Aurobindo Pharma ने मंगलवार को घोषणा की कि उसका ₹800 करोड़ का शेयर बायबैक ऑफर 23 अप्रैल से खुल जाएगा और 29 अप्रैल को बंद होगा। कंपनी ने नियामकीय फाइलिंग में बताया कि यह बायबैक टेंडर ऑफर रूट के जरिए और प्रोपोर्शनल आधार पर किया जाएगा।
बिजनेस न्यूज़: भारतीय फार्मा कंपनी Aurobindo Pharma ने अपने निवेशकों के लिए ₹800 करोड़ के शेयर बायबैक कार्यक्रम की घोषणा की है, जो 23 अप्रैल 2026 से शुरू होकर 29 अप्रैल 2026 तक खुला रहेगा। कंपनी की नियामकीय फाइलिंग के अनुसार, यह कदम शेयरधारकों के लिए मूल्य सृजन (value unlocking) और वित्तीय दक्षता बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा है।
कंपनी के बोर्ड ने इससे पहले 6 अप्रैल 2026 को इस बायबैक योजना को मंजूरी दी थी। इस योजना के तहत ₹1 अंकित मूल्य वाले अधिकतम 54,23,728 पूरी तरह चुकता इक्विटी शेयर ₹1,475 प्रति शेयर की कीमत पर वापस खरीदे जाएंगे। यह बायबैक “टेंडर ऑफर” रूट के माध्यम से प्रोपोर्शनल आधार पर किया जाएगा।
रिकॉर्ड डेट और पात्रता: किन निवेशकों को मिलेगा मौका
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कंपनी ने 17 अप्रैल 2026 को रिकॉर्ड डेट तय की है। इसका मतलब है कि जिन निवेशकों के पास इस तारीख तक कंपनी के शेयर होंगे, वही इस बायबैक ऑफर में भाग लेने के पात्र होंगे। यह प्रक्रिया निवेशकों को अपनी होल्डिंग का एक हिस्सा कंपनी को बेचने का अवसर देती है, जिससे उन्हें आकर्षक कीमत पर नकद रिटर्न मिल सकता है। आमतौर पर बायबैक ऑफर का प्राइस बाजार मूल्य से अधिक रखा जाता है, जिससे निवेशकों को अतिरिक्त लाभ मिलता है।
कंपनी की फाइलिंग के अनुसार, यह बायबैक उसके कुल चुकता शेयर पूंजी और फ्री रिजर्व का लगभग 3.93% (स्टैंडअलोन आधार पर) और 2.62% (कंसोलिडेटेड आधार पर) हिस्सा है, जैसा कि 31 मार्च 2025 तक के ऑडिटेड वित्तीय आंकड़ों में दर्शाया गया है। Aurobindo Pharma ने अपने शेयरधारकों को भेजे गए पत्र में स्पष्ट किया कि इस बायबैक का मुख्य उद्देश्य निवेशकों को बेहतर रिटर्न प्रदान करना है।
इसके अलावा, इस कदम से कंपनी के प्रमुख वित्तीय अनुपातों—जैसे प्रति शेयर आय (EPS), रिटर्न ऑन नेटवर्थ (RoNW) और रिटर्न ऑन एसेट्स (RoA)—में सुधार होने की संभावना है।
शेयर बायबैक क्या होता है? आसान भाषा में समझें
शेयर बायबैक एक कॉर्पोरेट रणनीति है, जिसमें कंपनी अपने ही शेयर बाजार से या सीधे निवेशकों से वापस खरीदती है। यह प्रक्रिया आमतौर पर दो तरीकों से की जाती है—टेंडर ऑफर या ओपन मार्केट के जरिए। जब कंपनी अपने शेयर वापस खरीदती है, तो बाजार में उपलब्ध कुल शेयरों की संख्या कम हो जाती है। इसका सीधा असर यह होता है कि बाकी बचे शेयरधारकों की हिस्सेदारी बढ़ जाती है। इसके साथ ही, कंपनी के प्रति शेयर आय (EPS) में भी वृद्धि हो सकती है, क्योंकि कुल शेयरों की संख्या घट जाती है।
बायबैक ऑफर निवेशकों के लिए कई मायनों में लाभकारी हो सकता है। सबसे पहले, उन्हें बाजार कीमत से अधिक दर पर अपने शेयर बेचने का मौका मिलता है। दूसरा, जिन निवेशकों के शेयर बायबैक में शामिल नहीं होते, उनकी हिस्सेदारी प्रतिशत के रूप में बढ़ जाती है।








