करने के लिए अतिरिक्त पांच साल की सजा भुगतनी होगी।
मामले की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि घटना के 31 साल बाद अदालत ने छह लोगों को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई। जादू-टोने के संदेह में हुई महिला की हत्या से जुड़ा यह मामला अब अदालत के फैसले के साथ समाप्त हो गया है।









