बागेश्वर के बनेगांव में धार्मिक अनुष्ठान के दौरान तेज आंधी से एक सूखा चीड़ का पेड़ मकान पर गिर गया। हादसे में घर क्षतिग्रस्त हो गया, कुछ लोग घायल हुए और प्रभावित परिवार के सामने आवास का संकट खड़ा हो गया।
बागेश्वर: कमस्यार घाटी के बनेगांव में एक धार्मिक कार्यक्रम के दौरान बड़ा हादसा हो गया। तेज आंधी के बीच एक विशाल सूखा चीड़ का पेड़ घर पर गिर पड़ा, जिससे मकान का बड़ा हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया। घटना के समय घर में पूजा-अर्चना चल रही थी। हादसे में कुछ लोग घायल हुए हैं और प्रभावित परिवार अब राहत एवं सहायता की उम्मीद लगाए बैठा है।
धार्मिक आयोजन के बीच अचानक हुआ हादसा
मंगलवार शाम बनेगांव निवासी बंशीधर कांडपाल के घर धार्मिक अनुष्ठान चल रहा था। घर में परिवार के सदस्य और अन्य लोग पूजा-पाठ में शामिल थे। इसी दौरान अचानक मौसम बदला और तेज हवा चलने लगी।
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कुछ ही देर में मकान के ऊपर खड़ा एक विशाल सूखा चीड़ का पेड़ जड़ से टूटकर घर पर गिर पड़ा। पेड़ गिरते ही तेज धमाका हुआ और मकान की छत तथा दीवारों को भारी नुकसान पहुंचा। शांत धार्मिक माहौल पलभर में अफरा-तफरी में बदल गया।
मलबे में दबा सामान, परिवार पर टूटा संकट
हादसे के बाद ग्रामीणों ने तत्काल राहत कार्य शुरू किया और घर के अंदर मौजूद लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला। घटना में कुछ लोग घायल हुए, जिन्हें प्राथमिक उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया।
पेड़ गिरने से मकान का बड़ा हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया। घर में रखा घरेलू सामान, अनाज और अन्य जरूरी वस्तुएं भी मलबे में दब गईं। परिवार को आर्थिक नुकसान के साथ रहने की गंभीर समस्या का भी सामना करना पड़ रहा है।
ग्रामीणों ने उठाए सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
घटना के बाद स्थानीय लोगों ने प्रशासन और संबंधित विभागों से सूखे एवं खतरनाक पेड़ों को हटाने की मांग तेज कर दी है। ग्रामीणों का कहना है कि गांवों और आबादी वाले क्षेत्रों में ऐसे कई पुराने और जर्जर पेड़ मौजूद हैं, जो आंधी और बारिश के दौरान कभी भी हादसे का कारण बन सकते हैं।
लोगों का आरोप है कि लंबे समय से इस समस्या की ओर ध्यान दिलाया जा रहा है, लेकिन विभिन्न प्रशासनिक और तकनीकी प्रक्रियाओं के कारण समय पर कार्रवाई नहीं हो पाती।
राहत और मुआवजे की मांग
ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने प्रशासन से प्रभावित परिवार को तत्काल राहत उपलब्ध कराने की मांग की है। साथ ही मकान को हुए नुकसान का आकलन कर उचित आर्थिक सहायता देने की भी अपील की गई है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि प्राकृतिक आपदा के कारण परिवार की वर्षों की मेहनत प्रभावित हुई है। ऐसे समय में सरकारी सहायता और पुनर्वास व्यवस्था बेहद जरूरी है।
आबादी के बीच खड़े सूखे पेड़ बन रहे खतरा
बनेगांव की घटना ने एक बार फिर पहाड़ी क्षेत्रों में खड़े सूखे और पुराने पेड़ों के खतरे को उजागर कर दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि बरसात के मौसम से पहले ऐसे पेड़ों की पहचान कर उन्हें हटाने की प्रक्रिया तेज की जानी चाहिए।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते जोखिम वाले पेड़ों को हटाया जाए तो भविष्य में ऐसी घटनाओं को काफी हद तक रोका जा सकता है। फिलहाल पूरा गांव प्रभावित परिवार के साथ खड़ा है और प्रशासन से जल्द मदद मिलने की उम्मीद कर रहा है।











